'मोटापा-डायबिटीज की वजह है जंक फूड'

जनता जनार्दन संवाददाता , Apr 01, 2012, 10:35 am IST
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'मोटापा-डायबिटीज की वजह है जंक फूड' नई दिल्ली: शीतल पेय पदार्थों में विषाक्त तत्‍वों की मौजूदगी संबंधी चौंकाने वाले खुलासे के बाद सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की जंक फूड और खाद्य पदार्थों संबंधी एक अध्‍ययन में यह खुलासा किया गया है कि अधिकतर जंक फूड में ट्रांस फैट्स (जमा हुआ वसा), नमक और चीनी का स्‍तर बहुत ज्यादा होता है जो अनिवार्य रूप से खराब स्‍वास्‍थ्‍य मसलन मोटापा, मधुमेह जैसी बीमारियों को जन्म देता है।

जंक फूड: सभी प्रकार के जंक फूड के खाने के प्रति लोगों की चाहत ज्‍यादा होती है। लेकिन इसमें काफी मात्रा में जमा हुआ वसा, नमक और चीनी हमें युवावस्‍था में ही गंभीर किस्‍म की बीमारियों की तरफ ढकेल देता है। इसका अंजाम क्‍या होगा, न तो कंपनियां और न ही सरकार हमें इसके खतरे के प्रति सचेत करती है। इस बात को लेकर भी कोई जागरूक नहीं किया जाता कि इन खाद्य पदार्थों (जंक फूड) में क्या-क्‍या होते हैं। यह खुलासा सेंटर ऑफ साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक ताजा स्टडी में शुक्रवार को यहां किया गया।

‘हम सभी जानते हैं कि जंक फूड काफी नुकसानदेह होता है और फिर भी हम इसे खाते हैं। लेकिन क्‍या हम जानते हैं कि इसमें नुकसान क्‍या है? क्या हमने कभी इसकी जांच की कि हम क्या खा रहे हैं या चिप्स और मैगी के पैकेट को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं उसमें कितनी सच्चाई है। सीएसई की डायरेक्‍टर जनरल सुनीता नारायण ने कहा कि हमारा नया अध्‍ययन इस तरह के खाद्य पदार्थों के पोषक मूल्‍य के संबंध में है। इसमें लोगों को बताने के लिए इस बात पर जोर दिया गया है कि जंक फूड में क्‍या शामिल होता है और वे हमारे स्वास्थ्य को किस तरह से नुकसान पहुंचाते हैं।

सीएसई खाद्य पदार्थों और मिलावट संबंधी नए अध्ययनों के लिए जाना जाता है। सीएसई के डिप्‍टी डायरेक्‍टर जनरल चंद्र भूषण ने कहा कि भारत में जंक फूड निर्माताओं की ओर से पोषक मूल्‍य संबंधी किए जाने वाले दावे संबंधी भारत में यह पहला व्‍यापक अध्‍ययन है और किस तरह दैनिक भोजन के पोषक तत्वों के साथ उन दावों की तुलना की जाती है। अध्‍ययन में जो बात सामने आई, वह वाकई निराशाजनक एवं खतरनाक हैं। चंद्रभूषण प्रदूषण निगरानी लैब के भी प्रमुख हैं, जिसने इस अध्‍ययन को अंजाम दिया।

क्या जा रहा आपके शरीर में?

