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भारतीय फौज पर पाकिस्तानी हमले पर व्यंग्यः लोंग लिव कायरता! लोंग लिव गुंडागर्दी!

त्रिभुवन , May 06, 2017, 7:33 am IST
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भारतीय फौज पर पाकिस्तानी हमले पर व्यंग्यः लोंग लिव कायरता! लोंग लिव गुंडागर्दी! नई दिल्लीः वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन अपनी मारक टिप्पणियों और सटीक व्यंग्यवाणों के लिए सोशल मीडिया पर खासे चर्चित हैं. भारत पाक संबंधों पर उनकी यह टिप्पणी फेसबुक पर खासी चर्चित है.

गुंडे ने एक भक्त के गाल पर चांटा रसीद कर दिया।
भक्त ने तत्काल कड़े शब्दों में इसकी निंदा कर दी।

गुंडे ने भक्त को फिर थप्पड़ मारा।
भक्त ने और कड़े शब्दों में इसकी निंदा की।

गुंडे ने भक्त को इस बार घूंसा मारा।
भक्त ने और कड़े शब्दों में इसकी निंदा की और गुंडे को चेताया कि वह इन हरकतों से बाज़ आए। और गुंडे को आइंदा के लिए कड़ी चेतावनी दी।

गुंडे ने इस बार भक्त के सिर में मुक्का मारा।
भक्त ने इसे निंदनीय कृत्य निरूपित किया और कहा कि यह हमला गुंडे की हताशा का परिचायक है। यह कायरता है। यह निंदनीय है।

गुंडे ने इस बार भक्त के दोनों गालों पर तड़ातड़ चपत जड़ी और जड़ता ही रहा।
अबकी बार भक्त ने अपने चारों ओर सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश जारी कर दिए और दो टूक शब्दों में गुंडे को बताया कि यह हमला बेहद कायराना है।

गुंडे ने इस बार भक्त को घूंसों और लातों से मारा।
अबकी बार भक्त ने फौरन मीटिंग बुला कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए और कहा कि वह गुंडे के ख़िलाफ़ उचित समय पर उचित कार्रवाई करके ही दम लेगा।

गुंडे ने भक्त को फिर मारा और उसे नीचे पटक कर पीठ पर दो-तीन लात जमाईं। भक्त सुबकियां भर-भरकर रोता रहा। उसके जिस्म में जुंबिश तक न हुई।
अबकी बार भक्त ने अपने सुरक्षा कर्मियों को गुंडे के घर के चारों तरफ तैनात कर दिया और हमले के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।

लेकिन गुंडे के वही तेवर और वही मुद्राएं।

अंतत: भक्त ने माहौल और अपनी कायरता की गहराई को भांप कर गुंडे को शांति वार्ता के लिए निमंत्रण दिया और इसे महान् शांति प्रस्ताव बताया। इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार हुआ और सब लोगों ने कहा कि भक्त ने यह बेहतरीन कदम उठाया है। भक्त की इस कदम के लिए जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।

यह वही भक्त था, जो अक्सर गांधी को इसलिए गालियां देता था कि गांधी ने किसी समय कह दिया था : जब कोई तुम्हें इस गाल पर थप्पड़ मारे तो तुम अपना दूसरा गाल भी उसके आगे कर देना और कहना कि लो इधर भी मारो। यह भक्त गांधी के इस शांतिवादी वाक्य को ऐतिहासिक कायरता बताता रहा था। गांधी ने ऐसा कहा भले हो, लेकिन गांधी ने सदा ही अपने जीवन में किया इसका ठीक उलटा। गांधी शांति के नाम पर सदा अंगरेज़ों और अपने समस्त विरोधियों को तलता और छलता रहा। वह बहुत कुटिल था। लेकिन भक्त आज वह सब कर रहा था, जो गांधी कहा करता था। भक्त की कायरता का आलम यह था कि वह गांधी जैसा विरोध करने जैसा भी सोच नहीं पा रहा था।

भक्त को मारपीटकर थक चुके गुंडे ने भक्त के शांति प्रस्ताव को देखा तो वह प्रसन्न हो गया। उसने कहा तो कुछ नहीं, लेकिन बॉडी लैंग्वेज ऐसे बनाई मानो वह मैत्री को बहुत उत्कंठित हो। गुंडे की यह मुद्रा देख भक्त ने गुंडे की बीवी के लिए सूट का कपड़ा, गुंडे की मां के लिए शाॅल तथा बच्चों के लिए चॉकलेट लेकर शांतिवार्ता के लिए गुंडे के घर पहुंच गया। वह गुंडे के बकरे के लिए गांधी की बकरी के बचे हुए बादाम और पतंजलि का घी भी ले गया।

गुंडे ने भक्त को ज्यादा भाव नहीं दिए, लेकिन उसने अपने घर आते ही राष्ट्र के नाम सीना फुलाकर संदेश दिया कि आज से गुंडा हमारा और हम गुंडे के भाई हैं।

गुंडे ने दो दिन बाद भक्त को गली में देखा तो फिर दो चांटे रसीद कर दिए। इस बार भक्त ने कहा : यह अत्यंत कायराना हरकत है। मैं इसका अभी बदला लूंगा।यह सुनते ही लोग हैरान रह गए। उन्होंने सोचा, चलो आज तो कट्टा-कट्‌टी निकल ही जाएगी। लेकिन वे यह देखकर हैरान कि भक्त ने तो गुंडे के भतीजे को अपने घर बुलवाया हुआ है।

लोगों ने सोचा, भक्त कुछ करेगा। लेकिन उन्होंने खिड़कियों और दरवाज़ों की झिरियों से सुना कि भक्त ने कहा : गुंडे की यह हिमाकत ठीक नहीं है। हम इस पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हैं। गुंडे का भतीजा गुंडे से भी बड़ा ढीठ और पाजी था। वह हो-हो-होकर हंसने लगा।

गुंडे का भतीजा भक्त् से मिलकर बाहर आया तो बाहर लोगों की भारी भीड़ लगी थी और गुंडे के भतीजे को विदा करने भक्त का भतीजा बाहर आया था।

लोगों ने देखा : गुंडे के घर के बाहर लिखा है : यह गुंडा हमारा मोस्ट फेवर्ड गुंडा है!

नेपथ्य में कुछ आवाज़ें गूंज रही थी : लोंग लिव कायरता! लोंग लिव गुंडागर्दी!!!

# वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन की फेसबुक वाल से साभार.
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