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मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित

मैलानी आश्रम अघोरियों के लिए शक्ति प्रतिष्ठित
दुनिया में अध्यात्म की चर्चा हो अघोर परम्परा का ज़िक़्र न हो,तो चर्चा को अधूरी मान लिया जाता है और हो भी क्यों न,जब, सवाल अध्यात्म के शिखर का हो। क्योंकि दुनिया का पहला अघोरी होने का ख़िताब सृष्टि के उदय से ही भगवान शिव के पास सुरक्षित है.

भगवान शिव से उदगमित और लंबे समय तक सुसुप्तावस्था में रहने के बाद पुनर्जागृत अघोरी परम्परा का (वाराणसी स्थित) पूरी दुनिया में विश्वविख्यात तीर्थ स्थान बाबा कीनाराम स्थल,क्रीं-कुण्ड और वर्तमान में पूरी दुनिया में अघोर परम्परा के आराध्य-ईष्ट-मुखिया और 'बाबा कीनाराम स्थल,क्रीं-कुण्ड' के पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी यानि स्वयं देवादिदेव महादेव को भला कौन नहीं जानता! वो स्थान और चलते-फिरते शिव वो गौतम राम,जिनके दर्शन के लिए बड़े-बड़े सिद्ध महात्मा असीम इच्छा रखते हैं. 
 
शक्ति को सदैव सुशोभित करने वाले महादेव की कहानियों का भंडार शास्त्रों में पटा पड़ा है। और आज भी अघोर परम्परा के अधिष्ठाता भगवान अघोराचार्य महाराजश्री गौतम राम जी के ज़रिए उन कहानियों को चरितार्थ करने का दौर जारी है.कहते हैं कि शिव अपने कदम जहां रख दें,शक्ति अपने आप जागृत अवस्था में आ जाती है.हाँ, कुछ औपचारिकताओं के साथ.
 
हाल ही ऐसा ही एक वाक़या हुआ है मैलानी दिल्ली अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी यानि स्वयं देवादिदेव महादेव द्वारा स्थापित अघोरियों और सही मायनों में ब्रह्मनिष्ठों का एक महान गंतव्य 
यहां कुछ साल पूर्व एक आश्रम निर्मित हुआ। भीषण जंगलों से सटा,शांति को समेटे,ये आश्रम कोई आम आश्रम नहीं है।
 
ये आश्रम स्वयं महादेव द्वारा स्थापित है दिल्ली से क़रीब 450 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर से सटे दुधवा टाईगर प्रोजेक्ट के पास लखीमपुर जिले के मैलानी रेलवे स्टेशन के नज़दीक नारंग गांव में,कुछ साल पहले ही बना, ये आश्रम.दुनिया भर के अघोर और तंत्र परम्परा से जुड़े साधकों और भक्तों को अनायास ही अपनी ओर खींचता है । 
 
मग़र साल 2018 की दीपावली (7 नवम्बर) को यहाँ,स्वयं महादेव द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित माँ की प्रतिमा के ज़रिए शक्ति स्वतः यहां विराजमान हुई हैं। मैलानी में ,आम-जनमानस,अभी तक साक्षात शिव अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का प्रत्यक्ष दर्शन पाता था,मग़र अब शिव के साथ शक्ति की प्रत्यक्ष उपस्थिति का आभास भी उच्चकोटि के साधकों को सुलभ हो सकता है।
 
ये सब बहुत कुछ आपकी आंतरिक पवित्रता व अध्यात्मिक सामर्थ्य पर निर्भर है।ये स्थान आने वाले दिनों में क्रमशः एक महान शक्तिपीठ के रूप में स्थापित होने की संभावनाओं को दरकिनार नहीं करता है। और न ही आम जनमानस की लौकिक और आध्यात्मिक जगत की पारलौकिक लालसाओं की पूर्ति से इनकार करेगा । 

स्वयं महादेव द्वारा शक्ति की स्थापना वाला ये महान आध्यात्मिक केंद्र अदभुत है । यकीनन अदभुत है ।
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