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राज्यसभा चुनाव 2018: खाली हुई 59 सीटों में से 33 निर्विरोध चुने गए, 25 पर हो रहा चुनाव, खास निगाहें यूपी पर

राज्यसभा चुनाव 2018: खाली हुई 59 सीटों में से 33 निर्विरोध चुने गए, 25 पर हो रहा चुनाव, खास निगाहें यूपी पर नई दिल्लीः अप्रैल में संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा की 59 सीटें खाली हो रही हैं, जिसकी वजह से 10 राज्यों के लिए 59 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिसमें एक उपचुनाव की सीट भी शामिल है. इनमें से आज महज 25 सीटों के लिए चुनाव होंगे, 1 उपचुनाव की सीट पर भी चुनाव हो रहा है. बाकि बचे 33 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है.

बीजेपी को इस राज्यसभा चुनाव से काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि यह राज्यसभा में दर्जन भर सीटें लाकर राज्यसभा में बड़ी पार्टी बनने की फिराक में हैं, हालांकि, राज्यसभा में 245 सीटें बहुमत के लिए चाहिए होती हैं, जिससे बीजेपी अभी भी काफी दूर है.

आज जिन राज्‍यों में चुनाव होने हैं उनमें उत्‍तर-प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड,  केरल, छत्‍तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल है. हालांकि, राज्यसभा चुनाव में सबकी नजरें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 10 सीटें हैं और यहां एक सीट पर जबरदस्त लड़ाई देखने को मिल रही है. बहरहाल, राज्यसभा चुनाव की वोटिंग सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी.
 
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से कुछ घंटे पहले सपा और बसपा के एक-एक विधायकों का वोट कटने से लड़ाई और कांटे की हो गई है. अब भी दसवीं सीट के लिए सभी पार्टियां जोड़-तोड़ कर रही हैं. एकजुट हुए विपक्ष की ताकत दो वोट कटने से कुछ कम हो गई है. लेकिन सीटों का गणित अभी भी कुछ ऐसा है कि किसी की भी जीत आसान नजर नहीं आ रही. किसी भी दल के पास पूरे नंबर यानि 37 वोट नहीं हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बसपा के विधायक मुख्तार अंसारी के वोट देने पर रोक लगा दी है. उधर सपा को भी एक झटका लग गया है. जेल में बंद सपा विधायक हरिओम यादव को जेल प्रशासन ने जाने से मना कर दिया है. इससे 19 विधायकों वाली बीएसपी घटकर 18 पर आ गई है.

सपा की बात करें तो उनके पास कुल 47 विधायक हैं. इनमें से नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल का बीजेपी के पक्ष में मतदान करना तय माना जा रहा है. हरिओम यादव के वोट न दे पाने की सूरत में यह संख्या 45 हो जाएगी. सपा की ओर से जया बच्चन मैदान में हैं. इसमें से सपा की एक सीट सुरक्षित करने के लिए 37 वोट निकाल दें तो बचे 8 वोट. सपा अपने प्रत्याशी की जीत के बाद ही मायावती के लिए वोटों का जुगाड़ लगाएगी. ऐसे में सपा के बचे हुए 8 वोट, बसपा के 18, कांग्रेस के 7 वोट और आरएलडी का एक वोट जोड़ दें तो कुल होते हैं 34 वोट.

इसमें दो निर्दलीय विधायक जो सपा के खेमे में जा सकते हैं वे हैं राजा भैया और उनके करीबी विनोद सरोज. इस तरह विपक्ष पूरी ताकत लगा भी ले तो जादुई 37 से एक वोट कम यानि 36 वोट ही रह जा रहे. लेकिन सवाल ये है कि राजा भैया मायावती के प्रत्याशी के लिए वोट करेंगे? क्योंकि मायावती से राजा भैया की अदावत जगजाहिर है. अगर राजा भैया ने दुश्मनी निभा दी तो बीएसपी की मुश्किल और बढ़ सकती है. लेकिन शिवपाल यादव के साथ आ जाने से इसकी आशंका काफी कम हो गई है.

वहीं बीजेपी की बात करें तो जादुई नंबर उनके पास भी नहीं है. बीजेपी के पास विधानसभा में कुल 311 विधायक हैं. इसके अलावा अपना दल (एस) के 9 विधायक, कल तक बागी तेवर दिखाने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के चार विधायक साथ हैं. सहयोगी दलों को मिला लें तो ये नंबर 324 तक पहुंच जाता है.

इतने भारी-भरकम नंबर के साथ बीजेपी 8 सीट तो बेहद आसानी से जीत रही है. लेकिन नौवीं सीट के लिए उसके पास बचते हैं 28 वोट. बीजेपी को नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल, अमरमणि के बेटे अमनमणि और भदोही से विधायक विजय मिश्रा का वोट मिलने की बात कही जा रही है. ये तीन वोट मिलाकर बीजेपी के पास कुल वोट हो जाते हैं 31 जो जादुई नंबर से 6 कम है.

इस तरह पूरी ताकत लगाने के बाद भी विपक्ष जहां 36 वोट तक ही पहुंच पा रहा, वहीं बीजेपी 31 तक पहुंच रही है. सारी लड़ाई इन्हीं नंबरों पर है. विपक्ष की कोशिश है कि किसी भी तरह से उसके एक वोट का जुगाड़ हो जाए. वहीं बीजेपी 6 वोट जुटाने की ताकत लगा रही.