राष्ट्रीय पोषण संस्थान और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अच्छी सेहत के लिए एक संतुलित आहार में क्या-क्या तत्व होने चाहिए। एक व्यक्ति के भोजन में नमक, चीनी, कार्बोहाइड्रेट्स और वसा की कितनी-कितनी मात्रा होनी चाहिए। सीएसई की स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति के संतुलित आहार परीक्षण में पता चला कि उसकी दिनचर्या में पसंदीदा खाद्य पदार्थों में आलू चिप्स, स्नैक्स जैसे आलू भुजिया, नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, बर्गर, फ्रैंच फ्राइ और फ्राइड चिकन शामिल है।

राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अनुसार, एक व्यक्ति के लिए एक दिन में 6 ग्राम नमक जरूरी है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 5 ग्राम। 80 ग्राम के एक सामान्य मैगी नूडल्स के पैकेट में 3.5 ग्राम से अधिक नमक मौजूद होता है। एक मैगी नूडल्स पैकेट को हजम करने का मतलब आपके शरीर में 60 प्रतिशत नमक का प्रवेश होता है। चंद्र भूषण कहते हैं, ‘इसका मतलब यह कि बाकी बचे समय में खाने-पीने के अन्य व्यंजनों में नमक की मात्रा 2 ग्राम से ज्यादा न होने पाए। क्या आप ऐसा संतुलन बनाने में सक्षम होंगे या होते हैं और अगर संतुलन बना भी लिया तो ये कोई खुशी की बात नहीं होगी।’

ट्रांस फैट्स का आतंक

नमक कोई वास्तविक और इकलौती समस्या नहीं है। असली समस्या तो ट्रांस फैट्स (जमा वसा मसलन डालडा, घी) है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि  ट्रांस फैट्स से शरीर को अधिकतम एक फीसदी कुल ऊर्जा मिलती है। लिहाजा, एक वयस्क पुरुष के लिए 2.6 ग्राम, महिला के लिए 2.1 ग्राम और 10 से 12 साल की उम्र के बच्चे के लिए 2.3 ग्राम ट्रांस फैट्स प्रतिदिन चाहिए होता है।

सीएसई का परीक्षण और विश्व स्वास्थय संगठन के चार्ट पर गौर करें तो तमाम ऐसी कंपनियों की गलत सूचना, गुमराह करने वाली ब्रांडिंग, गलत लेबलिंग में लिप्त कंपनियों द्वारा एक खतरनाक सच्चाई का पता चलता है। कुछ जंक फूड कंपनियां यह दावा करती हैं कि उनके द्वारा परोसे जा रहे फूड में शून्य ट्रांस फैट्स हैं। कोई यह दावा नहीं करता कि इस फूज में कितना ट्रांस फैट्स है। सच यह है कि एक बच्चा अगर मेक्डोनाल्ड में जाकर अपने पसंदीदा व्यंजन को पूरी तरह से ग्रहण करता है तो समझिए कि उसके शरीर की एक दिन की ट्रांस फैट्स की जरूरत का 90 फीसदी पूरा हो जाता है। जबकि इस पसंदीदा भोजन को बनाने वाला पैकेट्स पर इस बात का कहीं उल्लेख नहीं करता कि इस आहार में कितना ट्रांस फैट्स है।

सीएसई ने अपने अध्ययन में पाया कि जो टॉप रेमेन सुपर नूडल्स (मसाला) दावा करता है कि 100 ग्राम के पैकेट्स में शून्य ट्रांस फैट्स है, हकीकत में इसमें 0.7 ग्राम ट्रांस फैट्स होता है। इसी प्रकार से आलू भुजिया के 100 ग्राम के पैकेट्स में 2.5 ग्राम ट्रांस फैट्स पाया गया। अगर आपने ध्यान दिया हो तो फरवरी 2012 से पेप्सिको के लेज (स्नेक स्मार्टर) ने बड़े पैमाने पर किए विज्ञापन में कहा कि यह चिप्स स्वास्थ्यवर्धक है क्योंकि इसमें शून्य ट्रांस फैट्स है और इसे सेहतमंद तेल में पकाया गया है। लेकिन कंपनी का दावा तब खारिज हो गया जब सीएसई ने इसकी जांच की। मार्च 2012 के 100 ग्राम के पैकेट की जांच में सीएसई ने 3.7 ग्राम ट्रांस फैट्स पाया। कहने का मतलब ये कि इसका अधिक सेवन आपकी खासकर बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।

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