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Su-57 फाइटर जेट से लेकर S-400 मिसाइल तक, गेमचेंजर होगा पुतिन का भारत दौरा

जनता जनार्दन संवाददाता , Nov 29, 2025, 9:21 am IST
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Su-57 फाइटर जेट से लेकर S-400 मिसाइल तक, गेमचेंजर होगा पुतिन का भारत दौरा

कुछ दिनों पहले यह तय हो गया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत समेत रूस-भारत 23वें शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आएंगे. उनके स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पूरी तैयारी कर रही हैं. इस दौरान एक औपचारिक डिनर कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें पुतिन सम्मानित मेहमान होंगे. लेकिन इस यात्रा का महत्व सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, इसे कई विशेषज्ञ “नए रक्षा सौदों की नींव” के रूप में देख रहे हैं.

रक्षा और कूटनीति के बीच क्यों है यह दौरा अहम

पिछले कुछ महीनों में रूस और भारत में हुए कई द्विपक्षीय संवादों के बाद, बताया जा रहा है कि इस दौरे में सिर्फ चर्चाएँ ही नहीं, बड़े रक्षा समझौतों की संभावनाएं भी जमी हुई हैं. विशेष रूप से, तीन महत्त्वपूर्ण हथियार प्रणालियों- S-400 Triumf वायु रक्षा प्रणाली, Sukhoi Su-57 पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान, और अन्य आधुनिक हथियार भारत के लिए प्रस्तावित हो सकते हैं.

यह प्रस्ताव इस समय इसलिए चर्चा में है क्योंकि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को न सिर्फ बनाए रखने, बल्कि उन्हें बढ़ाने की दिशा में भी देख रहा है, खासकर इस पृष्ठभूमि में कि भारत को दो तरफा रक्षा-चुनौतियाँ पश्चिमी और पूर्वोत्तर दोनों तरफ से महसूस होती हैं.

Su-57: भारत की अगली पीढ़ी का गेम-चेंजर

अगर भारत यह समझौता करता है और Su-57 अपने बेड़े में शामिल कर लेता है, तो यह किसी भी मौजूदा लड़ाकू विमानों से एक कदम आगे कदम होगा. इस विमान में निम्न विशेषताएं हैं, जिनकी बदौलत यह पटन (battlefield) पर पैमाना बदलने की क्षमता रखता है:

यह एक डबल-इंजन वाला, सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान है, जिसकी अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है.

इसके बैकबोन में एडवांस्ड रडार तकनीक है - Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और मल्टी-टारगेट मिशन भी आसानी से अंजाम दे सकता है. इसमें हवा से हवा में मारक मिसाइलें शामिल हैं, सबसे शक्तिशाली मानी जाने वाली मिसाइलों में से एक R-37M missile भी है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है.

Su-57 सिर्फ एयर-टू-एयर कॉम्बैट तक सीमित नहीं है, यह एयर-टू-ग्राउंड मिशन भी कर सकता है, जिससे इसकी भूमिका रणनीतिक ऑपरेशनों में भी बढ़ जाएगी.

यदि भारतीय वायु सेना इसे अपनाती है, तो उसका विमान बेड़ा पांचवीं पीढ़ी के विमान क्षमता काफी मजबूत हो जाएगा. यह भारत के “मेक इन इंडिया” प्रयास को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकता है, यदि रूस ने सह-उत्पादन (co-production) का विकल्प प्रस्तावित किया है.

S-400: भारत के सुदर्शन चक्र को मजबूत करेगा

S-400 वायु रक्षा प्रणाली जिसे अक्सर भारत का “सुदर्शन चक्र” कहा जाता है, उसकी सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है. इस सिस्टम की मारक क्षमता और रडार कवरेज दुश्मन के हवाई और मिसाइल खतरे से निपटने में भारत को एक मजबूत आधार देती है. रूस की ओर से अतिरिक्त S-400 के सौदे की संभावना, अगर इस दौरे के दौरान पक्का हुई, तो भारत की वायु रक्षा व्यवस्था और भी मजबूत होगी.

पुतिन का यह दौरा सामरिक संतुलन का संकेत

यूक्रेन युद्ध के बीच, पुतिन का भारत आना इस लिहाज़ से भी ध्यान खींचता है कि पश्चिमी दबाव और वैश्विक राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत-रूस रिश्ता बनाए रखने की दृढ़ता भारत दिखा रहा है. यह दौरा कूटनीतिक मजबूती और स्ट्रैटजिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है.

विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे और संभावित रक्षा सौदों के जरिए रूस भारत को यह भरोसा देना चाहता है कि वो मुश्किल समय में भी उसके साथ खड़ा है. वहीं भारत भी यह संदेश देना चाहता है कि वो अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है- चाहे वैश्विक भू-राजनीति कैसी भी हो.

दक्षिण एशिया क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित

अगर भारत-रूस के बीच Su-57 और S-400 को लेकर बड़े पैमाने पर समझौते होते हैं, तो यह रक्षा संरचना दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं. कुछ पश्चिमी देश विशेषकर अमेरिका इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए चिंतित रहेंगे.

क्योंकि भारत पहले ही रूस के साथ तेल और ऊर्जा संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लेकर पश्चिमी दबाव झेल चुका है. अब ऐसे समय में जब रक्षा क्षेत्र में भी एक मजबूत साझेदारी बन रही है, तो वैश्विक भू-राजनीति में भारत का रुख और भी अहम हो जाता है.

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