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धर्म-अध्यात्म
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जय बाबा कीनाराम जी: बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने भक्तों को दिया आर्शीवाद व आध्यात्मिक संदेश  अमिय पाण्डेय ,  Aug 31, 2019
रामगढ़ महोत्सव के अंतिम दिन पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने आशीर्वाद देकर व आशीर्वचन से अपने भक्तों को संबोधित किया.और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी स्थानीय निवासियों जनपदवासियों पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दिया जिन्होंने तीन दिवसीय इस महोत्सव को सफल बनाने में जी जान से जुटे हुए है .पीठाधीश्वर ने सभी अपने चाहने वाले भक्तो का अभिवादन स्वीकार किया इस दौरान भक्त बीच बीच में  रामगढ कीनाराम प्रांगण में जय बाबा कीनाराम, हर हर महादेव, जय बाबा ....  समाचार पढ़ें
चन्दौली: कीनाराम महोत्सव का पहला दिन, जब मिले दो संत सिद्धार्थ गौतम राम जी व योगी आदित्यनाथ महाराज  अमिय पाण्डेय ,  Aug 29, 2019
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चन्दौली में थे यहां बाबा कीनाराम की जन्मस्थली  रामगढ़ में आयोजित बाबा के 420 वे जन्मोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आये मुख्यमंत्री का विशाल जन समूह ने हर हर महादेव के नारों के साथ उनकी आगवानी की तो वही बाबा कीनाराम के अवतार के रूप में माने जाने वाले बाबा सिद्दार्थ गौतम राम जी ने उनका अंगवस्त्रम ....  समाचार पढ़ें
चन्दौली: जय बाबा कीनाराम जी! यहां देखें कीनाराम बाबा महोत्सव सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा अमिय पाण्डेय ,  Aug 21, 2019
रामगढ़ कीनाराम बाबा जन्म स्थल पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया जा रहा हैं कीनाराम महोत्सव और उनके चाहने वाले लाखों अघोर भक्तो का, देश विदेश के भक्तों का तांता लगा रहता हैं.चन्दौली जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के भी पुख्ता इंतेजाम रखें गए हैं जिससे कार्यक्रम स्थल पर आने जाने वालों के लिए कठिनाई का सामना न करना पड़े.कंट्रोल रूम सहित डीएसपी एसएचओ,एडिशनल अस्तर के अधिकारी की ड्यूटी की लिस्ट तैयार हो रहीं की कौन किस गेट पर तैनात रहेगा ....  समाचार पढ़ें
जय बाबा कीनाराम जी, अबकी बार महोत्सव में 29 से 31 अगस्त तक भव्य आयोजन की तैयारी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 14, 2019
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा कीनाराम जन्मोत्सव धूम धाम से मनाया जाएगा 29 से 31 अगस्त 2019 तक यह कार्यक्रम अबकी बार रखा गया हैं जिसमे भोजपुरी अभिनेता,नेता,बड़े पत्रकार शामिल होंगे व अपने विचारों को बाबा कीनाराम के भक्तो के बीच रखेंगे.साथ ही तीन दिवसीय सांध्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन है जिसमे भोजपुरी के गायक प्रतिभाग करेंगे.अबकी बार 420 वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा जो अघोर चतुर्दशी से 29 अगस्त से शुभारंभ होगा ....  समाचार पढ़ें
कल लग रहा है 'खंडग्रास' चंद्र ग्रहण जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 15, 2019
मंगलवार को इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. ये चंद्र ग्रहण रात के 01.32 मिनट से शुरू होगा और सुबह 04.30 मिनट तक चलेगा. इस चंद्र ग्रहण का असर भारत पर भी होगा. 9 घंटे पहले चंद्रग्रहण का सूतक लग जाएगा. ये चंद्र ग्रहण कई मायनों में खास है, क्योंकि 149 साल बाद इस प्रकार का चंद्र ग्रहण लग रहा है जो गुरु पूर्णिमा के दिन लगेगा. इससे पहले इस तरह का ग्रहण साल 1870 में लगा था ....  समाचार पढ़ें
बोलों बाबा कीनाराम की जय: जब संतों की थाली से आने लगी मछली और मदिरा की महक अमिय पाण्डेय ,  Nov 29, 2018
कहते हैं भगवान लीलाधारी होते हैं वह आज भी इस धरा पर सन्त महात्माओं के रूप में चमत्कारिक लीलाएं करके धर्म की मौजूदगी का प्रमाण देते रहे हैं।सत, रज और तम तीनों रूप में भगवान अलग-अलग स्वरूपों में भक्त की श्रद्धा को स्वीकार करते हैं। ब्रह्माण्ड में औघड़ स्वरूप में भगवान शिव की पूजा होती है और अघोराचार्य बाबा कीनाराम को उन्ही का स्वरूप माना गया है। 21 वीं सदी में बाबा कीनाराम ने कई चमत्कारि ....  समाचार पढ़ें
जब एसडीएम को आभास हुआ बाबा की आध्यात्मिक ताकत का अमिय पाण्डेय ,  Nov 20, 2018
