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अल-फलाह यूनिवर्सिटी से कई डॉक्टर गायब, सोशल मीडिया अकाउंट भी डिलीट

अल-फलाह यूनिवर्सिटी से कई डॉक्टर गायब, सोशल मीडिया अकाउंट भी डिलीट

नई दिल्ली: लाल किला बम धमाके की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके स्टाफ के कई पहलुओं की जांच तेज कर दी है. अब तक यूनिवर्सिटी से जुड़े 12 से ज्यादा स्टाफ और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन जांच में कई गंभीर विरोधाभास और संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं, जिससे एजेंसियों में चिंता और बढ़ गई है.

जांच में यह भी पता चला है कि कई लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स) अचानक डीएक्टिवेट कर दिए गए हैं. इसके अलावा कई मोबाइल फोन लगातार स्विच्ड ऑफ हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि धमाके के बाद संगठित तरीके से सबूत छिपाने की कोशिश की जा रही है.

धमाके के बाद कई डॉक्टर और स्टाफ गायब

जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टर और स्टाफ धमाके के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हैं. एजेंसियों का मानना है कि इनमें से कुछ लोग साजिश में शामिल हो सकते हैं या उन्हें घटना की जानकारी हो सकती है.

अभी तक की पूछताछ में कई बयानों में विरोधाभास पाए गए हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि यूनिवर्सिटी में भीतरी तौर पर कोई नेटवर्क या सहयोग हो सकता है, जो घटना को अंजाम देने या उसके बाद की छानबीन को प्रभावित कर रहा है.

संदिग्ध बैंक लेन-देन की जांच

जांच टीम ने अब दो लाख रुपये से अधिक वाले कई बैंक खातों की भी जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्ट में कुछ लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं. इसके आधार पर एजेंसियां मान रही हैं कि यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं, जो धमाके और विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति में शामिल रहा है.

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी से जुड़े कई पहलू अब संदेह के घेरे में हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.

कमरे में चल रही थी विस्फोटक निर्माण की लैब

जांच के दौरान पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले एक व्यक्ति, गनई, फरीदाबाद में एक किराए के कमरे में विस्फोटक बनाने का काम कर रहा था. वह आटा चक्की और इलेक्ट्रिक मशीनों का उपयोग करके यूरिया को रिफाइन कर अमोनियम नाइट्रेट तैयार करता था, जिसका इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में होता है.

9 नवंबर को पुलिस ने उसी कमरे से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की. पूछताछ में गनई ने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से इसी प्रक्रिया के जरिए यूरिया से अमोनियम नाइट्रेट बनाकर विस्फोटक तैयार कर रहा था.

जांच में यह भी सामने आया कि गनई अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर के पद पर कार्यरत था. इससे सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारी धमाके से जुड़े नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं.

एजेंसियों की चिंता बढ़ी

जांच में मिली जानकारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है. कई डॉक्टर और स्टाफ का गायब होना, सोशल मीडिया अकाउंट का बंद होना और संदिग्ध बैंक लेन-देन यह संकेत देते हैं कि संगठित तरीके से सबूत मिटाने और नेटवर्क छुपाने की कोशिश की जा रही है.

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में यूनिवर्सिटी और धमाके से जुड़े अन्य पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जाएगी. एजेंसियां इस बात पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि किसने, कब और कैसे विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति की और इसमें कौन-कौन शामिल थे.

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