अपराध, सेक्स और सनसनी के बाद 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' में सन्नाटा

जनता जनार्दन संवाददाता , Jul 10, 2011, 15:01 pm IST
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अपराध, सेक्स और सनसनी के बाद 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' में सन्नाटा लंदन: रविवार को अपने आख़िरी संस्करण 'थैंक यू एंड गुडबाय'  के साथ अलविदा होने वाले  ब्रिटेन के सर्वाधिक प्रसार संख्या वाले रविवारीय अखबार, 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' ने 1843 में अपने शुरुआती संस्करण के साथ ही अपराध, सेक्स और सनसनीखेज खबरों का एकसूत्रीय फार्मूला अपना लिया था।

समाचार पत्र 'गार्जियन' के अनुसार, अखबार का पहला संस्करण एक अक्टूबर, 1843 को प्रकाशित हुआ था। पहले संस्करण से ही इस अखबार ने तय कर लिया था कि इसका पाठक वर्ग कैसा होगा, और वे क्या पढ़ना चाहेंगे। तीन पेन्स कीमत का यह सबसे सस्ता अखबार था। इसके प्रकाशक जॉन ब्राउन बेल अच्छी तरह जानते थे कि अपराध, सनसनीखेज और सेक्स अखबार की प्रसार संख्या को बढ़ा सकते हैं।

यद्यपि इसकी स्थापना कुछ इन आदर्श शब्दों के साथ हुई थी : "हमारा उद्देश्य सच्चा है, हमारा हमारा आचरण सच की निर्भयता से वकालत करना है।" लेकिन जिस फार्मूले को इसमें अपनाया गया और जिसके कारण इसे अपार व्यवसायिक सफलता मिली, वह था सनसनीखेज पर जोर देते हुए हल्की-फुल्की, चटपटी खबरें प्रकाशित करना।

1880 तक अखबार की 30,000 प्रतियां प्रति सप्ताह बिकने लगी थीं। 40 वर्ष बाद इसकी प्रसार संख्या 30 लाख से अधिक हो गई। अखबार ने अपना यह सिद्धांत बनाया : "यहां पूरा मानवीय जीवन उपलब्ध है।"

1950 के दशक में अखबार अपनी सफलता के चरम पर था, और उस समय नियमित रूप से इसकी 80 लाख से अधिक प्रतियां बिकती रहीं।

इस अखबार को बंद करने का निर्णय अधिक चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि अभी भी प्रति सप्ताह 74 लाख पाठक संख्या वाला यह अखबार अंग्रेजी भाषी दुनिया में सर्वाधिक बिक्री वाला रविवारीय अखबार बना हुआ है।

अखबार का दावा है कि इसकी पाठक संख्या, तीन अन्य शीर्ष रविवारीय अखबारों -संडे मिरर, पीपुल और डेली स्टार संडे- के पाठकों की संख्या से 12 लाख अधिक है, और संडे मेल की पाठक संख्या से 50 प्रतिशत अधिक है। इसके मालिकों के अनुसार, 15 प्रतिशत ब्रिटिश वयस्क इस अखबार को पढ़ते हैं।

अपनी सम्पादकीय टिप्पणियों के कारण शुरुआती समय से ही अभद्रता के लिए भी अखबार की एक समानांतर छवि रही है।

20वीं सदी के प्रारम्भ में 'पाल माल गजेट' के सम्पादक फ्रेडरिक ग्रीनवुड ने अखबार के मालिक व प्रबंध सम्पादक, जॉर्ज रिडल से कहा था, "मैंने अखबार देखा,और उसके बाद मैंने उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। और उसके बाद मैंने, 'सोचा कि यदि मैं उसे यहां छोड़ देता हूं तो, बावर्ची इसे पढ़ सकते हैं', इसलिए मैंने उसे जला दिया।"

मई 1941 में 'टाइम' पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में लिखा गया था कि हर रविवार सुबह ब्रिटेन के एक-तिहाई से अधिक घरों में तलाक, स्कैंडल, अपहरण, हमला, हत्या और खेल सम्बंधी सप्ताह भर की चटपटी खबरें इस अखबार के माध्यम से पढ़ी जाती हैं।

