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गणतंत्र दिवस परेड देखकर बोलीं EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर

जनता जनार्दन संवाददाता , Jan 26, 2026, 18:24 pm IST
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गणतंत्र दिवस परेड देखकर बोलीं EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर

भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मना रहा है, और इस ऐतिहासिक अवसर पर यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन विशेष रूप से मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान बताया और इसे अपनी करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना.

गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी उपस्थिति को लेकर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने लिखा, "गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट के रूप में उपस्थित होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है. एक मजबूत और सफल भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर, खुशहाल और सुरक्षित बनाता है, और इससे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा होता है."

यह बयान भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है, और यह भी दर्शाता है कि यूरोप के नेता भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को कितना महत्व दे रहे हैं.

भारत और यूरोपीय संघ के बढ़ते रिश्ते

यूरोपीय संघ परंपरागत रूप से अमेरिका के करीब रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति और व्यापार में बदलाव के कारण यूरोप के देशों ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान 'टैरिफ बम' जैसे विवादों ने यूरोप को अमेरिका से थोड़ी दूरी बनाने की प्रेरणा दी. ऐसे में, अब यूरोपीय संघ भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और रिश्तों को नई दिशा मिल रही है.

भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का महत्वपूर्ण अवसर

यह खास मौका भी था जब दोनों ईयू नेताओं ने दिल्ली में अपनी यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की. इस दौरान, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की और बताया कि यह मुलाकात भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को और अधिक मजबूत करने का संकेत है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "ईयू काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और ईयू कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करना हमारे लिए गर्व की बात है. 77वें गणतंत्र दिवस पर उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करना हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है."

इस दौरान, जयशंकर ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आगामी बातचीत भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू करेगी. दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में भी सकारात्मक चर्चा हो सकती है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है.

भारत-यूरोपीय संघ के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौता

यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भारत दौरे का एक और अहम पहलू यह है कि दोनों नेता 27 जनवरी को भारत में होने वाले 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. इस सम्मेलन में दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत हो सकती है. यदि यह समझौता होता है, तो यह भारत और यूरोपीय संघ के व्यापारिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, और तकनीकी सहयोग को एक नई दिशा मिलेगी और आर्थिक रिश्ते और भी मजबूत होंगे.

गॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वागत समारोह

भारत में आगमन के बाद, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने से पहले उर्सुला और कोस्टा को दिल्ली में एक भव्य गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया. यह एक सम्मानजनक परंपरा है, जो विशेष अतिथियों के सम्मान में आयोजित की जाती है. दोनों नेताओं ने इस स्वागत को गर्व के साथ स्वीकार किया और इसे भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना.

भारत-ईयू संबंधों में विश्वास का नया अध्याय

भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है, विशेषकर जब भारत और यूरोप के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बढ़ रहा है. इससे पहले, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक ट्वीट में कहा था, "भारत-ईयू: एक साझेदारी जो भरोसे और समझ पर आधारित है. यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का भारत में स्वागत करना हमारे लिए गर्व का विषय है. इस अवसर पर, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया."

यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक स्थिर, भरोसेमंद और आर्थिक रूप से संपन्न साझेदारी की ओर इशारा करता है. जब दोनों पक्ष एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं, तो यह ना केवल उनके देशों के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होता है.

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