भारत के नौसेना अभ्यास 'मिलन 2018' में नहीं शामिल होगा मालदीव, बताई वजह

भारत के नौसेना अभ्यास 'मिलन 2018' में नहीं शामिल होगा मालदीव, बताई वजह नई दिल्ली: मालदीव ने भारत के साथ द्विवार्षिक नौसेना अभ्यास 'मिलन 2018' में भाग लेने से इनकार कर दिया है। मालदीव का कहना है कि ऐसा उसने अपने देश में आपातकाल लागू होने के चलते किया है। भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने मंगलवार को कहा कि मालदीव ने द्विवार्षिक नौसेना अभ्यास में शिरकत का न्योता ठुकरा दिया है। हालांकि पहले नौसेना चीफ एडमिरल लांबा ने बताया कि मालदीव ने निमंत्रण ठुकराने के पीछे कोई कारण नहीं बताया है।

गौरतलब है कि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में आयोजित मिलन अभ्यास में 16 से ज्यादा देश शिरकत कर रहे हैं। 'मिलन' नाम का यह नौसेना अभ्यास 6 मार्च से शुरू होने जा रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सामुद्रिक ताकत को ध्यान में रखते हुए 'मिलन' का आयोजन किया जा रहा है। नौसेना प्रमुख ने कहा, कि इसका मकसद ‘लुक ईस्ट’ और एक्ट ईस्ट ज्यादा है.

जानकारों की मानें तो 1995 में शुरू हुए इस अभ्यास का उद‌्देश्य पूर्वी एशिया एवं दक्षिण पूर्व एशिया की नौसेनाओं के बीच दोस्ती को बढ़ावा देना है।मिलन से भारत औपचारिक और अनौपचारिक संवाद स्थापित करना चाहता है।

गौरतलब है कि पिछले साल भारत ने रूस के साथ ऐतिहासिक युद्धाभ्यास किया था। व्लाडीवोस्टक में युद्धाभ्यास किया गया। यह पहला मौका था जब रूस के साथ युद्धाभ्यास में दोनों देशों की तीनों सेना (सेना, नौसेना और वायुसेना) हिस्सा लिया। जानकारी के मुताबिक यह युद्धाभ्यास आतंक के खात्मे के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

युद्धाभ्यास जापान सागर में दस दिनों तक चला और इसको 'इंद्र-2017' का कोड नाम दिया गया था। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों मित्र देशों का संयुक्त युद्धाभ्यास साझा चुनौतियों से निपटने की क्षमताओं में बढ़ोतरी करना है। इस युद्धाभ्यास में लगभग 450 भारतीय और 1000 से अधिक रूसी सैनिकों ने हिस्सा लिया। युद्धाभ्यास उद्घाटन समारोह में दोनों देशों के सेना के तीनों अंगों ने मार्च पास्ट भी किया।
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