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रूस पर 500% टैरिफ वाले बिल को ट्रंप की मंजूरी, अमेरिका के निशाने पर भारत
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jan 08, 2026, 11:38 am IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ एक बड़े और कड़े कदम को मंजूरी दे दी है. ट्रंप ने रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े एक द्विदलीय (बाइपार्टिजन) बिल को हरी झंडी दे दी है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस में जल्द पेश किया जाएगा. इस बिल को लेकर अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने जानकारी दी है कि अगले सप्ताह इस पर मतदान हो सकता है. यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो इसका असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जो फिलहाल रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं. रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती का संकेत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को यह अधिकार देगा कि वे उन देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकें, जो रूसी तेल खरीदकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध रणनीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं. ग्राहम के मुताबिक, सस्ते रूसी तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस विधेयक को तैयार करने में उन्होंने सीनेटर ब्लूमथल और अन्य सांसदों के साथ मिलकर कई महीनों तक काम किया है. सोशल मीडिया पर ग्राहम का बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए पोस्ट में लिंडसे ग्राहम ने इस बिल को मौजूदा हालात में बेहद जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन शांति वार्ता के लिए समझौते और रियायतें देने को तैयार है, जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सिर्फ बातचीत का दिखावा कर रहे हैं और निर्दोष नागरिकों की हत्याएं जारी रखे हुए हैं. ग्राहम ने लिखा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ “असाधारण ताकत” देगा, ताकि वे इन देशों पर दबाव बना सकें और उन्हें रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए मजबूर किया जा सके. उनके मुताबिक, यही तेल यूक्रेन के खिलाफ चल रही हिंसा के लिए वित्तीय आधार बन रहा है. क्या है रूस पर प्रतिबंध वाला यह बिल? अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित कानून का नाम “Sanctioning of Russia Act 2025” है. इस बिल में रूस के खिलाफ कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं. बिल के तहत: रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है. रूस से जुड़े व्यक्तियों और संस्थानों पर भारी जुर्माना और अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे. यह अब तक के सबसे कठोर आर्थिक कदमों में से एक माना जा रहा है. यूक्रेन युद्ध और शांति वार्ता के बीच फैसला रूस के खिलाफ यह सख्त रुख ऐसे समय में अपनाया गया है, जब यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयास जारी हैं. 7 जनवरी को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी, जिसमें युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा हुई. इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल थे. वार्ता के दौरान रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन को समर्थन देने के विकल्पों पर विचार किया गया. भारत को लेकर ट्रंप का बयान इस घटनाक्रम से एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को लेकर भी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस को लेकर उनसे खुश नहीं हैं, क्योंकि भारत को अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. इस बयान को भी रूस-भारत-अमेरिका त्रिकोणीय संबंधों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है. |
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