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वायुसेना को मिलेंगे 114 राफेल फाइटर जेट, डील के करीब पहुंचे भारत-फ्रांस
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jan 10, 2026, 11:17 am IST
Keywords: Rafale Fighter Jets नई दिल्ली भारत फ्रांस Fighter Jets
नई दिल्ली में रक्षा हलकों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. भारत और फ्रांस के बीच लड़ाकू विमानों को लेकर एक अहम रक्षा समझौता अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है. भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रनों की लगातार घटती संख्या को देखते हुए सरकार आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है. इसी कड़ी में राफेल फाइटर जेट की एक बड़ी खेप वायुसेना में शामिल हो सकती है. जानकार सूत्रों के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले इस डील को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति और मजबूत हो सकती है. यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद परियोजनाओं में से एक होगी. 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही है. पुराने विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट और नई स्क्वाड्रनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए वायुसेना ने सरकार को कम से कम 114 आधुनिक फाइटर जेट खरीदने का प्रस्ताव दिया है. सूत्र बताते हैं कि यह खरीद सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत की जा सकती है, जिससे प्रक्रिया तेज होगी और तकनीकी व रणनीतिक पहलुओं पर बेहतर नियंत्रण रहेगा. हालांकि अंतिम संख्या को लेकर बातचीत अभी जारी है, लेकिन 114 विमानों का आंकड़ा प्राथमिक जरूरत के रूप में सामने आ रहा है. भारत में ही होंगे राफेल का निर्माण इस प्रस्तावित डील की सबसे अहम बात यह है कि नए राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा. इससे न सिर्फ वायुसेना को आधुनिक तकनीक से लैस विमान मिलेंगे, बल्कि देश के रक्षा औद्योगिक ढांचे को भी जबरदस्त मजबूती मिलेगी. “मेक इन इंडिया” पहल के तहत यह सौदा भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से भारत को उन्नत निर्माण तकनीक, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत जगह मिलेगी. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अहम चरण राफेल विमानों की इस बड़ी खरीद को अंतिम रूप देने से पहले कई औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. सूत्रों के अनुसार:
अरबों यूरो की हो सकती है यह डील बताया जा रहा है कि यह रक्षा सौदा करीब 10 अरब यूरो या उससे अधिक का हो सकता है. इसकी एक वजह यह भी है कि भारत पहले ही नौसेना के लिए राफेल के 24 विमानों का अनुबंध कर चुका है, जिससे कीमतों का एक ढांचा पहले से तय माना जा रहा है. वायुसेना के लिए होने वाली यह डील उस अनुबंध से कहीं बड़ी होगी और इसका आर्थिक व रणनीतिक प्रभाव भी व्यापक होगा. TASL और डसॉल्ट की साझेदारी से फायदा भारत में राफेल निर्माण की दिशा में पहले ही एक बड़ा कदम उठाया जा चुका है. पिछले साल जून में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था. इसके तहत भारत में राफेल विमानों के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य ढांचा) का निर्माण किया जाएगा. TASL हैदराबाद में एक अत्याधुनिक निर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है. इस सुविधा में:
2028 से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में बन रही इस फैक्ट्री से वित्तीय वर्ष 2028 तक पहले फ्यूजलेज का उत्पादन शुरू हो सकता है. इस यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 24 फ्यूजलेज होगी. इसके अलावा,
जैसी परियोजनाओं के चलते राफेल कार्यक्रम का करीब 60% मूल्य भारत में ही उत्पन्न होने की संभावना है. राफेल लड़ाकू विमानों की यह संभावित डील केवल सैन्य जरूरतों तक सीमित नहीं है. यह भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकती है और भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित हो सकती है. |
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