नर्मदा किनारे छह करोड़ पौधारोपणः 'अनिल दवे' के सपनों को आकार देने का मौका!

जनता जनार्दन डेस्क , Jun 05, 2017, 14:15 pm IST
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नर्मदा किनारे छह करोड़ पौधारोपणः 'अनिल दवे' के सपनों को आकार देने का मौका! भोपालः मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के दोनों तटों पर दो जुलाई को छह करोड़ से ज्यादा पौधे लगाने का सरकार ने निर्णय लिया है, मगर सरकार के पास छह जुलाई को यह कार्यक्रम करके पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे के सपनों को आकार देने का मौका है, क्योंकि दवे का छह जुलाई को जन्मदिन है। सत्ता और संगठन से जुड़े लोग भी दबे स्वर में पौधारोपण की तारीख में बदलाव का सुझाव दे रहे हैं।

राज्य में नर्मदा नदी को अविरल और प्रदूषण मुक्त करने के मकसद से 11 दिसंबर से 15 मई तक की अवधि में नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के जरिए लोगों में यह भाव जगाने की कोशिश की गई कि प्रदूषण और नदी में गंदगी बढ़ने से अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।

नर्मदा को बचाने के लिए जहां एक तरफ गंदे पानी को रोकने की योजना बनी वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नदी के दोनों तटों पर लगभग 3334 किलोमीटर क्षेत्र में दो जुलाई को छह करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाने का ऐलान किया। पौधारोपण इसलिए, क्योंकि नर्मदा किसी ग्लेशियर से नहीं, बल्कि पेड़ों की जड़ों से रिसने वाले पानी से प्रवाहित होती है।

नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा अभियान के खत्म होते और पौधारोपण की चल रही तैयारियों के बीच प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे का 18 मई की सुबह निधन हो गया। दवे की पहचान राजनेता से पहले नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए अभियान चलाने वाले के तौर पर रही है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए उन्होंने एक गैर सरकारी संगठन नर्मदा समग्र बनाया। इसके जरिए नर्मदा नदी के लिए काफी काम किया गया। इस बात को तमाम नेताओं ने दवे को श्रद्धांजलि देते हुए भी स्वीकारा और कहा कि वे पर्यावरण के जानकार और नर्मदा के हितैषी रहे।

राज्य सरकार दो जुलाई को नर्मदा नदी के दोनों तटों पर पौधे रोपने के अभियान की तैयारियों में जुटी है। दवे से जुड़े लोगों को लगता है कि अगर यह रोपण छह जुलाई को हो तो बेहतर रहेगा, क्योंकि इस दिन दवे का जन्मदिन जो है। दवे ने अपनी वसीयत में भी लिखा है, “मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रशिक्षण इत्यादि जैसे विषय कोई भी न चलाए, जो मेरी स्मृति में कुछ करना चाहते हैं वे कृपया वृक्षों को लगाने और उन्हें संरक्षित कर रक्षा करने का कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा। वैसे भी नदी-जलाशयों के संरक्षण में अपनी सामथ्र्य अनुसार अधिकतम सहयोग भी प्रदान किए जा सकते हैं, ऐसा करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे।”

दवे केा श्रद्धांजलि देते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा था कि दवे के जन्मदिन पर छह जुलाई को देश और प्रदेश में अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं। नदियों के संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक कार्य ही स्वर्गीय दवे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

नर्मदा सेवा यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले संगठन जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पांडे से पौधरोपण का कार्यक्रम दो जुलाई को ही करने के संदर्भ पूछा गया तो उन्होंने माना कि दो जुलाई कोई खास तिथि के चलते तय नहीं की गई है, सिर्फ इसलिए तय की गई है, क्योंकि वृक्षारोपण मानसून आने के 15 दिन बाद करना अच्छा होता है। मानसून 15 जून के आसपास आता है, इसलिए दो जुलाई तारीख तय की है। जहां तक अनिल दवे के जन्मदिन की बात है तो दवे ने अपनी वसीयत में अपने नाम का इस्तेमाल न करने की बात कही है।

वहीं सूत्रों का कहना है कि पौधारोपण की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुई बैठक में भी इस बात का सुझाव दिया गया कि अगर पौधारोपण के कार्यक्रम को छह जुलाई को कर दिया जाए तो बेहतर रहेगा, मगर चौहान की ओर से कोई जवाब नहीं आया।

कांग्रेस के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि दवे विरोधी दल के रहे हैं, मगर उनके पर्यावरण प्रेमी और नर्मदा नदी हितैषी होना स्वीकारने में कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए उनके जन्मदिन पर पौधारोपण हो तो यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी, मगर शिवराज सिंह चौहान ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि उनकी मंशा नर्मदा या पौधारोपण नहीं है, बल्कि राजनीति है। उन्होंने यात्रा इसीलिए की और अब पौधारोपण का अभियान चला रहे हैं। छह जुलाई को पौधारोपण होने से चौहान को लगता है कि उनका व्यक्तिगत प्रचार कम हो जाएगा।

जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय संयोजक पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम का कहना है, “दो जुलाई को होने वाला पौधारोपण कार्यक्रम शिवराज का प्रोपोगेंडा और स्वयं के प्रचार का हिस्सा है। जबकि वास्तविकता यह है कि शिवराज के शासन काल में पौधारोपण पर सबसे ज्यादा राशि खर्च की गई, मगर पेड़ कहीं नहीं दिखे। यही कुछ दो जुलाई को होने वाला है। उनके काल में नए पौधे लगना दूर वर्तमान के जंगल ही बचे रहें तो बड़ी उपलब्धि होगा।

वैसे पौधारोपण की तारीख करीब आने में वक्त है और उसमें बदलाव लाना भी कठिन नहीं है, मगर देखने वाली बात यह होगी कि पर्यावरण प्रेमी और नर्मदा संरक्षण के अभियान के अगुआ रहे दवे के जन्मदिन पर पौधारोपण होता है या तय तारीख दो जुलाई को।
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