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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन जनता जनार्दन संवाददाता ,  Feb 10, 2024
नई दिल्ली: प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले नौ दिवसीय नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का शुभारंभ 10 फरवरी को सुबह 11 बजे माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा किया जाएगा। यह जानकारी गुरुवार को कंस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के निदेशक श्री युवराज मलिक ने दी। उन्होंने विश्व पुस्तक मेले की संपूर्ण जानकारी देते हुए कहा, ''विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक मेला केवल एक आयोजन नहीं है, यह एक उत्सव है, जिसमें पाठकों ....  समाचार पढ़ें
सैमसंग गैलेक्सी टैब S9 सीरिज 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024' के दूसरा दिन रहा नए विचारों और शानदार वक्ताओं के नाम जनता जनार्दन संवाददाता ,  Feb 03, 2024
दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक शो, सैमसंग गैलेक्सी टैब S9 सीरिज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के दूसरे दिन की शुरुआत होटल क्लार्क्स आमेर, जयपुर में, 2 फरवरी की सर्द सुबह में कई रोचक और उत्तेजक सत्रों के साथ हुई| फेस्टिवल का दूसरा दिन राजनीति, जीवनीकार, संगीत, स्टाइल, अध्यात्म और रचनात्मकता के नाम रहा| दिन ....  समाचार पढ़ें
तमिल: लोक साहित्य का 'आलोक' गौरव अवस्थी ,  Feb 03, 2024
1950 के दशक से जयकांतन का साहित्य भी लोक के इर्द-गिर्द ही घूमता है। उनकी रचनाओं में रिक्शा चालक, वेश्या, कूड़ा बनने वाले बच्चों जैसे निम्न वर्ग के लोग पात्र के रूप में पाए जाते हैं। बीआर राजम अय्यर एवं ए माधवैया के साहित्य में भी आम आदमी के जीवन का चित्रण मिलता है। काली माटी के अंचल वाले इडैचेवल गांव में जन्मे कृषक जीवन से संबद्ध ....  समाचार पढ़ें
सैमसंग गैलेक्सी टैब S9 सीरिज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 की शानदार शुरुआत जनता जनार्दन संवाददाता ,  Feb 02, 2024
दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक शो, सैमसंग गैलेक्सी टैब S9 सीरिज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 की शुरुआत आज, 1 फरवरी को होटल क्लार्क्स आमेर, जयपुर में शानदार कार्यक्रम के साथ हुई. ....  समाचार पढ़ें
निर्मल वर्मा-गगन गिल की किताबें 18 साल बाद लौटीं राजकमल जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 15, 2024
आधुनिक हिंदी के प्रमुख हस्ताक्षरों में निर्मल वर्मा की अपनी ख़ास महत्ता और लोकप्रियता रही है।वे अपने समय में जितने विशिष्ट रहे, आज युवा पीढ़ी के बीच उतने ही प्रिय हैं। उनकी सभी किताबें राजकमल से2005 तक प्रकाशित होती रहीं। उसके बाद 18 साल की अवधि अलगाव की रही। अब 2024 में फ़रवरी से अप्रैल के दरम्यान उनकी कुल 43 किताबें फिर से राजकमल से नई साज-सज्जा में प्रकाशित होंगी। साथ ही 3 अप्रैल को निर्मल जी के 95वें जन्मदिवस के अवसर पर उनकी अब तक अप्रकाशित-असंकलित कहानियों का एक नवीनतम संग्रह नई दिल्ली में लोकार्पित होगा। इस तरह कुल 44 किताबों के साथ निर्मल जी पुन: राजकमल के लेखक हैं। राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में इसे एक नई शुरुआत बताया। इस अवसर पर, निर्मल वर्मा की कृतियों की स्वत्त्वाधिकारी और हिंदी