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क्या शहबाज शरीफ की सरकार का समय समाप्त हो चुका है?
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Jul 10, 2025, 10:15 am IST
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![]() पाकिस्तान में हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि शहबाज शरीफ की सरकार का समय समाप्त हो सकता है. वर्तमान में राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान में एक बार फिर सैन्य शासन की वापसी हो सकती है. यह बदलाव "सॉफ्ट कू" के रूप में हो सकता है, जिसमें सेना अपनी कमान अपने हाथों में ले सकती है, लेकिन इसे तख्तापलट के तौर पर नहीं प्रस्तुत किया जाएगा. लेकिन सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि क्या इस सत्ता परिवर्तन की स्क्रिप्ट वाकई अमेरिका के व्हाइट हाउस में बैठकर लिखी गई थी, जैसा कि कुछ राजनीतिक विश्लेषक दावा कर रहे हैं? पाकिस्तान में मची खलबली इस्लामाबाद में इन दिनों राजनीतिक माहौल बहुत ही अस्थिर है और पाकिस्तान की मीडिया में इन घटनाओं पर गंभीर चर्चा हो रही है. शहबाज शरीफ की सरकार को लेकर अफवाहें फैल रही हैं कि पाकिस्तान की सेना जल्द ही एक बड़ा कदम उठाने वाली है. रिपोर्ट्स के अनुसार, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जो वर्तमान में पाकिस्तान सेना के प्रमुख हैं, अपने गुरु जनरल परवेज मुशर्रफ के नक्शे कदम पर चलते हुए पाकिस्तान की सत्ता संभाल सकते हैं. आसिफ अली जरदारी को राष्ट्रपति पद से हटाकर मुनीर खुद राष्ट्रपति बन सकते हैं. इसके बाद, वे पाकिस्तान में राष्ट्रपति प्रणाली को लागू कर सकते हैं और एक प्रधानमंत्री को कठपुतली के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, जिसे सेना की इच्छा के मुताबिक काम करना पड़ेगा. इस प्रक्रिया को "सॉफ्ट कू" के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें सैन्य शक्ति के बिना सत्ता का नियंत्रण सेना के पास चला जाता है. मुनीर और शहबाज की रणनीति आसिम मुनीर के पास फील्ड मार्शल बनने के बाद असीम सैन्य अधिकार हैं और वह अब खुद को जिया उल हक और परवेज मुशर्रफ के बराबर मानते हैं. वह पाकिस्तान की राजनीति, कूटनीति, और विदेश नीति में गहरे दखलंदाजी कर रहे हैं. शहबाज शरीफ ने मुनीर को फील्ड मार्शल नियुक्त किया था, और अब मुनीर बदले में शहबाज की सरकार को गिरा सकते हैं. आसीम मुनीर के लिए यह एक आसान कदम हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख आसिफ अली जरदारी खुद अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हो सकते हैं, बशर्ते उनकी शर्त पूरी हो जाए. बताया जा रहा है कि जरदारी ने सेना से यह डील की है कि यदि उनके बेटे बिलावल भुट्टो को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे राष्ट्रपति पद छोड़ देंगे. बिलावल भुट्टो हो सकते हैं "कठपुतली" पीएम कुछ जानकारों का कहना है कि बिलावल भुट्टो को प्रधानमंत्री के पद पर रखा जा सकता है, लेकिन वह एक "कठपुतली" प्रधानमंत्री होंगे, जिसे सेना के आदेशों का पालन करना पड़ेगा. वहीं, कुछ विश्लेषक मानते हैं कि आसिम मुनीर खुद राष्ट्रपति बनकर सारे निर्णय अपनी मर्जी से ले सकते हैं. पाकिस्तान की राजनीति में आमूल-चूल परिवर्तन पाकिस्तानी मीडिया इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चिंता जता रहा है. पत्रकार अहमद नूरानी का कहना है कि पाकिस्तान के राजनीतिक दलों को सैन्य ताकत के सामने सिर झुका कर काम करना होगा. खासतौर पर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को मुनीर के फैसलों को बिना किसी विरोध के स्वीकार करना पड़ेगा. अमेरिका का प्रभाव और ट्रंप का बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार पाकिस्तान की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की हैसियत नगण्य है और वहां की सेना देश की असली शासक है. उन्होंने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के आंतरिक मामलों पर बात करने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि सेना के प्रमुख से बातचीत करनी चाहिए. यह बयान पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल को और भी तेज कर गया था और अब मुनीर की बढ़ती शक्ति के कारण उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है. पाकिस्तान में तख्तापलट की कहानी पाकिस्तान में तख्तापलट नई बात नहीं है. इतिहास में कई बार पाकिस्तान में सैन्य सरकारों का आगमन हुआ है. 1958 में जनरल अयूब खान ने तख्तापलट कर पाकिस्तान पर 10 साल तक शासन किया. इसके बाद, 1969 में जनरल याह्या खान, 1977 में जनरल जिया उल हक, और 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी सत्ता पर कब्जा किया. इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य हस्तक्षेप की परंपरा बहुत पुरानी है. अब, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान एक और सैन्य शासक की ओर बढ़ रहा है, और यह "सॉफ्ट कू" का तरीका हो सकता है, जो किसी भी तख्तापलट से ज्यादा खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसमें सेना बिना किसी आधिकारिक सैन्य शक्ति के सीधे देश पर नियंत्रण कर सकती है. |
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