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आस्था, तप और पुण्य का महापर्व, जानिए माघ मेला 2026 की तारीखें और स्नान का महत्व
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jan 02, 2026, 12:14 pm IST
Keywords: Magh Mela 2026 Date आस्था महापर्व माघ मेला 2026
सनातन परंपरा में माघ मास को साधना, संयम और आत्मशुद्धि का महीना माना गया है. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि माघ माह में किया गया स्नान, दान और जप व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय करता है. इसी आध्यात्मिक मान्यता के चलते उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल माघ मेले का भव्य आयोजन होता है, जो श्रद्धा और विश्वास का अनुपम उदाहरण है. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर लगने वाला माघ मेला साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के लिए किसी तपोभूमि से कम नहीं होता. यहां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों लोग पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं. वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी से होगी और इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन होगा. माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान पर्वों की सूची हालांकि पूरे माघ मास में संगम स्नान का विशेष महत्व है, लेकिन कुछ तिथियां ऐसी होती हैं, जिन्हें शास्त्रों में महापुण्यदायी बताया गया है. माघ मेला 2026 के दौरान कुल छह मुख्य स्नान पर्व मनाए जाएंगे, जिन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेले का शुभारंभ 3 जनवरी 2026 को होगा. इसके बाद 14 जनवरी को मकर संक्रांति का स्नान पर्व पड़ेगा, जिसे सूर्य के उत्तरायण होने के कारण अत्यंत शुभ माना जाता है. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का महास्नान होगा, जो माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर चौथा मुख्य स्नान किया जाएगा. इसके बाद 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा और अंत में 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम स्नान पर्व के साथ माघ मेले का समापन होगा. मौनी अमावस्या: माघ मेले का प्राण माघ मेले में यदि किसी एक दिन को सर्वोच्च पुण्यकारी माना जाता है, तो वह मौनी अमावस्या है. इस दिन संगम तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन धारण कर संगम स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मन को भी गहरी शांति मिलती है. माना जाता है कि यह स्नान मोक्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का स्नान 18 जनवरी को होगा. स्नान का श्रेष्ठ समय और धार्मिक नियम हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक क्रिया के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम माना गया है. माघ मेले के दौरान भी संगम स्नान के लिए यही समय सबसे शुभ बताया गया है. ब्रह्म मुहूर्त सामान्यतः सुबह लगभग 4 बजे से 5:30 बजे तक रहता है. इस समय किए गए स्नान से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान किया गया दान, जप और ध्यान जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है.माघ मेला 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव है. संगम की पवित्र धारा में डुबकी लगाते श्रद्धालु इस बात का प्रमाण हैं कि आज भी आस्था और विश्वास भारतीय जीवन का मूल आधार बने हुए हैं. |
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