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शुभ योग में महाशिवरात्रि का पर्व, जानें स्नान का समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Feb 15, 2026, 12:11 pm IST
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आज फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट हुए थे और सृष्टि के कल्याण का कार्य किया था. मान्यता यह भी है कि इसी रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. सुबह से ही देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. भक्त व्रत रखकर, रुद्राभिषेक कर और रात्रि जागरण के माध्यम से भगवान शिव की आराधना में लगे हैं. इस वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है. महाशिवरात्रि का महत्व धार्मिक ग्रंथों में महाशिवरात्रि को अत्यंत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. अविवाहित युवतियां उत्तम वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए उपवास करती हैं. इस दिन “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल और गंगाजल अर्पित करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. ज्योतिष मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होने की संभावना बढ़ती है. महाशिवरात्रि 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा रात्रि में की जाती है. इस वर्ष निशीथ काल पूजा का समय रात 12:09 बजे से 01:01 बजे तक रहेगा. यह 51 मिनट की अवधि साधना और विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. जो भक्त चार प्रहर की पूजा करना चाहते हैं, वे शाम 06:11 बजे से अगले दिन सुबह 06:59 बजे तक पूजन कर सकते हैं. मान्यता है कि सही समय पर की गई पूजा से जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है. घर पर सरल पूजा विधि महाशिवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. घर या मंदिर में शिवलिंग स्थापित कर पूजा आरंभ करें. सबसे पहले भगवान शिव को गंगाजल और शुद्ध जल से स्नान कराएं. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें. अभिषेक के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का श्रद्धा के साथ जाप करते रहें. इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र (जो कटा-फटा न हो), सफेद फूल, चंदन, अक्षत और धतूरा अर्पित करें. अंत में धूप और दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन और शिव मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. व्रत के नियम और पारण का समय महाशिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम के साथ रखा जाता है. इस दिन सात्विक आहार या फलाहार ग्रहण करना श्रेष्ठ माना गया है. अन्न और नमक का त्याग करना उत्तम माना जाता है. व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे के बीच किया जा सकता है. पारण से पहले किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा देना शुभ माना गया है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव लेकर आता है. |
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