एस.डी.एम. साहब बड़े रूतबे में आये और बिना जूता उतारे ही नाथ-बाबा के आसन पर जा बैठे। सेवकों और श्रद्धालुओं के समझाने के बाबजूद भी एसडीएम साहब ,मानने को तैयार नहीं हुए और बोले ,”अरे हटो! हम बाबा-माई बहुत देखे हैं।” इसकी जानकारी महाप्रभु को दी गई , पूज्य अघोरेश्वर ने आदेश दिया कि आपलोग पुनः एस.डी.एम.साहब से विनती करें। बार-बार विनती करने के बाबजूद भी जब कोई असर नहीं हुआ तो उनके ढ़िठाई से महाप्रभु रुष्ट हो गए। ....  समाचार पढ़ें
छिन्नमस्तिका मंदिर जहां भय पर हावी है आस्था जनता जनार्दन संवाददाता ,  Oct 14, 2018
मां के इस मंदिर को 'प्रचंडचंडिके' के रूप से भी जाना जाता है। मंदिर के चारों और कल-कल करती दामोदर और भैरवी नदी हैं। मां के इस आशियाने को ठंडक प्रदान करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान को मां का अंतिम विश्राम स्थल भी माना गया है। यहां कतार से बनी महाविद्या के मंदिर मां के रूप और रहस्य को और बढ़ा देती हैं। इन मंदिरों में तारा, षोडिषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, कमला, मतंगी और घुमावती मुख्य हैं। मंगलवार और शनिवार को रजरप्पा मंदिर में विशेष पूजा होती है। मां को बकरे की बलि जिसे स्थानीय भाषा में पाठा कहा जाता है। यह परंपरा सदियों से यहां जारी है। ....  समाचार पढ़ें
जब बाबा कीनाराम का आशीष और क्रोध बरसा था मुगल बादशाह शाहजहां पर अमिय पाण्डेय ,  Oct 12, 2018
यूं ही नहीं कहा गया है ' जो न दे राम वह दें कीनाराम'। अघोरेश्वर बाबा कीनाराम ने सुशुप्त अवस्था में पड़े अघोर परंपरा को न केवल जागृत किया बल्कि उसे सम्पूर्ण ब्रह्मांड में फैलाया। श्रद्धान्वित होकर दरबार में आने वाले भक्तों को बाबा ने खूब आशीर्वाद दिया। लेकिन जिससे भृकुटि टेढ़ी हुई वह उनके श्रापों से वंचित न रहा। उनके दिए हुए श्राप को 21वीं सदी तक राजघरानों ने झेला है। बाबा कीनाराम ने शाहजहां को आशीर्वाद तो दिया लेकिन उसकी उद्दंडता ने बाबा को क्रोधित कर दिया। बाबा ने क्रोध में आकर शाहजहां को ....  समाचार पढ़ें
सिद्धार्थ गौतम राम बाबा जी ने जनता जनार्दन को दिया आशीर्वाद अमिय पाण्डेय ,  Sep 10, 2018
रामगढ़ महोत्सव के अंतिम दिन पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने आशीर्वाद देकर व आशीर्वचन से अपने भक्तों को संबोधित किया.और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी स्थानीय निवासियों जनपदवासियों पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दिया.बाबा गौतम राम जी ने कहा कि जो भी बातें वक्ताओं द्वारा कही गयी उसको अमल में लेकर उसपर कार्य करें. ....  समाचार पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित नीरज वर्मा ,  Nov 15, 2018
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है । ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है । और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । ....  लेख पढ़ें
रावण को शत शत नमन अमित मौर्या ,  Oct 18, 2018
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. रावण ने अपनी बहन के आन के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया और सीता को कभी भी अपने हरम में ले जाने के लिए कभी जबरजस्ती नही की वह ज्योतिष का प्रकांड विद्वान् था. उसकी लिखित "रावण संहिता" ज्योतिष विज्ञान की महान कृति है. रावण ने नृत्य और योग के मानक प्रस्तुत किये. प्रायः जो विद्वान् और पढ़े लिखे होते हैं वह कायर होते हैं और निर्णायक मौकों पर आर -पार की लड़ाई या युद्ध से बचते हैं पर रावण विद्वत्ता और साहस का अद्भुत संयोग था. वह महान विद्वान् और प्रतापी योद्धा था. वह रक्षसः आन्दोलन का प्रणेता था. इसीलिए उसे राक्षस कहा गया. हुआ यह कि उस समय इंद्र का राज्य था उसे लोग इंद्र इस लिए कहते थे क्यों कि वह इन्द्रीय हरकतें यानी कि वासना में लिप्त था . इंद्र एक आदिवासी /बनवासी ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहिं कपट छल छिद्र न भावा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 11, 2017
एक तो ज्ञान का, पुरुषार्थ का मार्ग है, जिससे हम बुद्धि को निर्मल बनायें। पर तुलसीदासजी तो नन्हें बालक की तरह हैं। वे मानते हैं कि अगर बड़ा बालक हो, तो उसे अपनी गन्दगी तो धोना ही पड़ेगा, क्योंकि ब्यक्ति तो मल का ही बना है- गंदगी दूर करने के लिए पहले कपड़े को साबुन से धोएँ और बाद में स्वच्छ जल से कपड़े में लगे साबुन को धोएँ। इसी तरह से साधना और सत्कर्म से मलिनता को धोने के उपरान्त फिर साधन को भी धो डालिए। और वह भी शुद्ध जल से । ....  लेख पढ़ें
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