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भारत के दुश्मन होंगे तबाह! इंडिया ने बना लिया ब्रह्मोस से भी खतरनाक हथियार
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Sep 16, 2025, 16:23 pm IST
Keywords: DRDO STAR Liquid Fuel Ramjet Astra Mk-3 STAR Missile India
भविष्य के युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और तैयारी की गहराई से जीते जाएंगे. और इसी दिशा में भारत ने एक और क्रांतिकारी कदम बढ़ाया है, STAR (Supersonic Target) सिस्टम. यह कोई पारंपरिक मिसाइल नहीं है, न ही सिर्फ एक टारगेट ड्रोन; यह है भारत की सेनाओं को भविष्य की हर संभावित चुनौती के लिए तैयार करने वाला सुपरसोनिक युद्ध सिम्युलेटर, जो समुद्र की सतह से महज 12 फीट ऊपर उड़ते हुए असली दुश्मन की क्रूज मिसाइल जैसी चुनौती पेश करता है. यह सिस्टम हमला करने के लिए नहीं, बल्कि हमले की सटीक नकल करके सेना को लड़ाई के हर पहलू में दक्ष बनाने के लिए बनाया गया है. इसकी ताकत, रफ्तार और तकनीक मिलकर इसे ब्रह्मोस जैसी ऑपरेशनल मिसाइलों के समकक्ष बल्कि कई मायनों में उससे आगे खड़ा करती है. मैक 2 की रफ्तार, दुश्मन के हमलों की हूबहू नकल STAR की रफ्तार मैक 1.8 से 2.5 (612 से 850 मीटर/सेकंड) तक जाती है, जो इसे सुपरक्रूज़ कैटेगरी में लाती है. यह न केवल समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ सकता है, बल्कि 10 किलोमीटर की ऊंचाई से सीधी डाइव भी ले सकता है, ठीक वैसे ही जैसे दुश्मन की हाई-एंड क्रूज़ मिसाइलें करती हैं. इसकी रेंज 55 से 175 किमी और फ्लाइट टाइम 50 से 200 सेकंड तक हो सकता है. यह सब मिलकर STAR को बनाता है एक ऐसा "ट्रेनिंग एडवांस्ड टारगेट सिस्टम", जो भारत की तीनों सेनाओं को किसी भी संभावित मिसाइल हमले का सटीक जवाब देना सिखा सकता है. STAR की ताकत, भारत की अगली छलांग एयर और ग्राउंड वर्जन, सभी सेनाओं के लिए उपयोगी DRDO ने STAR को दो वेरिएंट में विकसित किया है: एयर लॉन्च्ड STAR- जिसे तेजस जैसे फाइटर जेट ले जा सकते हैं ग्राउंड लॉन्च्ड STAR- जिसे मोबाइल ट्रक से कहीं भी तैनात किया जा सकता है इस बहुउपयोगिता के चलते यह सिस्टम थलसेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बन जाता है. आत्मनिर्भर भारत की उड़ान जहां पहले भारत को टारगेट अभ्यास के लिए विदेशों से सिस्टम आयात करने पड़ते थे, अब STAR की मदद से यह निर्भरता समाप्त हो गई है. यह प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी, कम लागत वाली और रीयूजेबल है. DRDO के पूर्व प्रमुख डॉ. जी. सतीश रेड्डी के अनुसार, STAR दर्शाता है कि भारत ने अब मिसाइल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता का स्तर हासिल कर लिया है. फेज-III में STAR, जल्द होगा ऑपरेशनल STAR अपने फाइनल डेवलपमेंट फेज (फेज-III) में पहुंच चुका है. इसके सभी मुख्य हार्डवेयर, मोटर केसिंग, नोजल, सब-सिस्टम तैयार हो चुके हैं. कई टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और अब यह कॉम्बैट-स्टाइल परीक्षणों से गुजर रहा है. यानी अब यह प्रणाली केवल एक कदम दूर है ऑपरेशनल स्टेटस से. भारत सिर्फ तैयार नहीं, एक कदम आगे है STAR केवल अभ्यास का उपकरण नहीं है, यह दुश्मनों के लिए एक सटीक चेतावनी है, भारत अब युद्ध के हर संभावित परिदृश्य के लिए तैयार है, और उसमें भी एक कदम आगे सोच रहा है. जब STAR जैसी प्रणाली सेनाओं के हाथ में होती है, तो सिर्फ रक्षा ही नहीं, रणनीतिक दबदबा भी सुनिश्चित होता है. भविष्य में एक संभावित टैक्टिकल हथियार? विशेषज्ञों की मानें तो STAR को भविष्य में एक एडवांस्ड टैक्टिकल सिस्टम में भी बदला जा सकता है, जो दुश्मन के राडार, निगरानी विमान या हाइ-वैल्यू टारगेट्स को निष्क्रिय करने की क्षमता रखेगा. यानी भारत का यह 'टारगेट सिस्टम' भविष्य में टारगेट करने वाला हथियार भी बन सकता है. |
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