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ममता ने हटाए लेनिन-मार्क्स के पाठ
जनता जनार्दन संवाददाता ,
Apr 07, 2012, 11:57 am IST
Keywords: West Bengal School Education Department World History of course Trinamool government Mamata Banerjee पश्चिम बंगाल स्कूली शिक्षा विभाग विश्व इतिहास पाठ्यक्रम तृणमूल सरकार ममता बनर्जी
कोलकाता: राज्य में साढ़े तीन दशक की वामसत्ता के पराभव के बाद जहा लेनिन-मार्क्स की प्रासंगिकता राजनीतिक तौर पर जाती रही, वहीं अब इसे पश्चिम बंगाल के स्कूली शिक्षा विभाग ने विश्व इतिहास के पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया है। तृणमूल सरकार के इस फैसले को पूर्व लोस अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने गैरजरूरी कदम बताते हुए कहा, मार्क्सवाद व लेनिन विश्व इतिहास का हिस्सा हैं, इससे कैसे इंकार किया जा सकता है।राज्य की पाठ्यक्रम पुनर्गठन समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसका नाम नहीं लिया, लेकिन इतना कहा कि पूर्व सरकार ने पाठ्यक्रम में कई गैरजरूरी अध्याय जोड़ दिए थे, जिनकी प्रासगिकता अब नहीं रह गई है। इन्हें हटा कर हरित क्राति, महिला आदोलनों और अन्य क्राति के इतिहास को शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम का पुनर्गठन दो माह में किया गया। तृणमूल सरकार ने पाठ्यक्रम का नए सिरे से पुनर्गठन करने को विशेष कमेटी गठित की थी। जिसने अपनी सिफारिश में इन चैप्टर्स को हटाए जाने की अनुशसा की थी। नए पाठ्यक्रम में बाग्लादेश और पाकिस्तान का इतिहास भी होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इस तरह के परिवर्तन की अपेक्षा की जा रही है। राज्य माकपा अभी इस मुद्दे पर मुखर विरोध करने की स्थिति में नहीं है। बताते चलें कि सत्ता परिवर्तन के बाद कई बड़े शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों से भी लेनिन मार्क्स की तस्वीरें हट चुकी हैं। उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मीडिया को भी सीमा रेखा में रखने पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि कोई लाख विरोध करे, लेकिन वह अखबारों की खरीद में कटौती व कुछ चुनिंदा अखबारों को ही लाइब्रेरी में रखने के निर्णय को वापस नहीं ले सकती। ममता ने कहा कि उनका खुद का अपना एक अखबार जागो बाग्ला है, लेकिन उसको उन्होंने लाइब्रेरी में रखने की अनुमति नहीं दी। उनका अखबार नहीं रहेगा तो माकपा का मुखपत्र गणशक्ति या अन्य किसी राजनीतिक पार्टी के अखबार को भी वह लाइब्रेरी में रखने की छूट नहीं दे सकतीं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ समाचार पत्र उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने राज्य में कुछ ऐसे समाचार पत्रों को सतर्क करते हुए कहा कि वे तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर आग लगाने का काम न करें। ऐसे समाचार पत्रों को अपनी सीमा रेखा समझनी चाहिए। |
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