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जापान की नेवी ने तैयार की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन, कांप जाएगा चीन
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Sep 12, 2025, 10:27 am IST
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जापान ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पहली बार अपनी नौसेना के जहाज से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन का सफल परीक्षण किया है. इस हाई-स्पीड हथियार ने समुद्र में तैनात एक असली लक्ष्य जहाज को भेदकर आधुनिक युद्ध प्रणालियों में एक बड़ा मोड़ दर्शाया है. यह परीक्षण जापानी युद्धपोत JS Asuka से जून-जुलाई के बीच किया गया और अब इसकी आधिकारिक पुष्टि जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने की है. रेलगन पारंपरिक तोपों से बिल्कुल अलग तकनीक पर आधारित है. इसमें विस्फोटक का उपयोग नहीं होता, बल्कि विद्युत चुंबकीय शक्ति के ज़रिए प्रोजेक्टाइल को दागा जाता है. यह प्रक्षेप्य इतनी तीव्र गति से चलता है कि वह ध्वनि की रफ्तार से कई गुना तेज़ होता है. जापान द्वारा परीक्षण की गई रेलगन करीब Mach 6.5 (लगभग 8,000 किमी/घंटा) की रफ्तार से हमला करने में सक्षम है. ATLA द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस हथियार से 120 बार लगातार फायरिंग की गई और इसके बैरल की गति या सटीकता में कोई गिरावट नहीं देखी गई — जो कि इसकी तकनीकी परिपक्वता का संकेत है. वैश्विक पटल पर स्थिति हालांकि रेलगन तकनीक पर काम केवल जापान तक सीमित नहीं है. चीन ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और उसके सतत परीक्षणों की खबरें आती रही हैं, लेकिन अब तक वह इसे सेवा में नहीं ला पाया है. अमेरिका ने भी एक समय इस तकनीक पर भारी निवेश किया था, लेकिन 2021 में उसने इसे तकनीकी और लागत संबंधी कारणों से बंद कर दिया था. इन सबके बीच, जापान पहली बार इसे वास्तविक नौसैनिक प्लेटफॉर्म से परीक्षण कर आगे निकल गया है. क्यों खास है रेलगन? रक्षा विशेषज्ञ मसाशी मुरानो के अनुसार, आज के दौर में एंटी-शिप मिसाइलें इतनी तेज़ और घातक हो गई हैं कि उन्हें पारंपरिक मिसाइल से इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन होता जा रहा है. रेलगन इस चुनौती का एक प्रभावशाली समाधान हो सकता है. इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका एक शॉट, परंपरागत मिसाइल सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक सस्ता है. जहां एयर डिफेंस मिसाइलों की कीमत करोड़ों में होती है, वहीं रेलगन से दागे गए प्रोजेक्टाइल की लागत बेहद कम है जो कि रक्षा बजट के लिहाज से काफी अहम है. भविष्य की योजना जापान की योजना है कि इस तकनीक को सिर्फ नौसेना तक सीमित न रखते हुए इसे थल आधारित प्लेटफॉर्म्स पर भी तैनात किया जाए. इससे सीमा पर तैनात दुश्मन की आर्टिलरी और मिसाइल सिस्टम्स को निशाना बनाया जा सकेगा. इसके साथ ही, रेलगन से एयरबर्स्ट म्युनिशन जैसे हथियार भी तैयार किए जा रहे हैं, जो हवा में फटकर ड्रोन और मिसाइल जैसे खतरों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकते हैं. हालांकि अभी तक इसकी अधिकतम रेंज, ऑटोमैटिक फायरिंग क्षमता और सटीकता संबंधी सभी तकनीकी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन इतना तय है कि जापान इस तकनीक को अगली पीढ़ी के युद्ध के लिए एक मजबूत हथियार के रूप में विकसित करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. |
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