अब नारद मुनी! प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी के बावजूद रुक नहीं रहे बेतुके बयान, कांग्रेस का कटाक्ष, इसी के लिए चुने गए थे?

अब नारद मुनी! प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी के बावजूद रुक नहीं रहे बेतुके बयान, कांग्रेस का कटाक्ष, इसी के लिए चुने गए थे? नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पार्टी सांसदों और विधायकों को सोच-समझकर बोलने की नसीहत के बावजूद भाजपा नेताओं द्वारा गलतबयानी रुक ही नहीं रही है. पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के बाद अब देश के पश्चिमी छोर गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी अपने बयान से चर्चा में आ गए हैं. विजय रूपाणी ने पौराणिक चरित्र देवर्ष‍ि नारद के बारे में कहा है कि वे गूगल की तरह सब कुछ जानते थे.

'देवर्ष‍ि नारद जयंती' मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही. यह कार्यक्रम आरएसएस के मीडिया से जुड़े संगठन विश्व संवाद केंद्र ने आयोजित किया था.

उन्होंने कहा कि नारद को उसी तरह से पूरी दुनिया के बारे में जानकारी थी, जैसा कि आजकल के इंटरनेट सर्च इंजन गूगल को है. रूपाणी ने कहा, 'यह आज भी प्रासंगिक है कि नारद एक सूचनाएं रखने वाले व्यक्ति थे. वह पूरी दुनिया की जानकारी रखते थे. मानवता की भलाई के लिए सूचनाएं इकट्ठा करना उनका धर्म था और आज भी इसी की जरूरत है.'

उन्होंने कहा, 'गूगल उसी तरह से सूचना का स्रोत है जैसे नारद थे. दुनिया में जो कुछ हो रहा हो, वे उसकी जानकारी रखते थे.' लोकतंत्र में मीडिया के महत्व पर अपने विचार रखते हुए रूपाणी ने इस बारे में पीएम मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि मीडिया सरकार के कामकाज पर टिप्पणी कर सकती है, लेकिन उसे 'निष्पक्ष और विश्वसनीय' होना चाहिए.  

गौरतलब है कि इसके पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लब देब अपने तमाम अजीबोगरीब बयानों के लिए काफी चर्चा में रहे हैं. देब को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए अभी कुछ ही महीने हुए और उन्होंने कई ऐसे बयान दिए हैं, जिनकी व्यापक आलोचना हुई है. हाल ही में वह सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे छात्रों को अजीबोगरीब सलाह देकर चर्चा में रहे. देब ने कहा कि सिर्फ सिविल इंजीनियर्स को ही सिविल सर्विस परीक्षा के लिए आवेदन करना चाहिए.

इससे पहले बिप्लब देब महाभारत काल में इंटरनेट और मिस वर्ल्ड में इंडियन ब्यूटी को लेकर भी विवादित बयान दे चुके हैं. उन्होंने नई साइंटिफिक थ्योरी देते हुए दावा किया था कि इंटरनेट महाभारत के दौर में भी था और तब इसका इस्तेमाल किया जाता था.

कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के हास्यास्पद बयानों पर कांग्रेस पार्टी ने चुटकी ली है. पार्टी ने कहा कि जनता ने आपको हास्यास्पद बयान देने के लिए नहीं चुना है.  कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि जनता ने आपको इस तरह के हास्यास्पद बयान देने के लिए नहीं चुना है.

आपको फालतू की बयानबाजी के बजाय राज्य के लोगों के लिए एजूकेशन, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करना चाहिए. रेणुका चौधरी ने कहा कि भाजपा के दो मुख्यमंत्री जिस तरह से ज्ञान बांट रहे हैं उससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी की आईडियोलॉजी क्या है. इस तरह के बयानों के लिए लोगों ने आपको वोट नहीं दिया था.

इससे पहले भी कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा था, “भाजपा की सरकारें बलात्कार और अनाचार के मामलों में सिर्फ कार्रवाई करने में नाकाम नहीं रही हैं, बल्कि ऐसे मामलों के जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दे रही हैं.”

उन्होंने कहा, “केवल कानून बनाने से बलात्कार नहीं रुकेंगे, बल्कि कार्रवाई करने से रुकेंगे.” कांग्रेस नेता ने सवाल किया, “क्या कारण है कि पिछले चार वर्षों में बच्चों के साथ बलात्कार की घटनाएं 300 फीसदी बढ़ गई हैं. क्या कारण है भाजपा शासित राज्यों में बलात्कार, अनाचार, महिलाओं से छेड़छाड़ और महिलाओं को अगवा करने की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है?”

आज देश की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. नया नारा है- “भाजपा से बेटी बचाओ.” उन्होंने कहा, “भाजपा शासित राज्यों में प्रशासन बलात्कारियों और अनाचारियों को संरक्षण दे रहा है. दूसरी तरफ, भाजपा मंत्री और नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जिनसे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. ऐसे नेताओं पर कार्रवाई करने की बजाय प्रधानमंत्री मौन हैं.”

गौरतलब है कि केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने  बरेली में संवाददाताओं से बातचीत में देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के बारे में कहा था, “ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं, पर इन्हें कभी रोका नहीं जा सकता है. सरकार सब जगह सक्रिय है, तत्पर है, कार्रवाई कर रही है. ये सबको दिखायी दे रहा है.” मंत्री ने कहा, “पर इतने बड़े देश में एक-दो घटनाएं अगर हो जाएं तो इसको बतंगड़ बनाने का काम किया जाए, यह उचित नहीं है.”

गंगवार ने कहा था, “सरकार प्रभावी कदम उठा रही है. जो भी आवश्यक होगा, किया जाएगा.” वहीं, मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश द्वारा आरएसएस को लेकर कथित तौर पर की गई टिप्प्णी का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा, “दुर्भाग्य की बात है कि आजकल कुछ न्यायाधीश न्याय देने की बजाय राजनीतिक बयानबाजी में शामिल हो रहे हैं. एनआईए अदालत के न्यायाधीश भाजपा से जुड़े संगठनों के पक्ष में बोल रहे हैं. जब न्यायाधीश न्याय देने की बजाय राजनीतिक बयानबाजी में लग जाएंगे तो फिर न्यायपालिका का क्या होगा?” उन्होंने कहा, “शायद यही वजह है कि उच्चतम न्यायालय के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है.”
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