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धर्म-अध्यात्म
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आखिर क्यों जरूरी है पूजा में शंख बजाना? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 10, 2022
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में शंख बजाना काफी जरूरी माना जाता है. पूजा-पाठ के साथ हवन, अनुष्ठान, विवाह, गृह-प्रवेश कई शुभ कार्यों के दौरान शंख बजाया जाता है. शंख को यश, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना गया है. इसका इतना महत्व है कि शंख बजाए बिना पूजा अधूरी मानी जाता है. हालांकि, लोगों को यह नहीं पता होता कि शंख को बजाने के कुछ नियम भी होते हैं तो आइए जानते हैं कि शंख बजाने से लेकर इसको रखने के क्या नियम होते हैं. ....  समाचार पढ़ें
इस धातु से बने शिवलिंग की नियमित करें पूजा, कोसों दूर भाग जाएगी गरीबी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 03, 2022
ग्रंथों के अनुसार स्फटिक के शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है. हीरे से बने हुए शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति की उम्र लंबी होती है. नीलम से बने शिवलिंग का अभिषेक करने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.अगर आप रोगों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो मोती के शिवलिंग की पूजा करें ....  समाचार पढ़ें
9 दिन बाद इन राशि वालों के जीवन में होगा खुशियों का आगमन जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 28, 2022
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी ग्रह की चाल का शुभ और अशुभ प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है. जहां ऊपर बताई राशियां शुभ लाभ प्राप्त करेंगी. वहीं, तुला, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए ये समय थोड़ा कष्टकारी साबित होगा. इनका जीवनसाथी के साथ चकराव हो सकता है. संबंधों में खटास की संभावना है ....  समाचार पढ़ें
जय बाबा कीनाराम: गुरु पूर्णिमा के दिन दो वर्षों के बाद मिला भक्तों को अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का दर्शन अमिय पाण्डेय ,  Jul 13, 2022
भक्तों के नाम अपने संदेश में अघोराचार्य महाराजश्री ने अपने संदेश में कहा कि "समाज आज विकट परिस्थितियों से गुज़र रहा है, ऐसे में सर्वत्र विश्वबंधुत्व की भावना ज़रुरत है । आपसी भाई चारे को बरक़रार रखने के लिये हमें आपस में प्रेम की भावना विकसित करनी होगी । अघोराचार्य न कहा कि वसुधैव कुटुंकम की भावना ....  समाचार पढ़ें
स्नान करते समय पानी में मिला लें ये छोटी-सी चीजें जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 12, 2022
ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति के आने वाले भविष्य के बारे में पहले से ही जाना जा सकता है. साथ ही, अनचाही घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है. अगर व्यक्ति के जीवन में समस्याएं खत्म होने ....  समाचार पढ़ें
4 महीने के लिए सोने चले श्री हरि, यह समय चातुर्मास कहलाता है जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 10, 2022
भगवान श्रीहरि देवशयनी एकादशी के दिन सोने चले जाते हैं. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 10 जुलाई 2022 से 4 मास के लिए शयन के लिए चले जाते हैं. चार माह तक सोने के बाद भगवान देवोत्थान एकादशी अर्थात 4 नवंबर 2022 को जागेंगे. माना जाता है कि इस अवधि में भगवान सो रहे हैं ....  समाचार पढ़ें
मां काली? क्‍या वाकई में चढ़ता है उन्‍हें मांस-मछली-मदिरा का चढ़ावा! जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 07, 2022
मां काली के पैरों के नीचे शिव जी का रूप सबसे ज्‍यादा प्रचलित है. रक्‍तबीज राक्षस का वध करने के लिए जब मां पार्वती ने मां काली का रूप रखा तो युद्ध के दौरान मां काली ने रक्‍तबीज का वध कर दिया ....  समाचार पढ़ें
करोड़पति बनने के लिए मेष राशि के जातक बस कर लें ये कार्य जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 10, 2022
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर राशि का अपना स्वामी ग्रह होता है. और अगर इस ग्रह को मजबूत रखा जाए, तो व्यक्ति को हर कार्य में सफलता हासिल होती है. आज हम बात कर रहे हैं, सबसे पहली राशि यानी की मेष राशि के बारे में. इसका प्रतीक मेढ़ा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नक्षत्रों की शुरुआत भी मेष राशि से ही होती है. बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों का नाम चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ से आरंभ होता है, उन जातकों की राशि मेष होती है. ....  समाचार पढ़ें
शनिवार के दिन जन्मे बच्चे होते हैं अलग, जानें इनके स्वभाव की कुछ खास बातें जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 04, 2022
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव और व्यक्तित्व अलग होता है. ये उसकी राशि, जन्म तिथि और जन्म दिन पर निर्भर करता है. ज्योतिष शास्त्र में हर दिन का अपना अलग महत्व होता है. और उसी के आधार पर जातकों का स्वभाव निर्धारित होता है. सप्ताह के जिस दिन बच्चे का जन्म होता है, उसमें दिन के हिसाब से गुण देखे जा सकते हैं. ....  समाचार पढ़ें
इन राशि के लोगों के लिए जून माह की शुरुआत होने वाली है धमाकेदार जनता जनार्दन संवाददाता ,  May 31, 2022
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर राशि का स्वामी ग्रह होता है. ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है. किसी भी ग्रह का राशि परिवर्तन या गोचर का असर व्यक्ति के जीवन पर आसानी से देखा जा सकता है. 1 जून 2022 का दिन कुछ राशि के जातकों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है. इन पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. ऐसे लोगों का सोया भाग्य भी जाग जाता है. आइए जानें इन 4 राशि के जातकों के बारे में. ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित नीरज वर्मा ,  Nov 15, 2018
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है । ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है । और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । ....  लेख पढ़ें
रावण को शत शत नमन अमित मौर्या ,  Oct 18, 2018
रावण उत्तम कुल का था. वह वह पुलत्स्कर का नाती और विशेश्रवा का बेटा था. पुलत्स्कर ने विश्व संस्कृत को प्रथम रंगमंच दिया था और ग्रीक नाट्य साहित्य में उसका उल्लेख "पुलित्ज़र" के नाम से मिलता है. रावण ने अपनी बहन के आन के लिए अपना सबकुछ लुटा दिया और सीता को कभी भी अपने हरम में ले जाने के लिए कभी जबरजस्ती नही की वह ज्योतिष का प्रकांड विद्वान् था. उसकी लिखित "रावण संहिता" ज्योतिष विज्ञान की महान कृति है. रावण ने नृत्य और योग के मानक प्रस्तुत किये. प्रायः जो विद्वान् और पढ़े लिखे होते हैं वह कायर होते हैं और निर्णायक मौकों पर आर -पार की लड़ाई या युद्ध से बचते हैं पर रावण विद्वत्ता और साहस का अद्भुत संयोग था. वह महान विद्वान् और प्रतापी योद्धा था. वह रक्षसः आन्दोलन का प्रणेता था. इसीलिए उसे राक्षस कहा गया. हुआ यह कि उस समय इंद्र का राज्य था उसे लोग इंद्र इस लिए कहते थे क्यों कि वह इन्द्रीय हरकतें यानी कि वासना में लिप्त था . इंद्र एक आदिवासी /बनवासी ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
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