लेख में लिखा गया था, "न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के बगैर ब्रिटेन में रविवार की सुबह कुछ इसी तरह खाली-खाली सा लगेगा जैसे कि चर्च की घंटियों के बगैर लगता है।"

बिक्री में गिरावट के बाद अखबार ने एचई बेट्स और सोमरसेट मॉम जैसे लेखकों को लघु कहानियां लिखने के लिए अनुबंधित कर, और रॉबर्ट बूथबाई व एन्यूरिन बेवान को अपने टिप्पणी वाले पृष्ठों पर स्थान देकर अन्य रास्ते तलाशने की कोशिश की।

लेकिन इन प्रयोगों से बिक्री में गिरावट नहीं रुकी, और अखबार के मालिक सर विलियम एम्सली कार ने स्टेफोर्ड समरफील्ड को सम्पादक नियुक्त किया। कार का परिवार 1891 से अखबार का मालिक था। समरफील्ड अखबार को वापस पुरानी ऊंचाई पर ले गए और उन्होंने नए तरह की भड़काऊ सामग्री (द किस एंड टेल) उसमें शामिल की।

1960 में अखबार ने अभिनेत्री डायना डोर्स को उनके निजी जीवन के बारे में चटपटी कथा श्रृंखला प्रकाशित करने के लिए 35,000 पाउंड का भुगतान किया। अखबार ने इसी तरह की कहानियों के लिए क्रिस्टीन कीलर को 1963 में 23,000 पाउंड का भुगतान किया।

अखबार के लिए अपराध भी बिक्री का एक बड़ा विषय था, और इसके कारण अक्सर यह अखबार संकट में फंसता रहा। मूर्स के हत्यारों इयान ब्रेडी और मायरा हिंडले के मुकदमे के दौरान 1966 में पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह डेविड स्मिथ को उनकी कहानी के एवज में अखबार की ओर से 1,000 पाउंड का भुगतान किया गया था और फ्रांस में छुट्टी मनाने का बंदोबस्त किया गया था। इस मामले में अखबार अदालत की अवमानना से बाल-बाल बचा था।

1960 के दशक में कार परिवार ने अखबार को बेचने का मन बनाया। बाद में जनवरी 1969 में आस्ट्रेलियाई पत्रकार रूपट मडरेक ने 3.40 करोड़ पाउंड में अखबार को खरीद लिया। मडरेक (37) ब्रिटिश मीडिया बाजार में कदम रखना चाहते थे।

लेकिन अखबार गतिविधियां जस की तस बनी रहीं। प्रोफ्यूमो स्कैंडल के सात वर्षो बाद कीलर्स की कहानी के खुलासे को लेकर प्रेस परिषद ने यौन सम्बंधी सामग्रियों के अनैतिक इस्तेमाल के लिए अखबार आलोचना की। उसके बाद मडरेक ने कहा था, "लोग चाहें जितना भी उपहास करें, लेकिन मैं तो 150,000 अतिरिक्त प्रतियां बेचने जा रहा हूं।"

अखबार ने महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया और 1980 में संडे पत्रिका शुरू की। सात वर्ष बाद वेंडी हेनरी को पहली महिला सम्पादक नियुक्त किया। उसके बाद डेविड मोंटगोमरी, स्टुअर्ट हिगिंस, पीयर्स मोरगन, फिल हैल, रिबेका वैडे, और एंडी कौलसन जैसे चर्चित सम्पादकों ने अखबार को सजाया-संवारा।

वर्तमान में विवादों में छाए एंडी से पहले रिबेका वैडे 2000 में अखबार की सम्पादक बनी थीं। इसके तीन वर्ष वाद कौलसन सम्पादक बने, लेकिन 2007 में उन्होंने उस समय इस्तीफा दे दिया, जब अखबार के शाही संवाददाता क्लाइव गुडमैन को फोन हैकिंग मामले में जेल भेज दिया गया। कौलसन ने कहा कि उन्हें इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी, और यह मामला केवल एक संवाददाता तक ही सीमित था, लेकिन उन्होंने सामूहिक जिम्मदारी स्वीकार की थी।
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