निर्दोष विवेक तिवारी को लखनऊ में पुलिस ने मार डाला, अधिकारियों ने माना हादसा, परिजनों ने कहा हत्या

जनता जनार्दन संवाददाता , Sep 29, 2018, 19:02 pm IST
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निर्दोष विवेक तिवारी को लखनऊ में पुलिस ने मार डाला, अधिकारियों ने माना हादसा, परिजनों ने कहा हत्या लखनऊः प्रदेश में अपराधियों के सामने सलामी ठोंकने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस के बेलगाम सिपाही अब निर्दोषों की जान लेने लगे हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर विस्तार में यूपी पुलिस के कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने ऐपल के सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मारी जिसके चलते उनकी मौत हो गई. इस मामले में मृतक का परिवार लगातार पुलिस पर सवाल उठा रहा है. मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि मेरे पति का तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा जब तक मुख्यमंत्री उनसे मुलाकात नहीं करते.

कल्पना ने कहा कि अगर मेरे पति किसी संदिग्ध हालत में थे भी तो भी पुलिस को कोई हक नहीं कि वो मेरे पति को गोली मारे. अगर विवेक ने पुलिस के कहने पर गाड़ी नहीं रोकी तो आरटीओ दफ्तर जाकर उनकी गाड़ी का नंबर नोट करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी. पुलिस ने आखिर उन्हें गोली क्यों मारी? क्या वो कोई आतंकवादी थे.

कल्पना के मुताबिक, 'मैं सना (जो उस समय विवेक के साथ गाड़ी में मौजूद थीं) को जानती हूं जो उस समय मेरे पति के साथ मौजूद थी. कल्पना ने बताया कि अस्पताल के एक कर्मचारी ने फोन पर मुझे जानकारी दी कि आपके पति और उनके साथ मौजूद महिला को चोट लगी है. आखिर पुलिस ने मुझे इस बात की जानकारी क्यों नहीं दी?' वहीं, विवेक के रिश्तेदार विष्णु शुक्ला ने पूछा कि क्या विवेक आतंकवादी थे जो पुलिस ने उन पर फायरिंग की? इसके साथ ही इस मामले में उन्होंने निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की है.

घटना के वक्त विवेक के साथ गाड़ी में मौजूद सहकर्मी सना खान ने बताया कि, 'मैं विवेक के साथ घर जा रही थी. गोमती नगर विस्तार के पास हमारी गाड़ी पहुंची थी, तभी दो पुलिसवाले सामने से आए. पीछे वाले के हाथ में लाठी थी और आगे वाले के पास गन. पीछे वाला पहले उतर गया और आगे वाले ने हमारी गाड़ी के किनारे गाड़ी खड़ी कर दी. दोनों दूर से चिल्ला रहे थे. हमने उनसे बचकर निकलने की कोशिश की और उनके आगे के पहिए से हमारी गाड़ी टकराई. लेकिन तभी अचानक उन्होंने गोली चला दी. हमने वहां से गाड़ी आगे बढ़ाई. गोली विवेक सर की चिन पर लगी. जब तक होश था उन्होंने गाड़ी चलाई और बाद में गाड़ी अंडरपास में खंबे से टकरा गई और विवेक सर का काफी खून बहने लगा. मैंने सबसे मदद लेने की कोशिश की. एंबुलेंस के आने में देर हो रही थी. थोड़ी देर में वहां पुलिस आई, जिसने हमें अस्पताल पहुंचाया. बाद में जानकारी मिली कि विवेक की मौत हो चुकी है.'

इस घटना के आरोपी प्रशांत चौधरी का कहना है कि रात 2 बजे मुझे एक संदिग्ध कार दिखी जिसकी लाइट बंद थी, जब मैंने कार की तलाशी लेनी चाही तो विवेक ने तीन बार मुझे गाड़ी से मारने की कोशिश की, जिसके बाद अपने बचाव में मुझे फायरिंग करनी पड़ी.

इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस मामले की में जांच जारी है और दोनों कॉन्स्टेबलों के खिलाफ आरोप साबित होने का बाद उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना है कि विवेक के सिर में चोट गोली से लगी या एक्सिडेंट से यह पोस्टमॉर्टम के बाद ही साफ हो सकेगा. अभी सना के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने कहा है कि मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट सिफारिश की गई है और एसआईटी का गठन भी किया गया है.साथ ही उन्होंने साफ किया कि यह एनकाउंटर नहीं है.

कलानिधि नैथानी ने प्रेस कॉन्फ्रेस की इसके बाद सना ने भी मीडिया से बात की. दोनों के बयान में फर्क है. एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सना ने पुलिस को तहरीर दी है कि गोमती नगर विस्तार इलाके में सड़क किनारे हमारी गाड़ी खड़ी थी तभी सामने से पुलिस की बाइक आई और तभी विवेक और सना ने वहां से बचकर निकलने की कोशिश की. तभी पुलिस ने सामने से गोली चला दी. इसके बाद गाड़ी आगे जाकर अंडरपास में दीवार से टकराई और विवेक के सिर से खून बहने लगा.

वहीं इसके बाद सना ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारी गाड़ी रुकी नहीं थी. सना ने बताया कि हम रास्ते से जा रहे थे तभी सामने से बाइक पर दो पुलिसवाले आए और दूर से ही बहुत तेज चिल्लाने लगे. तभी पीछे बैठा पुलिसवाला बाइक से उतर गया. उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की, लेकिन विवेक ने गाड़ी नहीं रोकी तो पुलिस ने गोली चला दी.

हालांकि इस मामले में डीजीपी ओपी सिंह ने माना है कि कॉन्स्टेबल की गलती थी. हालात ऐसे नहीं थे कि उनपर गोली चलाना जरूरी हो.
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