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धर्म-अध्यात्म
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इस दान को ऐसे ही नहीं कहा जाता है महादान जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 27, 2023
आचार्य चाणक्य भारत के महान दार्शनिक, कुटनीतिज्ञ और विद्वान रहे हैं. उन्होंने मानव जीवन, सफलता, धोखे को लेकर कई सारी बातें कही हैं. उनकी बातों को नीति शास्त्र में संकलित किया गया है ....  समाचार पढ़ें
पौष माह के आखिरी दिनों में किए इन उपायों से चमक उठेगा भाग्य जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jan 03, 2023
अगर संभव हो तो सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए पौष माह के आखिरी दिनों में सूर्य देव का व्रत रखें. इस दौरान उपवास में तिल गुड़ का ही सेवन करें. इससे व्यक्ति को ऐश्वर्य, धन और संपदा की प्राप्ति होती है ....  समाचार पढ़ें
भाग्य को चमकाने में असरदार हैं इस पेड़ के पत्ते जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 23, 2022
हिंदू धर्म में वैसे भी कई तरह के पेड़-पौधों को शुभ माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है. कई पेड़-पौधों को जहां वास्तु शास्त्र में लगाना सही बताया गया है. वहीं, ज्योतिष शास्त्र में भी इसके कई मायने ....  समाचार पढ़ें
साल 2022 की आखिरी अमावस्या कब है? पितृ पक्ष के लिए है बेहद खास जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 15, 2022
हिंदू पंचांग के अनुसार पौष अमावस्या तिथि 22 दिसंबर की शाम 7 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रही है और 23 दिसंबर दोपहर 03 बजकर 46 मिनट कर रहेगी. ....  समाचार पढ़ें
मान-सम्मान में वृद्धि के लिए जानें पूजा और अर्घ्य की सही विधि जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 08, 2022
सुबह समय से उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद सूर्य देव के दर्शन करें और उन्हें जल अर्पित करें. सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एक तांबे के लोटे में जल लें और उसमें सिंदूर, अक्षत, लाल फूल आदि डाल लें. अब पूर्व ....  समाचार पढ़ें
मंगलवार को बजरंगबली दूर करेंगे हर सकंट जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 28, 2022
मंगलवार के दिन हनुमान जी को समर्पित है. इस दिन पूजा-पाठ करने के साथ-साथ व्रत रखने का भी विधान है. इस दिन व्रत रखने से कुंडली में मंगल और शनि ग्रह की स्थिति मजबूत होती है. इतना ही नहीं, जीवन में आने वाले संकटों और कष्टों से भी निजात मिलती है. शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी कलयुग के ऐसे देवता हैं, ....  समाचार पढ़ें
दिसंबर में बन रहा धन राजयोग! 3 राशि वालों की होगी बल्‍ले-बल्‍ले जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 25, 2022
ज्योतिष शास्‍त्र के अनुसार हर ग्रह का गोचर या ग्रहों की युति सभी 12 राशियों पर असर डालती है. हाल ही में 13 नवंबर को मंगल ग्रह ने वृषभ राशि में गोचर किया है. वहीं शुक्र ग्रह ने भी राशि परिवर्तन वृश्चिक राशि में प्रवेश किया है. इस तरह मंगल ग्रह, शुक्र के स्‍वामित्‍व वाली राशि वृषभ में हैं और शुक्र ग्रह मंगल के स्‍वामित्‍व वाली राशि वृश्चिक में हैं. मंगल और शुक्र की ऐसी स्थिति धन राजयोग बना रही है. यह राजयोग 5 दिसंबर को शुक्र के धनु राशि में गोचर होने तक प्रभावी रहेगा. साथ ही 3 राशि वालों को तगड़ा धन लाभ कराएगा. ....  समाचार पढ़ें
घर में इन दिशाओं में लगाएं हनुमान जी की ये तस्वीरें जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 19, 2022
सनातन धर्म में लोग घर में भगवान और देवी-देवताओं की तस्वीरें लगाते हैं. इनमें हनुमान जी की तस्वीरें काफी लगाई जाती हैं. हालांकि, हनुमान जी की तस्वीरों को लगाते समय सही दिशा का ज्ञान होना बेहद जरूरी है. वास्तु शास्त्र के हिसाब से अगर भगवानों की तस्वीरों को लगाया जाए तो घर में सुख-शांति और समृद्धि बने रहती है. ....  समाचार पढ़ें
शाम ढलने के बाद कभी न करें ये 5 काम, मिलते हैं अशुभ परिणाम जनता जनार्दन संवाददाता ,  Nov 11, 2022
आपने कई बार घर में परिवार के बड़े लोगों से ये कहते हुए सुना होगा कि शाम ढ़लने (Sun Set) के बाद फ्लां-फ्लां काम नहीं करने चाहिए. हम उनकी बात सुनते हैं लेकिन अक्सर उन्हें अंधविश्वास मानकर अनसुना कर जाते हैं. लेकिन असल में उन बातों के पीछे गहरा अर्थ छिपा होता है, जिसका उल्लंघन करने पर हमें गंभीर नुकसा ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित नीरज वर्मा ,  Nov 15, 2018
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है । ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है । और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । ....  लेख पढ़ें
रावण को शत शत नमन अमित मौर्या ,  Oct 18, 2018
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. रावण ने अपनी बहन के आन के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया और सीता को कभी भी अपने हरम में ले जाने के लिए कभी जबरजस्ती नही की वह ज्योतिष का प्रकांड विद्वान् था. उसकी लिखित "रावण संहिता" ज्योतिष विज्ञान की महान कृति है. रावण ने नृत्य और योग के मानक प्रस्तुत किये. प्रायः जो विद्वान् और पढ़े लिखे होते हैं वह कायर होते हैं और निर्णायक मौकों पर आर -पार की लड़ाई या युद्ध से बचते हैं पर रावण विद्वत्ता और साहस का अद्भुत संयोग था. वह महान विद्वान् और प्रतापी योद्धा था. वह रक्षसः आन्दोलन का प्रणेता था. इसीलिए उसे राक्षस कहा गया. हुआ यह कि उस समय इंद्र का राज्य था उसे लोग इंद्र इस लिए कहते थे क्यों कि वह इन्द्रीय हरकतें यानी कि वासना में लिप्त था . इंद्र एक आदिवासी /बनवासी ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
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