अब जीत का फैसला क्रॉस वोटिंग से होगा. यानि बागी विधायकों के वोट काफी मायने रखेंगे. बीएसपी प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर की जीत का सारा दारोमदार अब विपक्ष के ऊपर निर्भर करता है. सपा, कांग्रेस और आरएलडी ने बीएसपी उम्मीदवार को राज्यसभा चुनाव में समर्थन देने का ऐलान किया है. राजा भैया का रुख भी काफी मायने रखता है.

यूपी की 10 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. सूबे के मौजूदा विधायकों की संख्या के लिहाज से बीजेपी के 8 और सपा के एक सदस्य की जीत तय मानी जा रही. बीजेपी के 9वें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल और बीएसपी के एकलौते प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर के बीच कांटे का मुकाबला है.

राज्यसभा चुनाव की 10 अहम बातें

  1.     उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए वोटिंग होगी. इनमें से बीजेपी के 8 उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है, वहीं सपा की एक सीट पक्की बताई जा रही है, मगर दसवीं सीट पर भाजपा और सपा समर्थित बसपा उम्मीदवार में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव काफी अहम हो गया है.
  2.     राज्यसभा चुनाव से कुछ समय पहले अपने वोट को पक्की करने के लिए समादवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने डिनर पर अपने विधायकों को बुलाया. इस डिनर मीटिंग में चाचा शिवपाल सिंह भी शामिल हुए. सपा दस में से एक सीट पर अपनी जीत को लेकर काफी सुनिश्चित दिख रही है. मगर एक भी बसपा को दिया वादा निभाने के बाद अगर उनकी एक भी सीट इधर-उधर होती है, तो मामला बिगड़ सकता है.
  3.     उत्तर प्रदेश में बीजेपी के कोटे में 8 सीट पक्की है. मगर उसके कुछ वोट एक्स्ट्रा बच जा रहे हैं, जिसकी वजह से उसने एक निर्दलयी उम्मीदवार अनिल अग्रवाल को अपना समर्थन देकर इस चुनाव को और भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया है.  एक राज्‍यसभा सीट पर जीत के लिए औसत 37 विधायकों के वोट की जरूरत है. इस लिहाज से देखा जाए तो यूपी की आठ सीटों पर वोट करने के बाद बीजेपी के पास 8 विधायकों के अतिरिक्त मत बच रहे हैं और उसे जीत के लिए सिर्फ नौ और मतों की जरूरत होगी. वहीं बसपा के पास 19 विधायक हैं, और बसपा के 19, सपा के 10, कांग्रेस के 7 और रालोद के 1 वोट को मिलाकर कुल 37 हो रहे हैं. बसपा को अगर ये सभी वोट कर देते हैं तो लगभग यह जीत के बराबर होगा, मगर बीजेपी इनमें से तोड़ने में कामयाब हो जाती है, तो फिर यह असंभव हो जाएगा.
  4.     बीजेपी समर्थित अनिल अग्रवाल के सामने सपा समर्थित बसपा के उम्मीदवार अंबेडकर हैं. मगर बीजेपी जिस तरह से समीकरण को साधने में जुटी है, अगर वह सफल हो जाती है, तो फिर बसपा के लिए मुसीबत बन जाएगी. हालांकि, बसपा, सपा के समर्थन से अभी भी कॉन्फिडेंट नजर आ रही है. आज होने वाले राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के आठ केंडिडेट में उत्तर प्रदेश से ही वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल हैं. वहीं सपा की ओर से जया बच्चन को टिकट दिया गया है और बसपा की ओर से भीम राव अंबेडकर को. लेकिन प्रतिष्ठा की लड़ाई तो भाजपा और बसपा-सपा में ही है.
  5.     पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने चार उम्मीदवारों को मैदान में खड़ा किया है, वहीं कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को उतारा है. कांग्रेस और टीएमसी की जीत पक्की नजर आ रही है, मगर लेफ्ट अभी भी किसी चमत्कार के उम्मीद में है. यहां जरूरी वोटों की संख्या 50 है और टीएमसी के पास पर्याप्त है.
  6.     झारखंड राज्यसभा चुनाव में दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. बीजेपी ने अपने दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने एक. कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा की 19 वोटों के समर्थन से जीत की उम्मीद कर रही है, वहीं, भाजपा किसी तरह से दोनों को अपने खाते में करने की जुगत में है. बता दें कि यहां जरूरी वोटों की संख्या 28 है.
  7.     उत्तर प्रदेश की तरह ही कर्नाटक में राज्यसभा का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि यहां की चार सीटों के लिए 5 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं. कर्नाटक राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से तीन कैंडिडेट हैं, तो वहीं भाजपा की तरफ से एक हैं और जनता दल सेक्यूलर की तरफ से एक.
  8.     छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी के पास कांग्रेस को हराने के लिए पर्याप्त वोट है. मगर कांग्रेस को जीत के लिए 7 वोटों की और दरकार होगी. बता दें कि यहां जरूरी वोटों की संख्या 46 है, जबकि बीजेपी के पास 49 और कांग्रेस के पास 39 हैं.
  9.     तेलंगाना के पास राज्यसभा की 3 सीटें हैं. यहां टीआरएस के पास कम से कम 2 सीटें जीतने के लिए पर्याप्त वोट हैं. हालांकि, ओवैसी की पार्टी के सपोर्ट से यह तीसरी सीट भी जीतने की प्रबल दावेदार दिख रही है. कांग्रेस ने अपने एक उम्मीदवार को उतारा है.
  10.     केरल में एक सीट के लिए उपचुनाव होगा. एलडीएफ गठबंधन कीज जीत लभगभग तय मानी जा रही है. हालांकि, कांग्रेस गठबंधन ने भी अपने उम्मीदवार को उतारा है.
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