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राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले कामेश्वर चौपाल बने ट्रस्टी

जनता जनार्दन संवाददाता , Feb 06, 2020, 11:16 am IST
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 राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले कामेश्वर चौपाल बने ट्रस्टी

दिल्ली: राम मंदिर आंदोलन में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया. बहुत से लोग कारसेवा करते हुए मारे गए और बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने ना केवल कारसेवा की बल्कि कारसेवा के बाद पहले दिन से लेकर आज तक उसमें लगे हुए हैं. उन्ही में से एक कामेश्वर चौपाल भी हैं जो पिछले 40 सालों से राम मंदिर के लिए आंदोलनरत हैं. कामेश्वर चौपाल वही दलित व्यक्ति हैं जिन्हे 36 साल की उम्र में 9 नवंबर 1989 को राम मंदिर का शिलान्यास करने का अवसर दिया गया था. यह मौका उन्हें साधु संतों और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेता अशोक सिंघल ने प्रदान किया था.

चौपाल के मुताबिक अशोक सिंघल चाहते थे कि अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति से मंदिर का शिलान्यास कराया जाए जिससे सामाजिक समरसता को और मजबूत किया जा सके और यह बताया जा सके कि इस मंदिर निर्माण में हर वर्ग का बराबर का योगदान है. दरअसल, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में राम मंदिर ट्रस्ट की घोषणा की. उन्होंने बताया कि अयोध्या में बनने वाले भव्य श्री राम मंदिर की जो संस्था होगी उसमें 15 सदस्य होंगे और ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र होगा.

कई साधु-संत, अयोध्या के राजा विमलेंद्र, निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख समेत केंद्र सरकार और राज्य सरकार के एक-एक नुमाइंदे को उस ट्रस्ट में जगह दी गई है. लेकिन जो एक नाम है कामेश्वर चौपाल वह सबसे अलग नाम है. खुद गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर जानकारी दी थी कि एक दलित व्यक्ति भी इस ट्रस्ट में आजीवन रहेगा और पहले दलित के रूप में कामेश्वर चौपाल को शामिल किया गया है. कामेश्वर चौपाल ने अशोक सिंघल की अगुवाई में एक छोटे से कार्यकर्ता के रूप में अयोध्या के आंदोलन में हिस्सा लिया था.

कामेश्वर चौपाल ने बताया कि 9 नवंबर 1989 को विहिप नेता अशोक सिंघल ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा कामेश्वर के हाथों से ही शिलान्यास कराया जाएगा. यह सुनकर मैं दंग रह गया, लेकिन उन्होंने मुझे मंदिर का शिलान्यास करने का मौका दिया. कामेश्वर ने कहा कि मेरे लिए इससे बड़ा गौरव और कोई हो नहीं सकता. दुनियाभर में करोड़ों दलितों में, मैं अकेला सौभाग्यशाली था जिसे राम मंदिर के शिलान्यास करने का मौका मिला था. आज जब ट्रस्ट बनी तो उसमें  भी सरकार ने मुझे अहम जिम्मेदारी सौंपी. मेरे लिए सौभाग्य का विषय है कि मैंने उस मंदिर की शुरुआत की और अपने जीते जी मंदिर का निर्माण देखूंगा. उस निर्माण संस्था में भी काम करने का मौका मिल रहा है.

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