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10 बेटियों के बाद महिला ने दिया बेटे को जन्म
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jan 07, 2026, 11:00 am IST
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हरियाणा के जींद जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में हैरानी और चर्चा दोनों पैदा कर दी है. बेटे की चाह में एक महिला ने 11वीं बार मां बनने का अनुभव किया और इस बार उसकी मुराद पूरी हो गई. दस बेटियों के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल ऐसा बना कि अस्पताल को गुब्बारों से सजा दिया गया और जश्न मनाया गया.
जोखिम के बावजूद नॉर्मल डिलीवरी अस्पताल की महिला डॉक्टर के मुताबिक, डिलीवरी नॉर्मल तरीके से हुई, लेकिन मामला पूरी तरह आसान नहीं था. महिला के शरीर में खून की कमी थी, जिससे डिलीवरी जोखिम भरी मानी जा रही थी. इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षित प्रसव कराया और मां-बेटा दोनों स्वस्थ हैं. पिता की भावुक प्रतिक्रिया महिला के पति संजय, जो पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं, अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए. उन्होंने बताया कि शादी को 19 साल हो चुके हैं और उनकी सबसे बड़ी बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है. जब अस्पताल में एक महिला पत्रकार ने उनसे दसों बेटियों के नाम पूछे, तो वह खुशी और भावुकता में कुछ नाम भूल गए. संजय ने खुद माना कि बेटे की खुशी में वह इतना भावुक हो गए हैं कि बेटियों के नाम भी याद नहीं रह पा रहे.उन्होंने बताया कि जब पत्नी को डिलीवरी के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो दिल बहुत तेज धड़क रहा था. बेटे के जन्म की खबर मिलते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए. बेटियों की भी थी भाई की ख्वाहिश संजय ने बताया कि उनकी बेटियां भी चाहती थीं कि इस बार घर में भाई आए. बेटियों ने उनसे कहा था कि “इस बार हमारे लिए भइया लेकर आना.” पड़ोसियों तक ने मजाक में कहा था कि अगर बेटा हुआ तो दो डीजे लगाए जाएंगे. बेटे के जन्म के बाद पूरे परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई. अस्पताल बना जश्न का गवाह परिवार की खुशी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निजी अस्पताल को गुब्बारों से सजाया गया. हर आने-जाने वाला इस अनोखी कहानी के बारे में पूछता नजर आया. महिला ने भी कहा कि बेटे की चाह अब पूरी हो गई है. डिलीवरी से पहले वह काफी घबराई हुई थीं, लेकिन अब सब ठीक है. 99 महीने गर्भावस्था में गुजरे एक चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि 19 साल की शादीशुदा जिंदगी में सुनीता ने करीब 7 साल 5 महीने सिर्फ गर्भावस्था में ही बिताए हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 99 महीने. उनकी सबसे बड़ी बेटी सरीन 17 साल की है और 12वीं में पढ़ रही है, जबकि सबसे छोटी बेटी अभी एक साल की है. सीमित संसाधन, बड़ी जिम्मेदारी संजय दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. उन्होंने बताया कि घरवालों ने कभी ज्यादा बच्चों को लेकर कोई दबाव नहीं बनाया. उनके चाचा की भी पांच बेटियां हैं. संजय का कहना है कि वे अपनी सभी बेटियों की परवरिश कर रहे हैं और आगे भी करेंगे.यह मामला एक ओर जहां बेटे के जन्म की खुशी दिखाता है, वहीं समाज में बेटे की चाह और उससे जुड़ी मानसिकता पर भी सवाल खड़े करता है, जिस पर चर्चा लगातार जारी है. |
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