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कांजीवरम साड़ी पहन कर्तव्य भवन पहुंचीं निर्मला सीतारमण
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Feb 01, 2026, 11:33 am IST
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नई दिल्ली में आम बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कर्तव्य भवन पहुंचना हमेशा की तरह सुर्खियों में रहा. इस बार वह तमिलनाडु की पारंपरिक कांजीवरम साड़ी में नजर आईं, जिसमें बैंगनी रंग की बॉडी और सुनहरे बॉर्डर का खूबसूरत संयोजन था. संसद भवन की ओर बढ़ते हुए उनकी यह पारंपरिक पोशाक एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई. बीते कुछ वर्षों से यह देखा गया है कि बजट के दिन उनकी साड़ी केवल पहनावे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि भारतीय हथकरघा, क्षेत्रीय कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का एक प्रतीक बन चुकी है. हर साल बजट के मौके पर उनके पहनावे में भारत के अलग-अलग राज्यों की हथकरघा परंपराओं की झलक देखने को मिलती है. इससे स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है. यही वजह है कि फैशन विशेषज्ञों से लेकर सामाजिक विश्लेषक तक, सभी उनकी साड़ियों के रंग, डिजाइन और उसके निहितार्थों पर चर्चा करते हैं. बैंगनी रंग का प्रतीकात्मक अर्थ इस बार चुना गया बैंगनी रंग अपने आप में खास माना जा रहा है. बैंगनी रंग को अक्सर महिला सशक्तीकरण, गरिमा, समानता और न्याय का प्रतीक माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में भी इस रंग का ऐतिहासिक महत्व रहा है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस बजट में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी. राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का यह भी मानना है कि साड़ी के जरिए दिए जाने वाले ये सांकेतिक संदेश केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था के व्यापक संदर्भों से जुड़े होते हैं. इसके अलावा, तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांजीवरम जैसी पारंपरिक साड़ी का चयन क्षेत्रीय जुड़ाव और सांस्कृतिक सम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है. बजट और हथकरघा परंपरा का अनोखा संगम निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2019 में पहली बार बजट पेश करते समय जिस परंपरा की शुरुआत की थी, वह अब एक पहचान बन चुकी है. हर साल अलग-अलग राज्यों की साड़ियों का चयन कर वह न केवल भारत की विविध संस्कृति को रेखांकित करती हैं, बल्कि हथकरघा उद्योग से जुड़े कारीगरों को सम्मान भी देती हैं. यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला बुनकरों की भूमिका और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण की ओर भी ध्यान खींचती है. पिछले बजटों में पहनी गई साड़ियों की झलक बजट 2025: पिछले वर्ष बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने ऑफ-व्हाइट रंग की मधुबनी साड़ी पहनी थी, जिस पर मछली जैसे पारंपरिक रूपांकनों की सुंदर चित्रकारी थी. यह साड़ी पद्मश्री से सम्मानित मधुबनी कलाकार दुलारी देवी द्वारा उन्हें भेंट की गई थी. इस पोशाक के जरिए बिहार की लोककला और पारंपरिक चित्रकला को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता मिली. बजट 2024: इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की नीली तुसार सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसमें कंथा कढ़ाई का बारीक और आकर्षक काम किया गया था. यह साड़ी बंगाल की पारंपरिक कढ़ाई और रेशम उद्योग की समृद्ध परंपरा को दर्शाती थी, साथ ही स्थानीय कारीगरों के कौशल को सामने लाने का माध्यम बनी. बजट 2023: इस वर्ष कर्नाटक की इलकल बुनाई वाली लाल हथकरघा रेशमी साड़ी चर्चा में रही. काले बॉर्डर पर सोने की जरी और पारंपरिक कसूती कढ़ाई ने इसे एक क्लासिक भारतीय परिधान का रूप दिया. यह साड़ी दक्षिण भारत की बुनाई परंपरा और शिल्पकला की पहचान बनकर उभरी. बजट 2022: ओडिशा की पारंपरिक बोमकाई साड़ी इस साल उनके पहनावे का हिस्सा रही. गहरे भूरे रंग की इस साड़ी ने सदियों पुरानी बुनाई परंपरा और स्थानीय कारीगरों के संरक्षण का संदेश दिया. बोमकाई साड़ी को ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर का अहम प्रतीक माना जाता है. बजट 2021: तेलंगाना की पोचमपल्ली इक्कट सिल्क साड़ी, लाल और ऑफ-व्हाइट रंग में हरे बॉर्डर के साथ, ज्यामितीय डिजाइनों से सजी हुई थी. यह साड़ी भारतीय हस्तशिल्प की जटिल तकनीकों और समय-साध्य बुनाई प्रक्रिया का उदाहरण बनी. बजट 2020: कोविड महामारी के दौर में उन्होंने चमकीली पीली रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसमें हरा बॉर्डर था. पीला रंग आशा, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. उस कठिन समय में यह रंग देश की अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान की उम्मीद के तौर पर देखा गया. बजट 2019: अपने पहले बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण ने गुलाबी मंगलगिरी साड़ी का चयन किया था, जिस पर सुनहरा बॉर्डर था. यह आंध्र प्रदेश की पारंपरिक बुनाई शैली का प्रतिनिधित्व करती थी और उनकी इस परंपरा की शुरुआत का प्रतीक बनी. क्या महिलाओं के लिए होगा खास? बैंगनी कांजीवरम साड़ी के चयन के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार का बजट महिलाओं के हितों को केंद्र में रखेगा. शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नई घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इन कयासों की पुष्टि तो बजट भाषण के दौरान ही होगी, जब वित्त मंत्री संसद में 11 बजे अपनी घोषणाएं रखेंगी. |
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