2020 में OTT प्लेटफॉर्म बने सहारा, 78% ने बतायी अलग कानून की जरूरत

जनता जनार्दन संवाददाता , Feb 15, 2021, 11:31 am IST
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2020 में OTT प्लेटफॉर्म बने सहारा, 78% ने बतायी अलग कानून की जरूरत

दिल्ली: कोरोना काल में खासकर लॉक डाउन के दौरान लोगों में घरों में रहने के दौरान मनोरंजन के साधन के तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल OTT (ओवर द टॉप) वीडियो प्लेटफॉर्म का किया. जैसे जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म यूजर्स बढ़ते गए कई फिल्म और सीरीज निर्माताओं ने अपेन कंटेंट को ओटीटी पर ही रिलीज़ करने का फैसला किया. इंटरनेशनल ओटीटी प्लेयर्स जैसे नेटफ्लिक्स या फिर एमेजन प्राइम की बात करें तो दोनों ने करीब 30 ओरिजनल फिल्में या सीरीज़ लॉकडाउन के दौरान रिलीज़ कीं.

वहीं भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स जैसे हॉट स्टार, जी5, सोनी लिव, एमएक्स प्लेयर्स ने भी कई फिल्में और सीरीज़ रिलीज़ कर लोगों की उंगलियों तक मर्जी के मनोरंजन की पहुंच बना दी. यह सब कुछ इसलिए संभव हो पाया क्योंकि लॉक डाउन में सिनेमालहॉल खोलने की इजाजत नहीं थी. नवंबर के महीने में 50% क्षमता के साथ थियेटर्स को खोलने की इजाजत दी गई थी.

देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते क्रेज और इससे जुड़ते विवादों के बीच लोकल सर्किल नाम की संस्था ने इसे लेकर एक सर्व किया. इस सर्व में लोगों से ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़ी अच्छाइयां और बुराइयां पूछी गयीं. अच्छाइयों में लोगों ने मुख्यतौर पर बताया कि कंटेंट चुनने की आजादी अपने हाथ में आ गयी. जबकि ओटीटी से पहले दर्शक को क्या देखना है और कब देखना है यह पहले से ही तय होता था.

वहीं इसके दूसरे पहलू की बात करें तो सर्वे में शामिल लोगों की चिंता का विषय कंटेंट की उम्र सीमा को लेकर और कई बार इसकी ऐसी विषय वस्तु को लेकर जिससे कभी कभी लोगों कि भावनाएं आहत हो जाती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर जल्द ही दिशा निर्देश जारी करने वला है. इन सब चर्चाओं के बीच लोकल सर्किल ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों की नब्ज टटोली है कि उन्होंने साल 2020 में किस तरह इन वीडियो प्लेफॉर्म का इस्तेमाल किया. लोकल सर्किल के इस सर्वे में देश के करीब 311 जिलों के 50 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया.

2020 में मनोरंजन के लिए किस माध्यम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल?
सर्वे में शामिल 41% लोगों ने कहा कि साल 2020 में उनके मनोरंजन का मुख्य सोर्स ओटीटी प्लेटफॉर्म ही थे. वहीं 46% ने कहा कि टेलिविजन चैनल, डीटीएच, केबल का उन्होंने इस्तेमाल किया. 8% ने कहा कि सोशल मीडिया जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर उन्होंने ज्यादा समय दिया. तीन प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने इंटरनेस से वीडियो डाउनलोड करके देखे. दो प्रतिशत ने अन्य विकल्पों की बात कही. हैरानी की बात है कि एक भी यूजर ने डीवीडी या फिर वीसीडी का नाम नहीं लिया.

76% ने कहा कि उन्होंने दो और ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया
सर्व में शामिल 76% लोगों ने बताया कि उन्होंने साल 2020 के दौरान दो या इससे ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया. 30% लोगों ने बताया कि उन्होंने चार OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया, 20% ने कहा कि तीन, 26 प्रतिशत ने कहा कि दो और 18% ने कहा कि उन्होंने सिर्फ एक OTT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया. इसके साथ ही लोगों ने बताया कि कुछ प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन उन्होंने ट्रायल के लिए लिया, या फिर सिर्फ किसी एक विशेष फिल्म या सीरीज़ को देखने के लिए लिया.

मनोरंजन के लिए OTT प्लेटफॉर्म को चुनने की वजह क्या रही?
सर्वे में सामने आया कि OTT प्लेटफॉर्म को चुनने की मुख्य वजह चुनने की आजादी और सुविधा है. लोगों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा फिल्में देखीं. यही वजह है कि अब कई बड़े फिल्म प्रोड्यूसर भी अपनी फिल्मों रिलीज़ करने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को चुनने से हिचक नहीं रहे हैं. 50% लोगों ने कहा कि उन्होंने वजह चुनने की आजादी और सुविधा के चलते ओटीटी प्लेफॉर्म को तरजीह दी. वहीं 31 प्रतिशत ने हाई क्ववालिटी कंटेंट को पहली वजह बताया. 10% ने कहा कि यह दूसरे चैनलों के मुकाबले सस्ता पड़ रहा था. नौ प्रतिशत इसके लिए कोई ठोस कारण नहीं बता पाए.

कंटेंट पर उम्र की चेतवानी के गंभीर दिखे यूजर्स
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को लेकर उम्र सीमा को लेकर लोगों में गंभीरता दिखी. 42% लोगों ने कहा कि कंटेंट पर उम्र सीमा लिखी हो. 45% ने कहा कि यह लिखी होती है लेकिन और अधिक स्पष्ट तरीके लिखे जाने की जरूरत है. 13% ने कहा कि वो इस बारे में कुछ कह नहीं सकते.

क्या ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए कोई कानून होना चाहिए?
इस सवाल के जवाब में भी सर्वे में शामिल ज्यादातर लोग सहमत दिखे. सर्वे में शामिल 78% लोगों ने कहा कि ऑनलाइन कंटेंट के लिए अलग से कानून होना चाहिए. जबकि सिर्फ 14% ने कहा कि नहीं अलग से कानून की जरूरत नहीं है. 8% लोग इस सवाल पर कोई राय नहीं बना सकते. बता दें कि अभी ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए अलग से कोई कानून नहीं है. हाल ही में यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठा था. सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेट फॉर्म को अपने अधिकार क्षेत्र में लिया था. वहीं पिछले साल सितंबर महीने में 17 अलग अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सेल्फ रेग्युलेशन को अपनाया था.

क्या ओटीटी से जुड़े कलाकारों को मिलने वाली धमकियां चिता का विषय
इस सवाल के जवाब में 55% लोगों ने हां कहा, उनका मनना है कि कलाकारों, प्रोडसर्स और डायरेक्टर्स को धमकिंयां मिलना चिंता की बात है. वहीं 15 प्रतिशत ने कहा कि यह किसी हद तक उन्हें प्रभावित करता है. 12 प्रतिशत ने कहा कि इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता. तीन प्रतिशत ने इस पर जवाब देने से इनकार कर दिया.

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