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भारत-अमेरिका रिश्तों में नया अध्याय, ट्रेड डील के बाद बेसेंट और रूबियो से मिले जयशंकर
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Feb 04, 2026, 12:55 pm IST
Keywords: India-US Relations भारत और अमेरिका जयशंकर US Treasury Secretary Scott US economic partnership
भारत और अमेरिका के संबंध एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर नजर आ रहे हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 फरवरी को अपनी हाई-प्रोफाइल अमेरिकी यात्रा की शुरुआत की, जिसने पहले ही दिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए. दौरे के पहले दिन ही जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अहम बैठकें कर यह साफ कर दिया कि भारत-अमेरिका संबंध अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ट्रंप-मोदी ट्रेड डील के बाद कूटनीतिक हलचल जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद एक बड़े ट्रेड डील की घोषणा की गई थी. इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया. इसी पृष्ठभूमि में जयशंकर की बैठकें बेहद अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि अब इस राजनीतिक फैसले को नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है. स्कॉट बेसेंट के साथ आर्थिक साझेदारी पर मंथन अपने दौरे की शुरुआत में जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की. अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक भारत-अमेरिका के नए आर्थिक समझौते को अमल में लाने के लिए एक अहम कड़ी मानी जा रही है. बातचीत में व्यापार को आसान बनाने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और नियमों के बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने को लेकर उपयोगी संवाद हुआ. माना जा रहा है कि ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ यह संपर्क, हाल ही में घोषित ट्रेड डील के तकनीकी और नीतिगत पहलुओं को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाएगा. मार्को रुबियो से रणनीतिक रिश्तों पर गहन चर्चा दिन के दूसरे हिस्से में विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. इस बातचीत में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लगभग सभी प्रमुख स्तंभों को छुआ गया. जयशंकर ने बताया कि चर्चा में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे अहम क्षेत्रों पर फोकस रहा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थागत बैठकों को जल्द आयोजित करने पर सहमति जताई है, ताकि सहयोग को और ठोस रूप दिया जा सके. मार्को रुबियो ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि बैठक के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और उनसे जुड़े नए आर्थिक अवसरों पर खास जोर दिया गया. उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट का स्वागत करते हुए इसे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए एक बड़ा कदम बताया. क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर अमेरिका पहले से ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सप्लाई चेन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें भारत को अहम भागीदार माना जा रहा है. खनिज आपूर्ति को लेकर अमेरिका की पहल इसी दिशा में अमेरिका वॉशिंगटन डीसी में पहली बार क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल की मेजबानी करने जा रहा है. इस बैठक में 50 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में जरूरी खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित और विविध बनाना है, ताकि रक्षा, तकनीक और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निर्भरता को संतुलित किया जा सके. क्वाड और इंडो-पैसिफिक पर साझा नजरिया अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया कि जयशंकर और रुबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए ट्रेड डील का स्वागत किया. साथ ही, दोनों नेताओं ने क्वाड के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. बातचीत में यह भी माना गया कि एक मजबूत, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र भारत और अमेरिका दोनों के साझा हितों के लिए बेहद जरूरी है. औपचारिक सहयोग को लेकर बढ़ी सहमति अमेरिकी विदेश विभाग के डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रोसेसिंग को लेकर भारत-अमेरिका सहयोग को औपचारिक रूप देने पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक मूल्य साझा करने वाले देश मिलकर काम करें, ताकि नए आर्थिक अवसर खुलें और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े साझा लक्ष्य पूरे किए जा सकें. |
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