की प्रतिष्ठित कवि-लेखक गगन गिल ने कहा, "निर्मल जी और मेरी, हम दोनों की सभी किताबें अब राजकमल प्रकाशन में लौट रही हैं। यह क्षण घर लौटने जैसा है। हमारा सबसे पहला प्रकाशक तो राजकमल ही है। निर्मल जी ओंप्रकाश जी के समय से राजकमल से जुड़े हुए थे, सन् 1956-57 से, मैं श्रीमती शीला सन्धू के समय से, 1987-88 से। राजकमल के साथ शुरू से ही एक सुचारु सामंजस्य था। अशोक जी के आने के बाद उनके साथ भी मैंने अनेक किताबें तैयार कीं निर्मल जी की, मेरी, हमारे मित्रों की। फिर 2005 में दुर्भाग्यवश हमारा मनमुटाव हुआ और रास्ते अलग हो गए। "इन 18 सालों में मुझे कई लोगों के साथ काम करने का मौक़ा मिला मगर जैसा ताल-मेल शुरू से ही राजकमल और अशोक जी के साथ रहा, वह अतुलनीय है। आज उम्र के जिस पड़ाव पर मैं हूँ, बहुत सारी चीजें समेटनी हैं, बहुत सारा काम एक समय-सीमा के अन्दर करना है। अशोक जी के साथ मिलकर वह सब ठीक से समेटा जाएगा, ऐसा मेरा विश्वास है। "हमें एकसाथ वापस आने में 18 साल लगे मगर इस सारे अंतराल में हमारा पारिवारिक स्नेह बना रहा। अगर अशोक जी इतने खुले मन से हमें बार-बार नहीं बुला रहे होते तो शायद यह वापसी नहीं हो पाती। इस वापसी का सारा श्रेय अशोक जी को है। "निर्मल जी को शुरू से ही हर पीढ़ी के पाठकों ने बहुत प्यार किया है। आज नई पीढ़ी, विशेषकर अंग्रेज़ीदाँ पीढ़ी, उनके साहित्य में नये सिरे से अपने आत्म-बिंब पा रही है, खोज रही है। मुझे पूरी उम्मीद है जिस कल्पनाशील प्रस्तुति के साथ उनकी चीजें नयी पीढ़ी तक पहुँचनी चाहिएँ, राजकमल उसमें अपनी भूमिका बख़ूब निभाएगा। "18 साल बाद इस वापस लौटने के निर्णय में शायद मेरे बौद्ध हो जाने की भी अहम भूमिका है। 'निपट अकेले ही जाना था यदि मुझको, क्या मिला इतने मित्र-शत्रु बनाकर'; नालंदा के आचार्य शांतिदेव ने कहा था। आज यही मेरा सच है। किसी दैवी आशीर्वाद से मेरा मन इतना उजला और शान्त है कि मैं निश्चिंत हो पा रही हूँ। जिस भरोसे से मैं यह ज़िम्मेदारी राजकमल और अशोक जी को सौंप रही हूँ, मुझे मालूम है, वे उसे अच्छी तरह निभायेंगे। आज भी, आगे भी।” अशोक महेश्वरी ने कहा, "इन अठारह वर्षों में शायद ही कोई ऐसा दिन रहा होगा, जब मुझे निर्मल जी की याद न आई हो। मुझे उनका स्नेह और विश्वास बहुत मिला है। वह मैं कभी भुला नहीं सका। अठारह वर्ष पहले जिन परिस्थितियों में निर्मल जी की किताबें अन्यत्र छपने गयीं, वह मेरे लिए दुखद और राजकमल प्रकाशन के लिए अप्रिय प्रसंग बना रहा। तब गगन जी की मन:स्थिति को, उनकी बातों को समझने में मेरी तरफ से चूक हुई और अलगाव की यह घटना राजकमल के इतिहास का एक घाव बन गई, जिसे भरने में अठारह साल लगे। मुझे कुछ अधिक संवेदनशील और धैर्यवान होना था। अपने को सही साबित करने का उत्साह किसी के मन को चोटिल कर सकता है, ऐसा समझने में उम्र निकल जाती है। कई बार हम अपनी गलतियों से सीखते हैं, कई बार समय हमें किसी बड़े उद्देश्य के लिए कठिन पाठ भी पढ़ाता है। खैर, मुझे निजी तौर पर, और सांस्थानिक रूप से भी अब बहुत संतोष है कि निर्मल जी और गगन जी की सभी किताबें अपने मूल प्रकाशन में वापस लौट आई हैं।” उन्होंने कहा, "गगन केवल निर्मल जी की जीवनसंगिनी या राजकमल की लेखक की तरह नहीं थीं। वे पारिवारिक मित्र रहीं। राजकमल की शुभचिंतक रहीं। हमने निर्मल जी की, उनकी और कई और लेखकों की भी किताबों को सुंदर बनाने-सँवारने का काम पहले एकसाथ किया है। बच्चों की उनके साथ सुंदर यादें जुड़ी हुई थीं। मुझे लगता रहा, निर्मल जी और गगन जी को राजकमल से जुड़े रहना चाहिए। एक और बात का जिक्र करना चाहूँगा। निर्मल जी की किताबों के राजकमल से चले जाने के दशक बीत जाने के बावजूद, दूरदराज से बहुत सारे पुस्तक-प्रेमी उनकी किताबों की माँग राजकमल से ही करते रहे। यह दुर्लभ स्थिति है। दिल छू लेने वाली बात है कि साहित्य के सीमान्त पर बसा पाठकों का ऐसा मासूम तबका अभी भी है जो किसी लेखक और प्रकाशक को इस हद तक अभिन्न माने। इन स्थितियों में हमारा भी यह दायित्व बनता था कि हम पुनः अपने प्रिय लेखक की किताबें उन पाठकों के लिए लेकर आएँ। उन सभी पाठकों और पुस्तकप्रेमियों के प्रति हमारे मन में बहुत आदर है जो हमसे लगातार निर्मल जी की किताबों के बारे में पूछते रहे।” राजकमल प्रकाशन के सीईओ आमोद महेश्वरी ने बताया कि इस साल नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में निर्मल वर्मा जी की 6 किताबों और गगन गिल जी की 2 किताबों का पहला सेट युवा पाठकों को ध्यान में रखते हुए आकर्षक साज-सज्जा में उपलब्ध हो रहा है। मार्च में निर्मल जी की 12 किताबों और गगन जी की 3 किताबों का दूसरा सेट जारी होगा। अप्रैल तक दोनों की सभी किताबें बाज़ार में उपलब्ध हो जाएंगी। सबके ई-बुक भी आएँगे। यह हमारे लिए दोहरी ख़ुशी है कि दो महत्वपूर्ण लेखकों की सभी कृतियाँ अपने पहले प्रकाशक के पास लौटी हैं। इसके लिए हम गगन जी के आभारी हैं। उन तमाम पाठकों-पुस्तकप्रेमियों और शुभचिंतकों का भी धन्यवाद जिनकी सद्भावनाओं से यह ऐतिहासिक कार्य सम्पन्न हुआ। ....  समाचार पढ़ें
जयपुर साहित्य महोत्सव 2024: जहां उत्सव के केंद्र में कला रचनात्मक उत्कृष्टता के चरम पर है जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 15, 2024
प्रतिष्ठित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का बहुप्रतीक्षित 2024 संस्करण 1 से 5 फरवरी, 2024 तक जयपुर के शानदार होटल क्लार्क्स आमेर में दर्शकों को लुभाने के लिए तैयार है. हर साल, फेस्टिवल के पीछे की रचनात्मक शक्ति, टीमवर्क आर्ट्स, आविष्कारशील पहलों के माध्यम से कला को बढ़ावा देने और विश्व विरासत को संरक्षित ....  समाचार पढ़ें
जयपुर बुकमार्क 2024: साउथ एशिया का प्रीमियर पब्लिशिंग कॉन्क्लेव अपने 11वें वर्ष में कदम रखते हुए जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 06, 2024
अपने 11वें संस्करण के लिए तैयार जयपुर बुकमार्क (JBM) साउथ एशियन पब्लिशिंग इंडस्ट्री का सबसे बड़ा B2B प्लेटफार्म है| 'साहित्य का कुम्भ' कहलाए जाने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के समानांतर चलने वाला JBM एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहाँ किताबें और बिजनेस आपस में जुड़ जाते हैं| JBM का आयोजन भी ....  समाचार पढ़ें
 संजीव को हिंदी में तो नीलम शरण को अंग्रेजी में साहित्य अकादमी 2023 पुरस्कार जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 20, 2023
साहित्य अकादमी ने 2023 के लिए अलग अलग पुरस्कारों की घोषणा की. साहित्य अकादमी ने हिंदी के लिए संजीव, अंग्रेजी के लिए नीलम शरण गौर और उर्दू के लिए सादिक नवाब सहर समेत 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को प्रतिष्ठित वार्षिक 'साहित्य अकादमी पुरस्कार 2023' से सम्मानित करने की घोषणा की. अकादमी के सचिव के. श्रीनिवास राव ने बताया कि अकादमी ने नौ कविता-संग्रह, छह उपन्यास, पांच कहानी संग्रह, तीन निबंध और एक आलोचना की पुस्तक को पुरस्कार के लिए चुना है. ....  समाचार पढ़ें
