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कौन हैं IPS अनुकृति शर्मा? जिन्हें सौंपी गई नोएडा में एसीपी की कमान

जनता जनार्दन संवाददाता , Feb 05, 2026, 9:10 am IST
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कौन हैं IPS अनुकृति शर्मा? जिन्हें सौंपी गई नोएडा में एसीपी की कमान

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में आईपीएस अधिकारी अनुकृति शर्मा की नई तैनाती को लेकर पुलिस महकमे में हलचल है. हालिया प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें नोएडा में एसीपी के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है. अपनी सख्त और परिणामोन्मुखी कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली अनुकृति शर्मा इससे पहले लखनऊ, बुलंदशहर और संभल जैसे संवेदनशील जिलों में काम कर चुकी हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वे “खुलासों और स्पॉट एक्शन” वाली अधिकारी हैं, जिन्होंने कई बड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई कर अपराधियों पर नकेल कसी.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किए गए हालिया तबादलों में 24 आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल थे. इसी सूची में अनुकृति शर्मा का नाम भी आया. नोएडा जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील इलाके में उनकी तैनाती से पुलिसिंग में नई ऊर्जा और सख्ती आने की उम्मीद जताई जा रही है.

जयपुर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सफर

अनुकृति शर्मा 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 14 अक्टूबर 1987 को हुआ था. वे मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के श्यामनगर क्षेत्र की रहने वाली हैं. उनके पिता दीनदयाल शर्मा योजना आयोग में असिस्टेंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनकी मां मधु शर्मा गृहिणी हैं. परिवार का माहौल शुरू से ही शिक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता देने वाला रहा.

स्कूली दिनों में अनुकृति का झुकाव कला और सांस्कृतिक गतिविधियों की ओर भी था. वे डांस में रुचि रखती थीं और स्कूल के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं. बारहवीं के बाद उन्होंने आईआईटी में प्रवेश का सपना देखा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मन बनाया. आगे चलकर उन्होंने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) से इंटीग्रेटेड कोर्स किया और फिर एमटेक की पढ़ाई पूरी की.

अमेरिका और नासा तक पहुंची भारतीय छात्रा

उच्च शिक्षा के दौरान अनुकृति शर्मा का चयन अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रोग्राम के लिए हो गया. उन्हें मासिक 2700 डॉलर की स्कॉलरशिप भी मिली, जो उनकी अकादमिक प्रतिभा का प्रमाण थी. पढ़ाई और रिसर्च के दौरान ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिला और बाद में उन्होंने नासा से जुड़े एक प्रोजेक्ट पर भी काम किया.

आईआईएसईआर में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात वैभव मिश्रा से हुई, जो आगे चलकर उनके जीवनसाथी बने. दोनों का चयन अमेरिका में हुआ था. परिवार के दबाव और व्यक्तिगत निर्णय के बाद दोनों ने भारत लौटकर वर्ष 2013 में विवाह कर लिया. शादी के बाद अनुकृति एक बार फिर रिसर्च के लिए अमेरिका गईं और वैज्ञानिक क्षेत्र में काम जारी रखा.

निर्भया कांड से बदली सोच, UPSC की ओर रुख

हालांकि विज्ञान और रिसर्च में अच्छा करियर होने के बावजूद कुछ सामाजिक घटनाओं ने अनुकृति शर्मा को भीतर से झकझोर दिया. निर्भया कांड और कोलकाता में एक नाबालिग लड़की की जबरन शादी जैसी घटनाओं ने उनके मन पर गहरा असर डाला. इन घटनाओं ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि समाज में बदलाव के लिए सिर्फ रिसर्च लैब में काम करना पर्याप्त नहीं है.

यही वह मोड़ था, जब उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाकर जमीनी स्तर पर काम करने का फैसला लिया. अनुकृति ने अमेरिका में चल रही रिसर्च छोड़ दी और भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की. वे अपने ससुराल वाराणसी आ गईं और यहीं से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की शुरुआत की. कड़ी मेहनत और लगन के बाद शादी के लगभग सात साल बाद वर्ष 2020 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना पूरा किया.

फील्ड पोस्टिंग में दिखा सख्त और संवेदनशील चेहरा

आईपीएस बनने के बाद अनुकृति शर्मा ने लखनऊ में प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर फील्ड में बतौर प्रशिक्षु अधिकारी काम शुरू किया. जल्द ही उनकी कार्यशैली की चर्चा होने लगी. पहली बड़ी पोस्टिंग उन्हें बुलंदशहर में एएसपी के रूप में मिली. यहां उन्होंने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रियता दिखाई.

एक निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक बुजुर्ग महिला के घर में बिजली की व्यवस्था न होने की बात नोटिस की. मौके पर ही संबंधित विभाग को कनेक्शन दिलाने के निर्देश दिए गए. इस घटना के बाद उनके मानवीय और संवेदनशील चेहरे की चर्चा आम लोगों के बीच होने लगी.

संभल में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश

26 जनवरी 2024 को अनुकृति शर्मा का तबादला बुलंदशहर से संभल कर दिया गया, जहां उन्होंने एएसपी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. यहां उनके नेतृत्व में कई बड़े अभियानों को अंजाम दिया गया. सबसे चर्चित मामला 12 राज्यों में फैले करीब 100 करोड़ रुपये के बीमा घोटाले का खुलासा रहा. जांच में सामने आया कि एक गिरोह गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसियां कराता था और उनकी मौत के बाद फर्जी दावे पेश कर बीमा राशि हड़प लेता था.

इस नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 70 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की गई. इस मामले ने उन्हें प्रदेश स्तर पर पहचान दिलाई और उनकी छवि एक तेजतर्रार, नतीजे देने वाली अधिकारी के रूप में मजबूत हुई.

कम्युनिटी पुलिसिंग की नई मिसाल

अपराध नियंत्रण के साथ-साथ अनुकृति शर्मा ने संभल में कम्युनिटी पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी. “पुलिस माई फ्रेंड” जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने पुलिस और आम जनता के बीच भरोसे की दूरी कम करने का प्रयास किया. संभल प्रदेश का पहला ऐसा जिला बना, जहां सभी 15 थानों में मदर एंड चाइल्ड केयर रूम (क्रेच) स्थापित किए गए. यह पहल महिलाओं और बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई थी.

महिला बीट अधिकारियों की सक्रियता बढ़ाने के लिए हर थाने को सीएसआर फंड से एक्टिवा स्कूटर उपलब्ध कराए गए. इसके अलावा, गरीब और बेसहारा महिलाओं के साथ दीपावली मनाने जैसी मानवीय पहल भी उनके कार्यकाल की पहचान बनी.

इन सामाजिक और प्रशासनिक प्रयासों के लिए उन्हें 15 अगस्त 2025 को डीजी प्रशंसा चिह्न सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया.

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