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सावन सोमवार के एक दिन पहले ही भगवान शिव का अभिषेक करने को उमड़ी आस्था

जनता जनार्दन संवाददाता , Jul 29, 2018, 19:07 pm IST
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सावन सोमवार के एक दिन पहले ही भगवान शिव का अभिषेक करने को उमड़ी आस्था

लखनऊ: श्रावण मास में भगवान शंकर का नाम लेने मात्र से सारे दु:ख दूर हो जाते हैं। उनकी महिमा का बखान कर रुद्राभिषेक करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान शिव की आराधना के इस महीने के पहले सोमवार को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर सुख समृद्धि की कामना करती हैं। मंदिरों में विशेष इंतजाम किए गए हैं।

जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की आज से भी भीड़ उमड़ने लगी है। कहा जाता है कि भोले समस्त व्याधिनाशक है। ग्रहजनित दोष भी मिटते हैं। विद्वानों का मत है कि जैसी व्याधि वैसा अभिषेक रोगनाशक और गृह शांति करने वाला है।  

जैसी व्याधि वैसा अभिषेक

  • शत्रु प्रभाव व प्रेत बाधा दूर करने के लिए नारियल के पानी या सरसों के तेल से अभिषेक करें।
  • कानूनी अड़चनों के लिए तिल्ली के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करें।        
  • विवाह बाधा दूर करने के लिए दूध में हल्दी मिलाकर शिव का अभिषेक करना उत्तम होगा।
  • विद्या प्राप्ति के लिए दूध मिले शहद से अभिषेक करना उत्तम होगा।
  • यदि कारोबार में अड़चनें आ रहीं हों तो घी और इत्र या सुगंधित तेल से शिव का अभिषेक करना चाहिए। 
  • असाध्य रोग समाप्त करने के लिए अमर बेल, गिलोय व अनेक औषधियों से अभिषेक करें। 
  • यदि कर्ज अधिक हो या उधार दिया धन वापस न आए तो दूब के रस से अभिषेक करें।
  • पारिवारिक कलह व अचानक नुकसान से बचने के लिए दही से अभिषेक करें।
  • संतान सुख के लिए गुड़ मिले दूध या कुमकुम के जल व धतूरे से शिवजी का अभिषेक करें।
  • वाहन सुख के लिए शिवलिंग को गुलाब के फूलों से ढक कर पूजन करें।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए शर्करा या गन्ने के रस से पूजन करें।
  • अभीष्ट सिद्धि के लिए शहद से पूजन फलदायी रहेगा।
काशी में बाबा विश्वनाथ, राजधानी लखनऊ में मनकामेश्वर, गोखपुर में बाबा गोरखनाथ, कानपुर में आनंदेश्वर और नोएडा में गढ़मुक्तेश्वर समेत यूपी के सभी प्रमुख मंदिरों में तीर्थ जैसा माहौल है। काशी, मथुरा और अयोध्या की छटा ही निराली है। यहां मंदिर मंदिर हर-हर बम-बम की गूंज उठ रही है। यही नहीं सड़कों पर चल रही कांवड़ यात्रा से पूरे प्रदेश का माहौल शिवमय हो चुका है। द्वादस शिवलिंगों की तर्ज पर बने शिवालयों में उसी स्वभाव प्रभाव के अनुरूप पूजा की तैयारियां हैं। मसलन लखनऊ के महाकाल मंदिर में भोर उज्जैन की तर्ज पर महाकाल की भस्म आरती होगी।
 

राजधानी में मंदिर-मंदिर हर-हर, बम-बम

यूपी की राजधानी लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर के कपाट भी महंत देव्यागिरि द्वारा की जाने वाली विशेष महाआरती के साथ ही खोल दिए जाएंगे। यहां भोलेनाथ के अभिषेक के लिए मुफ्त गंगाजल का वितरण की व्यवस्था है। कोनेश्वर मंदिर के साथ ही सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी अभिषेक को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, बंगलाबाजार के श्री रामजानकी मंदिर, इंद्रेश्वर मंदिर, मौनी बाबा मंदिर व गुलाचिन मंदिर के अलावा सिद्धेश्वर मंदिर, सैसोवीर मंदिर, गोमतेश्वर मंदिर व विन्ध्याचल मंदिर के अलावा शहर के सभी शिव मंदिर पूजन के लिए तैयार हैं। स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर, इंदिरानगर भूतनाथ मंदिर, महानगर के सिद्धेश्वर मंदिर, राजाजीपुरम्, सआदतगंज, आलमबाग, चिनहट के अलावा बख्शी का तलाब के मां चंद्रिका देवी मंदिर के चंद्रकेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मंदिर, इटौंजा के रत्नेश्वर महादेव मंदिर, टीकेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही सभी छोटे बड़े पर तैयारियां पूरी हो गई है। मंदिरों को झालरों से सजाया गया है। यही स्थिति यूपी के अन्य शहरों गढ़मुक्तेश्ववर से लेकर काशी तक है। सभी जगह मंदिर जगमग हो रहे हैं।

व्रती महिलाएं ऐसे करें शिव पूजन 

वैसे तो भगवान शिव की पूजा कैसे भी करिए वह प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन विधि विधान से पूजन के नियम भी हैं। इसके तहत सुबह भोले के पूजन के लिए  भगवान को फल, पुष्प, काले तिल, बेलपत्र, गंगाजल, शहद, घी, गौदुग्ध, दही, शर्करा, वस्त्र, मिष्ठान, मौसमी फल, भांग, धस्तूरा फल, गन्ने का रस, बेल और बेर अर्पण कर पंचाक्षर जप से आराधना करनी चाहिए। देशी घी व कर्पूर से आरती उतार कर पूजन का समापन उत्तम होता है। 

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