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प्राइवेट पार्ट पकड़ना और नाड़ा खोलना दुष्कर्म, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद HC का फैसला

जनता जनार्दन संवाददाता , Feb 19, 2026, 15:21 pm IST
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प्राइवेट पार्ट पकड़ना और नाड़ा खोलना दुष्कर्म, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद HC का फैसला

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले पर हाल ही में काफी चर्चा हुई थी. हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म का प्रयास’ नहीं, बल्कि केवल ‘तैयारी’ माना जाएगा. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी लड़की के निजी अंग पकड़ना और उसके कपड़े का नाड़ा खोलना दुष्कर्म के प्रयास के तहत आता है.

चीफ जस्टिस की बेंच ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने की. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने आपराधिक कानून के सिद्धांतों की गलत व्याख्या की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कासगंज के विशेष जज द्वारा जून 2023 में जारी समन को बहाल कर दिया. यह समन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दुष्कर्म के प्रयास के मामले में जारी किया गया था.

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल प्रथम दृष्टया तथ्यों के आधार पर हैं और इससे आरोपियों की दोषसिद्धि तय नहीं मानी जानी चाहिए.

क्या था पूरा मामला?

मामला कासगंज की विशेष अदालत (पॉक्सो अधिनियम) से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, 10 नवंबर 2021 की शाम एक महिला अपनी 14 साल की बेटी के साथ घर लौट रही थी. रास्ते में गांव के तीन लोगों ने उन्हें रोका और लड़की को बाइक से घर छोड़ने की बात कही.

आरोप है कि रास्ते में आरोपियों ने लड़की के निजी अंग पकड़ लिए. एक आरोपी ने उसे खींचकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की और उसका नाड़ा खींच दिया. लड़की के चिल्लाने पर दो लोग वहां पहुंच गए, जिसके बाद आरोपी भाग गए.

इस घटना के बाद विशेष जज ने आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला बनाते हुए समन जारी किया. आरोपी इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट गए, जहां समन रद्द कर दिया गया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए विशेष जज का समन फिर से लागू कर दिया है.

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