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JLF 2026 में मूक बधिरों की आवाज बनी नुपुर

जनता जनार्दन संवाददाता , Jan 21, 2026, 9:49 am IST
Keywords: JLF 2026   जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल  
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JLF 2026 में मूक बधिरों की आवाज बनी नुपुर

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की एक खास पल के जरिए इस साहित्य महाकुंभ में आने वाले मूक बधिर लोग अब सेशन में होने वाली अहम चर्चा को समझ रहे हैं. जयपुर में साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर के रूप में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मनोज भारद्वाज और उनकी टीम के सदस्य इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं. खास बात है कि 18 साल की नुपुर भारद्वाज भी इस पहल का हिस्सा बन चुकी हैं. अपने 2 साल के जेएलएफ से जुड़े अनुभव को लेकर वह खासा उत्साहित नजर आती हैं. ईटीवी भारत ने उनसे भी इस अनुभव के बारे में जाना. उनका कहना है कि इस तरह की पहल को और आगे बढ़ाकर मूक बधिर समाज को जागरूक करने के लिए प्रयास करने चाहिए.

इस किस्से ने बनाया साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर : नुपुर ने बताया कि वे इस काम को आगे भी करना चाहती हैं. साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर पिता के साथ रहते हुए उन्होंने मूक बधिर समाज की पीड़ा को करीब से समझा. लगभग 8 साल की उम्र में, उन्होंने इस सांकेतिक भाषा को सीखने के लिए अपनी ललक दिखाई. सांकेतिक भाषा की प्रशिक्षक के रूप में खुद को देखते हुए नूपुर बताती हैं कि उन्हें लगता है कि इस दिशा में करियर आगे बढ़ने से न सिर्फ सम्मान, स्नेह और प्रसिद्धि मिलेगी, बल्कि सुनने और बोलने में असमर्थ लोगों को इस दिशा में काफी मदद मिल सकेगी.

इस घटना ने किया प्रेरित : नूपुर ने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि कैसे उनकी क्लास में करीब 10 साल पहले एक मूक बधिर छात्रा का दाखिला हुआ था और उसे पढ़ाई करने में काफी ज्यादा परेशानी से सामना करना पड़ता था. इस घटना ने नूपुर के जीवन में प्रेरणा का काम किया और वह इस दर्द को समझते हुए समाधान की राह पर आगे बढ़ गई.

मूक-बधिर समाज भी है अब भरोसे से लबरेज : सुनने और बोलने में असमर्थ जयपुर के रहने वाले तरुण कुमार शर्मा ने बताया कि जब पहली बार उन्होंने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर के जरिए साहित्य के महाकुंभ का अनुभव किया तो उन्हें लगा कि अब हाशिए पर मौजूद उनके जैसे लोगों को भी देश दुनिया के बारे में जानकारी मिल सकेगी. इस पहल के जरिए मूक बधिर समाज भी गंभीर विषयों पर होने वाली चर्चाओं का हिस्सा बन सकता है. तरुण शर्मा ने बताया कि उन्होंने जेएलएफ के चौथे दिन सारे सेशन अटेंड किए और उनका अनुभव बेहतरीन रहा.

सरकारी स्तर पर प्रयास की मांग : इस चर्चा के जरिए ईटीवी भारत में साइन लैंग्वेज में बात कर रहे तरुण शर्मा से समझा कि वह कैसे जयपुर में रहकर अपने जैसे बाकी लोगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ताकि उन्हें समाज में बराबरी के अवसर मिल सके. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे आयोजन ही नहीं बल्कि अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी मूकबधिर के लिए अगर साइन लैंग्वेज इंस्ट्रक्टर मौजूद रहेंगे, तो फिर उनके जैसे से लोगों को जागरूक रहने में और अग्रिम पंक्ति में आने में काफी सहूलियत होगी.

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