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बजट से पहले धड़ाम से गिरे सोने-चांदी के दाम, क्या खत्म हो गया तेजी का दौर? जानें रेट
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Feb 01, 2026, 10:54 am IST
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केंद्रीय बजट 2026 पेश होने से ठीक पहले देश और दुनिया के सर्राफा बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. भारत में सोना और चांदी, दोनों की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 1 फरवरी 2026 को दिल्ली के बाजार में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,62,240 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि चांदी की कीमत करीब ₹2,78,000 प्रति किलो रही. बजट से पहले बाजार में बनी अनिश्चितता और निवेशकों की मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण सर्राफा बाजार दबाव में नजर आया. पिछले कुछ दिनों में कीमती धातुओं में आई गिरावट ने ज्वेलरी कारोबारियों से लेकर निवेशकों तक को सतर्क कर दिया है. कई ट्रेडर्स ने बजट से पहले जोखिम कम करने के लिए अपनी होल्डिंग घटाई, जिससे कीमतों पर दबाव और बढ़ गया. कुछ ही दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसला भाव जनवरी के अंत में सोना ऐतिहासिक ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा था. 30 जनवरी के आसपास सोने की कीमत ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद तेज गिरावट आई और भाव लगभग ₹1,55,000 के आसपास तक लुढ़क गए. इसी तरह चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखी गई. कुछ ही सत्रों में चांदी करीब ₹50,000 प्रति किलो तक टूट गई. विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर मार्जिन में बढ़ोतरी और बड़े निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली इस गिरावट के प्रमुख कारण रहे. वैश्विक स्तर पर भी कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता बढ़ी हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू सर्राफा कीमतों पर पड़ रहा है. बजट के बाद क्या बदलेगा रुख? बाजार जानकारों का मानना है कि बजट के बाद सोना और चांदी की कीमतों में और भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. खासतौर पर अगर सरकार आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) या सर्राफा से जुड़े किसी टैक्स ढांचे में बदलाव करती है, तो इसका सीधा असर दामों पर पड़ेगा. फिलहाल बाजार एक अनिश्चित दौर से गुजर रहा है. बजट के तुरंत बाद कीमतों में तेजी भी आ सकती है और गिरावट भी जारी रह सकती है. हालांकि, दीर्घकालिक नजरिए से विशेषज्ञ सोने और चांदी के रुझान को अब भी सकारात्मक (बुलिश) मानते हैं. वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से बचाव के लिए निवेशकों की सुरक्षित निवेश की तलाश आगे भी कीमती धातुओं को सहारा दे सकती है. इंपोर्ट ड्यूटी पर टिकी बाजार की नजर ज्वेलरी इंडस्ट्री और ट्रेडर्स की सबसे बड़ी निगाह सरकार के आयात शुल्क से जुड़े फैसले पर टिकी हुई है. वर्तमान में सोना और चांदी पर करीब 6 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है. बाजार में यह चर्चा है कि बजट में इसे घटाकर 3 से 4 प्रतिशत तक किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो घरेलू बाजार में सोने-चांदी के दाम और नीचे आ सकते हैं. इससे आने वाले शादी-ब्याह के सीजन में ग्राहकों को राहत मिलने की संभावना है और मांग में भी सुधार देखने को मिल सकता है. दूसरी ओर, अगर आयात शुल्क में कटौती नहीं होती या नियम और सख्त किए जाते हैं, तो कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है. कुछ विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि सरकार सोने की खरीद और होल्डिंग से जुड़े नियमों को और पारदर्शी बनाने के लिए नए प्रावधान ला सकती है, जिसका असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दबाव में नजर आए हैं. अप्रैल डिलीवरी वाले सोने ने पहले लगभग 5,480 डॉलर प्रति औंस का उच्च स्तर छुआ था, लेकिन वहां से 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली. बाद में अमेरिका में शाम के कारोबार के दौरान सोना करीब 4,763 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड करता दिखा. चांदी की कीमतों में गिरावट और भी ज्यादा तीखी रही. मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने पहले लगभग 118.34 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद करीब 31 प्रतिशत तक टूटकर 78.83 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई. कुछ समय के लिए चांदी 74.15 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल गई थी, जिससे वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ गई. जनवरी में चांदी ने दिखाया जबरदस्त उछाल हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद जनवरी 2026 के दौरान चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी. 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत करीब ₹2,39,000 प्रति किलो थी, जो जनवरी के अंत तक बढ़कर लगभग ₹3,12,000 प्रति किलो तक पहुंच गई. यानी एक महीने से भी कम समय में चांदी ने करीब ₹73,000 प्रति किलो या लगभग 30.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की. हालांकि महीने के आखिरी दिनों में दो सत्रों तक लगातार गिरावट भी देखने को मिली, जिससे मुनाफावसूली का संकेत मिला. बजट 2026 से सर्राफा उद्योग की उम्मीदें आज पेश होने वाले बजट 2026 से सर्राफा और ज्वेलरी सेक्टर को कई उम्मीदें हैं. कारोबारियों का मानना है कि अगर सरकार आयात शुल्क में कटौती करती है, तो इससे न सिर्फ दामों में नरमी आएगी, बल्कि मांग को भी मजबूती मिल सकती है. ऊंची कीमतों के कारण हाल के महीनों में मांग पर असर पड़ा है, खासकर भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में, जहां सोना निवेश और परंपरा दोनों से जुड़ा हुआ है. कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि सरकार इनकम टैक्स रिटर्न में सोने से जुड़े खुलासों को लेकर नए नियम ला सकती है. इसके अलावा घर में सोना रखने की सीमा और टैक्स प्रावधानों पर भी सरकार की नजर हो सकती है. इन संभावित बदलावों का असर बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. |
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