जयपुर म्यूजिक स्टेज 2024 के शानदार सितारे! जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 07, 2023
जब जयपुर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल' के 17वें संस्करण के लिए तैयार है, तब जयपुर म्यूजिक स्टेज अपने बेमिसाल सितारों के साथ 'धरती के सबसे बड़े साहित्यिक शो' के साथ कदमताल के लिए तैयार है| जेएमएस में भारतीय उपमहाद्वीप के प्रतिभाशाली कलाकार प्रस्तुति देंगे, जो संगीत की विविध शैलियों और इतिहास को बयां ....  समाचार पढ़ें
लोक संस्कृति सेवा संस्थान के बैनर तले भोजपुरी महोत्सव का हुआ आयोजन जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 14, 2023
लोक संस्कृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से 8 नवंबर 2023 को भोजपुरी महोत्सव का आयोजन किया गया. जिसमें रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए। बतादे की मुलायम नगर ज्ञान विहार पानी टंकी के पास लखनऊ में सुप्रसिद्ध कलाकारों द्वारा गायन वादन के साथ ही एक से बढ़ एक नृत्य कार्यक्रम हुआ एवं मंच द्वारा मौजूद सम्मानित अतिथिगण का सम्मान संस्थान के अध्यक्ष संतोष राय ए ....  समाचार पढ़ें
159वीं जयंती 9 मई पर विशेष: सब तज,हरि भज मसल के मर्म को ऐसे समझें गौरव अवस्थी ,  May 09, 2023
हिंदी के प्रथम आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की आज 159वीं जयंती है। यह उन्हें याद करने का दिन। यह उनके ध्येय वाक्य सब तज, हरि भज का मर्म समझने का भी। अधिकांश के लिए इस मसल का अर्थ सब काम धाम छोड़कर ईश्वर की उपासना ही है लेकिन आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के लिए इस मसल के माने सिर्फ माला फेरना ....  लेख पढ़ें
साहित्य अकादेमी का साहित्योत्सव 2021 संपन्न जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 14, 2021
साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित किए जा रहे 'साहित्योत्सव 2021' के अंतिम दिन अनुवाद पुरस्कार 2019 से पुरस्कृत अनुवादकों ने अपने रचनात्मक अनुभव साझा किए। इस अनुवाद सम्मिलन की अध्यक्षता ....  लेख पढ़ें
ओड़िया कहानी: खोज   मूलः वरदा प्रसन्न महांति, अनुवाद- सुजाता शिवेन ,  Dec 31, 2020
कॉलेज के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा का आखिरी साल हमेशा भविष्य के सपनों को लेकर उलझा रहता है. प्रशासनिक सेवाओं के आकर्षण ने शोध जैसे महत्त्वपूर्ण अकादमिक कार्य को कैसे हाशिए पर डाला है, उसे ही उजागर करती विचारोत्तेजक कहानी ....  लेख पढ़ें
रिश्ता बनारस से बुनकर का माइटी इक़बाल  ,  Sep 27, 2020
चलते चलते यह भी कहता चलूं की प्रदेश सरकार के मुखिया बुनकर हित मे बिजली की या अन्य जो भी योजना लाएं,यह तय तो होना ही चाहिए कि इसका लाभ उन गरीब बुनकरों को प्राप्त हो जो रोज कमाने खाने वाले बुनकर हैं ,या जो बुनकर दो एक पावर लूम चला कर अपना धंधा करते है ना कि उन अ ....  लेख पढ़ें
बी.एच.यू मेरी साँसों में बसता है डॉ महबूब हसन ,  Jun 01, 2020
अज़ीज़ दोस्तों! बी.एच.यू. मेरे लिए हसीन यादों का एक बेश-किमती एल्बम है..कोलाज़ है, जिस में ज़िन्दगी के सारे रंग मौजूद हैं। बी.एच.यू. मेरी साँसों में बसता है! मेरे दिल की धड़कनों में शामिल है। बी.एच.यू. मेरी मुहब्बत है, मेरा इश्क़ है, मेरा जुनून है। ऐसा इश्क़ जिस ने मुझेख़ुशी व कामयाबी की नई न ....  लेख पढ़ें
