सूखे के कारण प्रवासी पक्षियों ने तेलंगाना से मुंह मोड़ा

सूखे के कारण प्रवासी पक्षियों ने तेलंगाना से मुंह मोड़ा बीते दो साल से जारी जबरदस्त सूखे के कारण बहुत कम संख्या में प्रवासी पक्षियों ने तेलंगाना का रुख किया है. ऐसे में जबकि हैदराबाद की अधिकांश झीलें सूखने के कगार पर हैं, प्रवासी पक्षियो ने उन झीलों का रुख किया है, जहां अभी भी पानी मौजूद है.

पक्षियों की जानकारी रखने वालों का कहना है कि हैदराबाद की झीलों के आसपास बढ़ती जनसंख्या के कारण भी प्रवासी पक्षियों ने इस इलाके से मुंह मोड़ लिया है.

हैदराबाद स्थित विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के शिक्षा अधिकारी व शोधकर्ता आर. दीपक ने कहा, "यह असर आकलन पर आधारित है और हम यह कह सकते हैं कि सूखे के कारण यहां प्रवासी पक्षियों का आना कम हुआ है."

दीपक ने कहा कि प्रवासी पक्षियों के प्रवास की समयसीमा में भी कमी आई है.

हैदराबाद को पीने का पानी प्रदान करने वाले चार सुरक्षित जलाशय सूख चुके हैं. इनमें उस्मासागर झील भी शामिल है, जो हर साल बड़ी संख्या में पेलिकन और अन्य प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा जगह रहा है.

गांडीपेट नाम से मशहूर उस्मासागर झील और सेमरपेट झील सालों से प्रवासी पक्षियों का अस्थाई डेरा रहे हैं. यहां आने वाले पक्षियों की बड़ी संख्या उन पक्षियों की है, जो लद्दाख से श्रीलंका तक की उड़ान भरते हैं.

दीपक के मुताबिक हाल के दिनों में सूखे और सेमरपेट झील के करीब बढ़ते रिहायश के कारण प्रवासी पक्षियों के आगमन में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है.

रोचक बात यह है कि शहर के मध्य में स्थित हुसैनसागर झील एक समय फ्लामेंगो जैसे पक्षियों के लिए अस्थाई डेरा हुआ करता था लेकिन अब यह झील सूख चुका है. भारत से होकर गुजरने वाले पक्षी यहां रुकते थे।

पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी पक्षी आमतौर पर भोजन, सुरक्षा और पानी की गुणवत्ता के आधार पर प्रवास का स्थान चुनते हैं.

ऐसे में जबकि हैदराबाद की अधिकांश झीलें सूख चुकी हैं, इसके करीब स्थित मेडक जिले में स्थित अमीनपुर झील अब प्रवासी पक्षियों को आकर्षित कर रही है.

फ्लामेंगो, पेलिकन, पेंटेड स्ट्रोक्स,ग्रे हेरोन्स जैसे पक्षी जो कि कभी उस्मानसागर झील में रुका करते थे, अब अमीनपुर झील का रुख कर रहे हैं. अमीनपुर झील हर लिहाज से पक्षियों के प्रवास के लिए उपयुक्त है.

तेलंगाना स्टेट स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स ने इस झील को गोद लिया है और बीते साल इसने विभिन्न समुदायों की मदद से इस झील की सफाई भी की थी.

इसी तरह का एक समुदाय हैदराबाद बर्डिग पाल्स (एचबीपी) है. एचबीपी के 2000 सदस्य हैं और ये हर रविवार को बड़ी संख्या में अमीनपुर झील पहुंचते हैं.

प्रवासी पक्षियों के प्रवास का समय खत्म हो चुका है लेकिन अमीनपुर में अभी भी फ्लामेंगो पक्षियों को देखा जा सकता है.

इसके अलावा आंध्र प्रदेश की कोलेरू झील ने भी हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियो को आकर्षित किया है. यह झील भी अब सूख चुकी है.
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