रानी मुखर्जी: दमदार अभिनय से बनी बॉलीवुड की 'रानी'

रानी मुखर्जी: दमदार अभिनय से बनी बॉलीवुड की 'रानी' नई दिल्ली: बॉलीवुड की रानी कही जाने वाली अभिनेत्री रानी मुखर्जी हिंदी फिल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। रानी साल 2005 में बॉलीवुड की शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में शामिल अकेली महिला थीं।

रानी अकेली ऐसी अभिनेत्री हैं, जिन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार में तीन साल तक लगातार (2004-2006) बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री घोषित किया गया।

कोलकता के एक बंगाली परिवार में 21 मार्च, 1978 को जन्मीं रानी के पिता राम मुखर्जी हिंदी और बांग्ला फिल्मों के निर्देशक हैं, और उनकी मां कृष्णा मुखर्जी एक प्रसिद्ध पाश्र्व गायिका रह चुकी हैं। रानी के बड़े भाई राजा मुखर्जी भी फिल्म निर्देशक हैं। खंडाला गर्ल के नाम से मशहूर रानी 21 मार्च 2016 अपना 38वां जन्मदिन मनाएंगी।

फिल्मी परिवार से ताल्लकु रखने के बाद भी रानी का फिल्मी सफर इतना आसान नहीं रहा। रानी के फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में अपने पिता की बांग्ला फिल्म ‘बियेर फूल’ में एक छोटे से किरदार से हुई। इसके बाद रानी के पिता के मित्र निर्माता सलीम अख्तर ने रानी को फिल्म ‘आ गले लग जा’ में एक छोटा सा किरदार करने को कहा, जिसे रानी के पिता ने ठुकरा दिया।

छोटे-मोटे किरदारों की पेशकश के बाद रानी को वर्ष 1997 में फिल्म ‘राजा की आएगी’ बारात में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका मिली। 1998 में आई फिल्म ‘गुलाम’ ने रानी को बतौर अभिनेत्री काफी प्रसिद्धि दिलाई।

मध्यम कद और सांवले रंग की रानी मुखर्जी ने बॉलीवुड में जब दस्तक दी, तो उनकी कद-काठी को देखकर हर किसी ने उन्हें संशय की निगाह से देखा। लेकिन सामान्य कद वाली इस अभिनेत्री ने वर्ष 1998 की फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ में अपने अभिनय कौशल के बल पर फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा का कोई कद या पैमाना नहीं होता।

रानी ने वर्ष 2000 में तमिल और हिंदी भाषा की फिल्म ‘हे राम’ में काम किया था। कमल हासन द्वारा निर्मित इस फिल्म में रानी के अलावा हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गज शख्सियतों की भरमार रही। इस फिल्म को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया था।

रानी के लिए वर्ष 2004 से फिल्मी कैरियर की सबसे सफल अवधि की शुरुआत हुई। यहां से रानी ने फिल्म ‘युवा’, ‘हम-तुम’ ‘वीर जारा’ ब्लैक, ‘बंटी और बबली’ ‘कभी अलविदा न कहना’ जैसी लगातार सफल फिल्में दीं।

वर्ष 2005 में रानी ने 50वें फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री दोनों ही पुरस्कार अपने नाम किए। एक ही साल में यह दोनों पुरस्कार जीतने वाली रानी पहली अभिनेत्री बनीं। फिल्म ‘ब्लैक’ में रानी ने अभिनय प्रतिभा का शक्तिशाली सबूत दिया। जिसमें उन्होंने एक अंधी-बहरी लड़की का किरदार निभाया था।

फिल्मी पर्दे के अलावा रानी समाज सेवा के कामों में बहुत सक्रिय रहती हैं। उन्होंने बहुत सारी संस्थाओं के लिर चंदा भी इकठ्ठा किया है। वर्ष 2015 में रानी ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक चैरिटी डिनर में प्रिंस चार्ल्स के साथ शामिल हुई थीं।

वर्ष 2005 में रानी को बॉलीवुड की तरफ से पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ भोजन का न्योता दिया गया था। रानी ने वर्ष 2006 में अन्य बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय परंपरा का प्रदर्शन किया।

तीन दशकों से फिल्म पर्दे पर सक्रिय रहने वाली इस अभिनेत्री ने साल 2014 में फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा के साथ शादी की। साल 2015 में इन्होंने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम आदित्य और रानी के नाम को मिलाकर ‘आदिरा’ रखा गया।

बॉलीवुड फिल्मों से विदेशों में अपनी छाप छोड़ने वाली रानी फिलहाल घर संसार में व्यस्त हैं, बशर्ते उन्होंने फिल्मों से दूरी नहीं बनाई है।

वर्ष 2005 में रानी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि वह मरते दम तक फिल्मों में काम करना नहीं छोड़ेंगी। शायद यही वजह है कि वह आज भी बॉलीवुड के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
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