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फरवरी में ही पड़ने लगी अप्रैल-मई वाली गर्मी... कल दिल्ली का तापमान 31.6°C किया गया दर्ज
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Feb 17, 2026, 16:45 pm IST
Keywords: Weather दिल्ली फरवरी
दिल्ली-NCR में फरवरी के बीच में ही गर्मी बढ़ गई है. 16 फरवरी 2026 को दिल्ली का तापमान 31.6°C दर्ज किया गया, जो इस साल का सबसे गर्म दिन रहा. यह तापमान सामान्य से 7.2°C ज्यादा है और पिछले पांच सालों का फरवरी रिकॉर्ड भी टूट गया है. लोग अब ऊनी कपड़े हटाकर हल्के कपड़े पहनने लगे हैं. सुबह और शाम के समय भी हल्की गर्मी महसूस हो रही है. क्या पूरे देश में ऐसा ही हाल है? सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देश के कई हिस्सों में गर्मी जल्दी आ गई है. डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के पहले 15 दिनों में देश के 36 बड़े शहरों में से 27 शहरों में दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहा. उत्तर भारत में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया है. दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, लुधियाना और हिसार जैसे शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर रहा. गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी कई जगहों पर तापमान 30°C से ऊपर पहुंच गया. रात का तापमान भी करीब 20 शहरों में सामान्य से 1 से 4°C ज्यादा दर्ज किया गया. क्या इस बार गर्मी ज्यादा पड़ेगी? India Meteorological Department और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के बाकी दिनों में तापमान 2 से 4°C तक सामान्य से ज्यादा रह सकता है. मार्च से गर्मी और बढ़ने की संभावना है. अनुमान है कि साल 2026, 2025 से भी ज्यादा गर्म हो सकता है. ऐसा लग रहा है कि वसंत ऋतु धीरे-धीरे कम हो रही है. सर्दी से सीधे गर्मी का मौसम आ रहा है. हीटवेव पहले शुरू हो सकती है, ज्यादा तेज हो सकती है और लंबे समय तक चल सकती है. पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि अब गर्मी अप्रैल से पहले ही शुरू हो जाती है और जून तक जारी रहती है. इसके पीछे वैज्ञानिक कारण क्या हैं? सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है. पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है. भारत में पिछले 100 सालों में तापमान लगभग 0.8°C बढ़ चुका है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से सर्दियां छोटी और गर्मियां लंबी व ज्यादा गर्म हो रही हैं. शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ असर भी बढ़ रहा है. दिल्ली जैसे शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सड़कें और कम पेड़-पौधे होने से गर्मी ज्यादा फंस जाती है. यही वजह है कि रात में भी तापमान ज्यादा नीचे नहीं गिरता. मौसम के पैटर्न में बदलाव मौसम के पैटर्न में बदलाव भी एक कारण है. ठंडी पश्चिमी विक्षोभ कम आ रहे हैं. आसमान साफ और हवाएं सूखी रहने से सूरज की किरणें सीधे जमीन को ज्यादा गर्म कर रही हैं. पहाड़ों पर कम बर्फबारी होने से ठंडी हवाएं भी कम आ रही हैं. ENSO यानी एल नीनो-ला नीना का असर भी देखा जा रहा है. अभी ला नीना कमजोर हो रही है और फरवरी से अप्रैल के बीच न्यूट्रल स्थिति में जा सकती है. आगे चलकर एल नीनो बनने की 50-60% संभावना है, जो भारत में गर्मी और सूखे को बढ़ा सकता है. |
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