भारत ने नहीं मानी बात तो ट्रंप को लगी मिर्ची! क्यों खफा हो गए अमेरिकी राष्ट्रपति?

जनता जनार्दन संवाददाता , Aug 30, 2025, 8:35 am IST
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भारत ने नहीं मानी बात तो ट्रंप को लगी मिर्ची! क्यों खफा हो गए अमेरिकी राष्ट्रपति?

अमेरिका की जानी-मानी इन्वेस्टमेंट फर्म जेफरीज की ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पर अमेरिका द्वारा लगाया गया 50% तक का आयात शुल्क महज व्यापारिक असहमति का मामला नहीं, बल्कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "निजी नाराजगी" का परिणाम है.

यह टैरिफ उस समय लागू किया गया जब भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए चार दिवसीय सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी. रिपोर्ट का दावा है कि ट्रंप उस दौरान खुद को शांति दूत के रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे, लेकिन भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को सिरे से नकार दिया.

राजनीति बनाम व्यापार: टैरिफ के पीछे असल कहानी

जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया शुल्क एक सोची-समझी रणनीति नहीं, बल्कि एक "व्यक्तिगत प्रतिक्रिया" थी. ट्रंप भारत-पाक संघर्ष में कूटनीतिक दखल देना चाहते थे, शायद इस आशा में कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा सम्मान या नोबेल शांति पुरस्कार मिल सके. लेकिन भारत ने इस विचार को शुरू से ही खारिज किया.

रिपोर्ट के शब्दों में:

“यह टैरिफ इसलिए लगाया गया क्योंकि ट्रंप को यह नागवार गुज़रा कि भारत ने उन्हें किसी तरह की मध्यस्थता का मौका नहीं दिया. वह खुद को वैश्विक संकट सुलझाने वाला नेता साबित करना चाहते थे, लेकिन नई दिल्ली ने उनकी इस महत्वाकांक्षा पर ताला लगा दिया.”

भारत का स्पष्ट संदेश: विदेशी हस्तक्षेप नहीं चलेगा

भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान के साथ सभी सैन्य और कूटनीतिक मुद्दे केवल द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पूरी तरह से भारत की स्वायत्त कार्रवाई थी, और इसमें किसी भी विदेशी नेता की कोई भूमिका नहीं थी. ट्रंप हालांकि बार-बार दावा करते रहे कि उन्होंने युद्धविराम में ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ निभाई. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह दावा सार्वजनिक मंचों पर 40 से अधिक बार दोहराया.

अमेरिकी टैरिफ: भारत की कृषि नीतियों पर दबाव?

रिपोर्ट का एक और अहम पहलू भारत की कृषि नीति से जुड़ा है. जेफरीज का मानना है कि अमेरिका की व्यापारिक अपेक्षाओं का सबसे बड़ा टकराव भारत की कृषि नीति से है.भारत के करीब 25 करोड़ लोग कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं, और किसी भी सरकार के लिए यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. रिपोर्ट कहती है.“भारत कभी भी अपने कृषि बाज़ार को आयात के लिए पूरी तरह से नहीं खोलेगा, क्योंकि यह लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा सवाल है.”

रूस से तेल खरीद और यूक्रेन संघर्ष भी कारण

ट्रंप की नाराजगी सिर्फ मध्यस्थता तक सीमित नहीं रही. भारत द्वारा रूस से लगातार तेल खरीद और यूक्रेन संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों की नीति से दूरी बनाना भी अमेरिका की नाराजगी के कारणों में शामिल है. फिर भी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संवाद जारी है. उन्होंने कहा “हम दो बड़े लोकतंत्र हैं, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन बातचीत रुकी नहीं है.”

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