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कबीर सिंह फिल्म Review: शाहिद और कियारा की कैमेस्ट्री जबरदस्त

जनता जनार्दन संवाददाता , Jun 24, 2019, 19:26 pm IST
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कबीर सिंह फिल्म Review: शाहिद और कियारा की कैमेस्ट्री जबरदस्त

शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' आज बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है. ये फिल्म साउथ इंडियन फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' का ऑफिशियल रीमेक है. फिल्म का निर्देशक संदीप रेड्डी ने किया है, संदीप ने ही 'अर्जुन रेड्डी' का भी निर्देशन किया था. फिल्म एक लव स्टोरी है जिसमें एक के बाद के कई ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं. बॉलीवुड में लंबे अर्से बाद ऐसी रेबल लव स्टोरी आई है. जिसमें पैशन, एंगर, ट्रस्ट और अनकंडिशनल लव दोनों है.

फिल्म में शाहिद कपूर मेन लीड में हैं और उनके लव इंटरेस्ट का रोल कियारा आडवाणी प्ले कर रही हैं. फिल्म में शाहिद एक ऐसे गुस्सैल व्यक्ति के रोल में है जो अपने गुस्से के कारण ही अपनी जिंदगी में कई मुश्किलों को बुला लेता है. वहीं कियारा बॉलीवुड की टाइपकास्ट हिरोइन की तरह भोली-भाली लड़की के किरदार में हैं.

फिल्म में वैसे तो आपको लाइफ का हर फ्लेवर मिलेगा, लेकिन कुछ चीजें असल जिंदगी से काफी परे हैं. फिल्म का एक डायलॉग है कि 'लोकतंत्र में इतना रेबल नहीं हो सकते' जो इस बात को  साफ करता है. वहीं, फिल्म का रनिंग टाइम भी जरूरत से थोड़ा ज्यादा है. इसके अलावा फिल्म में म्यूजिक काफी लाजवाब है जो फिल्म की कहानी को और भी जिंदा कर देता है. ये कहना गलत नहीं होगा कि शाहिद ने इस फिल्म में अब तक का अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है.

क्या है कहानी?

ये कहानी एक मेडिकल स्टूडेंट कबीर सिंह (शाहिद कपूर) की है. जो पढ़ाई से लेकर स्पोर्ट्स और बाकी सभी एक्टिविटीज में नंबर वन है. लेकिन उसकी कमजोरी है उसका गुस्सा. कबीर सिंह अपने इस गुस्से के चलते कई बार कॉलेज से निकाला भी जा चुका है लेकिन वो अपने इस गुस्से पर काबू पाने में हर नाकामयाब ही दिखता है. फिर एक दिन गुस्से की आग में जल रहे कबीर सिंह की जिंदगी में सुबह की ठंडी ओस बनकर आती है प्रीति सिक्का (कियारा आडवाणी). जितना कबीर गुस्सैल और वायलेंट है उतनी ही प्रीति शांत है. कबीर पहली नजर में ही प्रीति को अपना दिल दे बैठता है. कबीर के इस प्यार को देखकर धीरे-धीरे प्रीति भी उसके प्यार में पड़ जाती है.

दोनों साथ में काफी अच्छा वक्त बिताते हैं लेकिन फिर आता है कहानी में ट्विस्ट. प्रीति के परिवार को कबीर सिंह बिल्कुल पसंद नहीं होता और वो उससे शादी करवाने से इंकार कर देते हैं. प्रीति के लाख मनाने के बाद भी कबीर अपना गुस्सा नहीं छोड़ता और आखिर में दोनों को अलग होना पड़ता है.

कबीर सिंह के गुस्से की आग में उसका और प्रीति का रिश्ता जलकर खाक हो जाता है. इसके बाद शुरू होता है कबीर सिंह की जिंदगी का वो दौर जिसमें वो जीने की उम्मीद छोड़ नशे के आघोष में चला जाता है. हालांकि इस सब के बावजूद कबीर सिंह अपनी प्रैक्टिस नहीं छोड़ता और एक नामी सर्जन बनता है.

वो अक्सर नशे में धुत ही लोगों की सर्जरी करता है लेकिन उसका रिकॉर्ड है कि उसकी कोई सर्जरी आज तक फेल नहीं हुई...और फिर एक दिन सर्जरी करते हुए कबीर ने इतनी शराब पी होती है कि वो बेहोश जाता है. इसके बाद जो होता है उससे कबीर सिंह की जिंदगी एक बार फिर मुश्किलों में पड़ जाती है साथ ही उसकी शराब की लत भी उसे मौत के करीब लेकर जा रही है. अब इसके बाद कबीर सिंह मौत को गले लगाते हैं या प्रीति के बिना जीना सीख लेते हैं ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.


'कबीर सिंह' का निर्देशन 'अर्जुन रेड्डी' के ही निर्देशक संदीप रेड्डी ने किया है. जिसके कारण आपको में फिल्म में वही पागलपन नजर आता है जो 'अर्जुन रेड्डी' में नजर आया था. फिल्म ऑफिशियल रीमेक है तो कहानी में आपको ज्यादा फर्क नजर नहीं आएगा. फिल्म के निर्देशन और सिनेमेटोग्राफी दोनों शानदार है. छोटे मूमेंट्स को सिनेमेटोग्राफर संतन कृष्णन रिवचंद्रन ने कैमरे के कमाल से दिलचस्प बना दिया है.

म्यूजिक है फिल्म की जान

फिल्म का संगीत हर्षवर्धन रामेश्वर ने दिया है. कबीर सिंह की एल्बम कुल 9 गाने रखे गए हैं, जिसमें दो गानों के एक्टेंडेड वर्जन रखे गए हैं. फिल्म का गाना 'बेखयाली' जो कि इस समय लोगों की जुबान पर है को मुख्य रूप से सिंगर सचेत टंडन ने गाया है. वहीं इसके एक्टेंडेड वर्जिन को अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है. इसके अलावा 'तुझे कितना चाहें' को भी अरिजीत ने ही गाया है. अमाल मलिक ने भी इसमें 'पहला प्यार' गाना गाया है.

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