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हमेशा लाल रंग का क्यों होता है बजट ब्रीफकेस या बहीखाता?
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jan 27, 2026, 11:32 am IST
Keywords: Budget 2026 भारतीय अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीति और जीडीपी लाल रंग का महत्व nirmala sitharaman
भारत में बजट पेश होने का दिन एक खास तस्वीर से जुड़ा रहता है, और वह है संसद की सीढ़ियों पर खड़े वित्त मंत्री, हाथ में एक लाल रंग का ब्रीफकेस लिए हुए. यह दृश्य मीडिया और जनता की नजरों में हमेशा सबसे ज्यादा आकर्षित करता है. वित्त मंत्री का गंभीर चेहरा, कैमरों की चमक और लाल रंग, जो दशकों से बजट के साथ जुड़ा रहा है. इस साल भी, जैसा कि 1 फरवरी को बजट पेश होने वाला है, यह सवाल उठता है कि आखिर बजट के साथ लाल रंग का यह अनोखा संबंध कहां से आया और इसके पीछे क्या ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व छुपा हुआ है. आइए, जानते हैं बजट और लाल ब्रीफकेस की यह दिलचस्प कहानी. बजट और लाल रंग का संबंध भारत में बजट के साथ लाल रंग का गहरा संबंध ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़ा हुआ है. ब्रिटेन में सदियों से सरकारी दस्तावेज, कानूनी कागजात और वित्तीय रिपोर्ट्स को लाल रंग के कवर में रखा जाता था. वहां, लाल रंग को हमेशा शक्ति, अधिकार और गंभीरता का प्रतीक माना गया. जब ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया, तो उन्होंने वित्तीय दस्तावेजों और बजट को भी इस परंपरा का पालन करते हुए लाल रंग में रखने का निर्णय लिया. भारत में बजट की पहली बार प्रस्तुति भारत में पहला बजट 1860 में पेश किया गया था, जब देश पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के अधीन था. उस समय, प्रशासन और वित्तीय निर्णय ब्रिटिश नियमों के आधार पर किए जाते थे. यह वही समय था जब भारत में बजट को लाल कवर या लाल ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई. अंग्रेजों की यह परंपरा आजादी के बाद भी जारी रही और बजट पेश करने का यह तरीका दशकों तक बना रहा. 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी, यह परंपरा पूरी तरह से कायम रही और लाल ब्रीफकेस भारतीय बजट का प्रतीक बन गया. लाल रंग का महत्व लाल रंग को केवल दिखावे के लिए नहीं चुना गया था, बल्कि इसके पीछे एक गहरा अर्थ था. बजट को एक जिम्मेदारी, शक्ति और गंभीरता के दस्तावेज के रूप में देखा जाता था. यह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की समृद्धि, खर्च, कर नीति, विकास योजनाओं और आर्थिक दिशा का निर्धारण करता था. ऐसे में लाल रंग यह संदेश देता था कि यह दस्तावेज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, और इससे जुड़े फैसले पूरे देश की आर्थिक दिशा को प्रभावित करेंगे. यह रंग भी इसलिए चुना गया ताकि बजट के महत्व को स्पष्ट किया जा सके. लाल ब्रीफकेस और आम जनता समय के साथ, यह लाल ब्रीफकेस केवल एक सरकारी परंपरा नहीं रह गया, बल्कि यह आम लोगों की नजरों में बजट का प्रतीक बन गया. जैसे ही मीडिया में वित्त मंत्री के हाथ में लाल रंग का ब्रीफकेस दिखता था, लोगों को समझ आ जाता था कि बजट पेश होने वाला है. यह दृश्य इतना हिट हो गया कि अब बिना लाल ब्रीफकेस के बजट की कल्पना भी नहीं की जा सकती. बजट का यह प्रतीक लोगों के बीच एक पहचान बन चुका था, और यह परंपरा समय के साथ और भी मजबूत होती गई. 2019 में बदलाव: परंपरा को तोड़ा गया 2019 में एक दिलचस्प घटना घटी जब पहली बार बजट की फाइल का रंग बदल दिया गया. वित्त मंत्री ने लाल ब्रीफकेस की जगह एक साधारण लाल फोल्डर का इस्तेमाल किया. यह बदलाव कई मायनों में महत्वपूर्ण था. इसे औपनिवेशिक दौर की परंपरा से बाहर निकलने के प्रतीक के रूप में देखा गया. इस कदम का उद्देश्य था कि भारत अब अपनी नीतियों और प्रतीकों को नए दृष्टिकोण से देख रहा है, और यह देश के आत्मनिर्भर होने की ओर एक कदम था. सरकार का यह संदेश था कि भारत अब अपनी पहचान और इतिहास को नए नजरिए से आकार दे रहा है. |
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