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धर्म-अध्यात्म
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अघोर पीठ बाबा कीनाराम स्थल में श्री सर्वेश्वरी समूह का 61वाँ स्थापना दिवस मनाया गया जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 21, 2021
श्री सर्वेश्वरी समूह का 61वाँ स्थापना दिवसप्रधान कैम्प कार्यालय, रविन्द्रपुरी कालोनी स्थित अघोर शोध एवं सेवा संस्थान ,बाबा कीनाराम स्थल स्थित पर सर्वेश्वरी समूह का 61 वाँ स्थापना दिवस अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के दिशा निर्देश श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना की। इसका उद्देश्य था मानवता और कल्याण की गतिविधियों को समाज में विस्तृत कर एक उदाहरण प्रस्तुत करना। श्री सर्वेश्वरी समूह एक सामाजिक और आध्यात्मिक ....  समाचार पढ़ें
ऐसे लोगों का साथ तुरंत छोड़ देना चाहिए नहीं तो जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 02, 2021
चाणक्य नीति कहती है कि क्रोध करने वाले व्यक्ति से दूर ही रहना चाहिए. क्रोध करने वाला व्यक्ति कभी क्रोध में आकर गलत कदम उठा सकता है. क्रोध में व्यक्ति स्वयं का तो नुकसान करता ही है, कभी कभी दूसरों को भी इस आदत के कारण हानि उठानी पड़ जाती है ....  समाचार पढ़ें
श्री कृष्ण के जन्मदिवस पर क्यों है 56 भोग लगाने की परंपरा जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 29, 2021
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. इस बार ये पर्व 30 अगस्त, सोमवार को मनाया जा रहा है. देशभर में जन्माष्टमी की धूम अभी से देखने को मिल रही है. लड्डू गोपाल के वस्त्र, गहने और पूजा के सामान ....  समाचार पढ़ें
व्रत से पहले और बाद में क्या खाना चाहिए? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 01, 2021
सावन के महीने से व्रत त्योहार की शुरुआत हो जाती है. ऐसे में कई व्रत ऐसे होते हैं जब महिलाएं पूरे दिन बिना कुछ खाए-पीए निर्जल व्रत रहती हैं. हरतालिका तीज, करवा चौथ और एकादशी के जैसे कई व्रत हैं, जिनमें निर्जला उपवास किया जाता है. इन ....  समाचार पढ़ें
भक्तों ने घर पर ही रह कर मनाया गुरु पूर्णिमा का पर्व अमिय पाण्डेय ,  Jul 24, 2021
विश्व-विख्यात अघोरपीठ "बाबा कीनाराम स्थल”, रविन्द्रपुरी में गुरू-पूर्णिमा का पर्व आश्रम में रह रहे अनुयायियों ने सादगी के साथ मनाया गया ! यूँ तो बनारस को भगवान् शिव की नगरी कहा जाता है पर इस शहर को संत-महात्माओं का शहर भी कहा जाता है ! इस शहर में  गुरूपूर्णिमा का पर्व, अ ....  समाचार पढ़ें
घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का महापर्व: बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी अमिय पाण्डेय ,  Jul 23, 2021
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई 2021 दिन शनिवार को पड़ रहा है। ऐसी विषम परिस्थितियों में गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी श्रद्धालु ,भक्तजन एवं सदस्य गण अपने- अपने स्थान पर ही स्वजनों के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए गुरु पूजन का अनुष्ठान करे। ....  समाचार पढ़ें
मोती धारण करने से होती हैं मां लक्ष्मी प्रसन्न जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 10, 2021
मोती की मान्यता सफ़ेद रत्न के रूप में की गई है. इसे धारण करके मां लक्ष्मी और शुक्र को प्रसन्न किया जा सकता है. मोती पहने से मन शांत रहता है. मानसिक तनाव में कमी आती है. जिन लोगों को किसी तरह की मानसिक समस्या है तो उन्हें सफ़ेद या क्रीम कलर की मोती अंगुली में धारण करना चाहिए. माना जाता है कि इसे धारण करने से मानसिक समस्या सामाप्त होती है. व्यक्ति का अवसाद कम हो जाता है. मोती धारण करने से मां लक्ष्मी की कृपा आप पर सदा बनी रहती है तथा आपके घर में कभी धनाभाव नहीं होता है. मोती को चांदी की अंगूठी में पहनना चाहिए. ....  समाचार पढ़ें
संकट मोचक महावीर हनुमान की शक्ति और भक्ति से कौन परिचित नहीं जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 05, 2021
पूजा के दौरान हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. मान्यता है कि ऐसा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में संपन्नता आती है. प्रसाद में भीगे चने, चूरमा और गुड़ चढ़ाना चाहिए. प्रसाद के लिए यही शुभ माने गए हैं. अंत में सरसों तेल का दीपक ....  समाचार पढ़ें
राधा-कृष्ण के विवाह को लेकर अक्सर चर्चा होती है. हुआ या नहीं हुआ? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 28, 2021
अमर प्रेम का जिक्र होते ही पहला नाम राधा-कृष्ण का लिया जाता है. मगर कृष्ण की पत्नी के तौर पर हम रुकमणि को ही जानते हैं. कहा जाता है कि राधा-कृष्ण का मेल कभी नहीं हुआ. मगर ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार यदुवंशियों के कुलगुरु गर्ग ऋषि द्वारा ....  समाचार पढ़ें
गंगा दशहरा से बृहस्पति हो रहे हैं वक्री, आगामी 120 दिन रहेंगे विशेष जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 13, 2021
गुरुदेव 14 सितंबर 2021 से 20 नवंबर तक मकर राशि में शनिदेव के साथ रहेंगे. यह समय धर्म अध्यात्म त्याग और सेवाभावना को बल देने वाला रहेगा. शनि और गुरु की ग्रहचाल से मेष, वृष, मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि लाभांवित होंगी. कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि वालों को सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने के संकेत हैं. शनि और गुरु के सकारात्मक प्रभाव बढ़ाने के लिए जाप अनुष्ठान पर जोर देना हितकर होगा. ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित नीरज वर्मा ,  Nov 15, 2018
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है । ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है । और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । ....  लेख पढ़ें
रावण को शत शत नमन अमित मौर्या ,  Oct 18, 2018
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. रावण ने अपनी बहन के आन के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया और सीता को कभी भी अपने हरम में ले जाने के लिए कभी जबरजस्ती नही की वह ज्योतिष का प्रकांड विद्वान् था. उसकी लिखित "रावण संहिता" ज्योतिष विज्ञान की महान कृति है. रावण ने नृत्य और योग के मानक प्रस्तुत किये. प्रायः जो विद्वान् और पढ़े लिखे होते हैं वह कायर होते हैं और निर्णायक मौकों पर आर -पार की लड़ाई या युद्ध से बचते हैं पर रावण विद्वत्ता और साहस का अद्भुत संयोग था. वह महान विद्वान् और प्रतापी योद्धा था. वह रक्षसः आन्दोलन का प्रणेता था. इसीलिए उसे राक्षस कहा गया. हुआ यह कि उस समय इंद्र का राज्य था उसे लोग इंद्र इस लिए कहते थे क्यों कि वह इन्द्रीय हरकतें यानी कि वासना में लिप्त था . इंद्र एक आदिवासी /बनवासी ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
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