ऐसा देश है मेरा: डॉ महबूब हसन ने क्या खूब लिखा   Desk JJ ,  Apr 24, 2020
ज़रा गौर से इन तस्वीरों को देखिए। इन तस्वीरों में हज़ारों बरस की मिली जुली आपसी तहज़ीब, संस्कृति, भाईचारा और प्रेम की एक लंबी दास्तान सिमट आई है। इसे गंगा जमुनी तहजीब भी कहते हैं। यहां की मिट्टी और कण कण में ये खुशबु रची बसी है। हिंदुस्तानी समाज का ताना बाना प्रेम और सौहार्द के धागों से ही तैयार हुआ है। हमने पूरी दुनियाँ को विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम का जैसा प्यारा संदेश दिया। होली, ईद, दशहरा, दीवाली और मोहर्रम जैसे त्योहार इस धागे को और मजबूत करते हैं। अनेकता में एकता की ऐसी खूबसूरत मिसाल पूरी दुनिया में कहीं भी नज़र नहीं आती। यहां हज़ारों भाषाएं और बोलियों में देश की एकता और अखण्डता के सुरीले गीत बजते हैं। संतों, सन्यासियों और फकीरों ने अपने पैगाम के जरिए इंसानियत और धार्मिक सौहार्द के दीप जलाए। प्रकृति ने भी सुंदर पहाड़ियों, ....  लेख पढ़ें
साहित्यकार भी, समाजसेवी भी और सबसे बढ़कर मां: महाश्वेता देवी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 14, 2019
आज महाश्वेता का जन्मदिन है. अगर वह जिंदा होतीं, तो 93 की होतीं. अपने नाम की ही तरह साफ, उजली और सफ्फ़ाक. उन्होंने ताउम्र लेखन व संघर्ष उनके लिए किया जो जूझ रहे थे अपनी पहचान के लिए. इसीलिए वह बड़ी साहित्यकार थीं. शिक्षक भी समाजसेवी भी. किसी एक खांचे में उन्हें अलग करना मुश्किल है. वह मां थी, एक दो की नहीं हजार चौरासी की मां... अनगिनत की मां. ....  लेख पढ़ें
किस्सा-ए-बैरागी जी! गौरव अवस्थी की श्रद्धांजलि गौरव अवस्थी ,  May 14, 2018
देश के सुप्रतिष्ठित कवि और उससे भी अधिक हंसमुख एवं सभी के सहयोग में तत्पर रहने वाले सरलता से हमेशा लबरेज रहने वाले आदरणीय बालकवि बैरागी जी हमारे पिता की तरह थे. जो स्नेह हमें अपने पिता से मिला वही बैरागी जी से भी लगातार मिलता रहा. ऐसे स्नेहिल स्वभाव के बैरागी जी से जुड़ा यह किस्सा डॉ शिवमंगल सिंह सुमन के मुंह से कभी बाल्यकाल में सुना था. ....  लेख पढ़ें
विश्व पुस्तक व कॉपीराइट दिवस विशेष:दुनिया को जोड़तीं हैं किताबें ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना ,  Apr 23, 2018
साथियों हमारे देश को विश्वगुरू इसलिए कहा जाता है कि हमारे देश की नींव प्रेम, सम्मान, ज्ञान और विज्ञान के प्रतीक महान वेदों, पुराणों, श्री रामायण,श्री भगवद्गीता, महाभारत, श्रीभागवत् महापुराण, कुरान,बाईविल, जेंद आवेस्ता वस्ता, गुरू ग्रंथ साहिब जैसे ज्ञान, वैराग्य, प्रेम, शांति और जीवन आनंद के कभी न खत्म होने वाले अनमोल खजानों से ....  लेख पढ़ें
राष्ट्रपति बनने की अनिच्छा, दोस्तों की बीवियों पर डोरेः फायर एंड फ्यूरी: इनसाइड द ट्रंप व्हाइट हाउस- पुस्तक अंश जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 05, 2018
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनना नहीं चाहते थे. ये दावा अमेरिकी पत्रकार ने अपनी किताब में किया है. अमेरिकी पत्रकार की किताब के मुताबिक, पिछले साल आश्चर्यजनक चुनावी जीत के बाद अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की आंखों में आंसू थे, लेकिन वो खुशी के आंसू नहीं थे. ....  लेख पढ़ें
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