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देश में महंगी होगी बिजली? जारी हुआ नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी का ड्राफ्ट

जनता जनार्दन संवाददाता , Jan 23, 2026, 12:01 pm IST
Keywords: Electricity   लेक्ट्रिसिटी पॉलिसी   ड्राफ्ट   बिजली क्षेत्र  
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देश में महंगी होगी बिजली? जारी हुआ नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी का ड्राफ्ट

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के बिजली क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (एनईपी) 2026 का मसौदा सार्वजनिक किया है. इसका मुख्य लक्ष्य भारत को एक सशक्त, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल बिजली नेटवर्क प्रदान करना है. सरकार ने मसौदे पर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं.

मसौदे में कोयले पर आधारित थर्मल पावर के विकल्प के रूप में न्यूक्लियर एनर्जी को प्रमुखता दी गई है. यह कदम SHANTI एक्ट 2025 के बाद आया है, जिसके तहत न्यूक्लियर सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोला गया है.

क्या आम नागरिक के लिए बिजली महंगी होगी?

जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस नई नीति के लागू होने के बाद बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी होगी या नहीं. मसौदे में इस पर सीधे जवाब नहीं दिया गया है, लेकिन नीति के मुख्य बिंदुओं का विश्लेषण करने से भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है.

  • मसौदे में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने पर जोर दिया गया है.
  • न्यूक्लियर और स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस का मतलब है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है.
  • टैरिफ (बिजली दर) को एक इंडेक्स से जोड़ने की बात कही गई है, जिससे हर साल ऑटोमैटिक रिवीजन संभव होगा.

फिक्स्ड लागत की भरपाई के लिए डिमांड चार्ज लागू करने का सुझाव है, जो अलग-अलग उपभोक्ताओं के बीच सब्सिडी के बोझ को संतुलित करेगा.

इन बदलावों से यह संभावना है कि भविष्य में बिजली की दरें स्थिर रहने के बजाय सालाना आधार पर संशोधित हो सकती हैं.

मसौदे के प्रमुख प्रस्ताव

2030 और 2047 के लक्ष्य:

  • 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट तक बढ़ाना.
  • 2047 तक इसे 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य.

राष्ट्रीय और राज्य स्तर की योजना:

  • राज्य स्तर पर डिस्कॉम और एसएलडीसी द्वारा Resource Adequacy (RA) Plan तैयार किया जाएगा.
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) देश के लिए राष्ट्रीय स्तर की योजना बनाएगा.

टैरिफ रिवीजन मैकेनिज्म:

  • बिजली दरों को इंडेक्स से जोड़ा जाएगा, ताकि राज्य विद्युत आयोग द्वारा समय पर टैरिफ संशोधन न होने पर ऑटोमैटिक रिविजन संभव हो.
  • इसका उद्देश्य पावर कंपनियों के लिए रेवेन्यू गैप रोकना और वित्तीय स्वास्थ्य सुधारना है.

क्रॉस-सब्सिडी और छूट:

  • मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, रेलवे और मेट्रो रेल सिस्टम को अतिरिक्त शुल्क और क्रॉस-सब्सिडी से छूट दी जाएगी.
  • इससे भारतीय उत्पादक अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी.

स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर:

  • रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के लिए मार्केट-बेस्ड मेकॅनिज्म और कैप्टिव पावर प्लांट की सुविधा दी जाएगी.
  • ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एनर्जी स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा.
  • 2030 तक रिन्यूएबल और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा.

न्यूक्लियर एनर्जी का विकास:

  • SHANTI एक्ट के तहत निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • एडवांस न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, मॉड्यूलर रिएक्टर और छोटे परमाणु रिएक्टर को अपनाने की सिफारिश.
  • 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य.

कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय लक्ष्य:

  • 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करना.
  • 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य.

विवाद निपटान और फाइनेंशियल स्ट्रक्चर:

  • विवाद निपटान प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा ताकि बिजली उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो.
  • इंडेक्स-लिंक्ड ऑटोमैटिक टैरिफ रिवीजन से पावर सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ सुधारने की योजना.

मसौदा नीति स्पष्ट करती है कि भारत बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर विकल्पों पर जोर देगा. हालांकि, लागत बढ़ने की संभावना से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आम नागरिक के लिए बिजली महंगी हो सकती है. साथ ही, इंडेक्स-लिंक्ड टैरिफ रिवीजन और डिमांड चार्ज से उपभोक्ताओं को समय-समय पर संशोधित दरों का सामना करना पड़ सकता है.

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