अमेरिका में फिलिस्तीनी समर्थकों के बवाल ने दिलाई वियतनाम युद्ध की याद

जनता जनार्दन संवाददाता , May 08, 2024, 19:25 pm IST
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अमेरिका में फिलिस्तीनी समर्थकों के बवाल ने दिलाई वियतनाम युद्ध की याद इजरायल और हमास में जारी खूनी जंग के बीच अमेरिकी विश्वद्यालयों में फिलिस्तीन समर्थकों का बवाल जारी है. इसी बीच अमेरिकी पुलिस ने बुधवार को जॉर्ज वॉशिंगटन विश्विद्यालय में फिलिस्तीन समर्थकों के टेंट को उखाड़ फेंका है. साथ ही दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पुलिस की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब दर्जनों प्रदर्शनकारी धरना स्थल को छोड़कर जॉर्ज वॉशिंगटन विश्विद्यालय की प्रसिडेंट एलेन ग्रैनबर्ग के आवास तक मार्च निकाल रहे थे.जिसके बाद पुलिस ने फिलिस्तीन समर्थकों के टेंट को हटाना शुरू कर दिया था. इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर वियतनाम युद्ध की याद दिला दी है. आइए इसे समझ लेते हैं.


दरअसल, पिछले महीने से ही अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं. बीते 17 अप्रैल को अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सटी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए यूनिवर्सिटी से अपील की कि यूनिवर्सटी उन कंपनियों के साथ काम करना बंद करे, जो गाजा में युद्ध का समर्थन कर रही हैं. धीरे-धीरे अमेरिका के लगभग सभी विश्विद्यालयों में प्रदर्शन होने लगे. ऐसे में आइए जानते हैं कि छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी मांगे क्या हैं?

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि उनका विश्विद्यालय इजरायल या गाजा में चल रहे युद्ध को बढ़ावा देने वाली किसी भी कंपनी के साथ काम करना बंद करे. हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग बॉयकॉट, विनेवेश और प्रतिबंधित आंदोलनों से भी जुड़ा है. जो फिलिस्तीनियों के प्रति इजरायल की नीतियों के कारण दशकों पुराना है. अमेरिका की अलग-अलग विश्वद्यालयों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगे निम्न हैं:-

1. यूनिवर्सटीज उन सैन्य हथियार निर्माता कंपनियों के साथ काम करना बंद करे जो इजरायल को हथियार की आपूर्ति कर रहे हैं.
2. देश के सैन्य प्रयासों में सहायता करने वाली परियोजना के लिए इजरायल से अनुसंधान के तौर पर डोनेशन लेना बंद करे.
3. इजरायल से यूनिवर्सटीज को कितना डोनेशन मिलता है और इसका उपयोग किस लिए किया जाता है. इसमें पार्दरशिता लाई जाए.
4. इजरायली कंपनियों या ठेकेदारों से मुनाफा कमाने वाले धन प्रबंधकों के साथ विश्विद्यायल काम करना बंद करे.

अमेरिकी शिक्षा विभाग के डेटाबेस के अनुसार, लगभग 100 अमेरिकी कॉलेजों ने पिछले दो दशकों में इजरायल से कुल 375 मिलियन डॉलर से अधिक का डोनेशन या गिफ्ट लेने की बात स्वीकारी है. 

फिलिस्तीन के समर्थन हो रहे प्रदर्शन के बीच पुलिस कई यूनिवर्सटीज में लगातार कार्रवाई कर रही है. इससे भारतीय छात्र और उनके परिवार वाले भी चिंतित नजर आ रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग की ओपन डोर्स रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में दस लाख से अधिक विदेशी छात्रों में से 25 प्रतिशत से अधिक भारतीय छात्र हैं.

अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सटी में एक भारतीय मूल के छात्र के गिरफ्तार किए जाने की खबरें आने के बाद भारतीय छात्रों के माता-पिता काफी चिंतित हैं. वो अपने बच्चों को फोन कर रहे हैं और इस प्रदर्शन से अलग रहने की सलाह दे रहे हैं. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई भारतीय छात्र ऐसे भी हैं जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी विश्विद्यालय में नामांकन लिया था, अब वो दूसरे विकल्पों पर पुनर्विचार कर रहे हैं. कुछ छात्र आयरलैंड को एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं. वहीं, कुछ छात्र अपनी पढ़ाई इस साल स्थगित करने की सोच रहे हैं. 

हैदराबाद की रहने वाली स्नेहा जोगी जल्द ही सब कुछ ठीक होने की उम्मीद में हैं. उनके 18 वर्षीय बेटे को 4 साल के कंप्यूटर विज्ञान और गेम डिजाइन कोर्स के लिए अमेरिका के यूटा विश्विद्यालय में प्रवेश मिला है. 

गुरुग्राम के रहने वाले मानव बंसल का बेटा भी दक्षिण-पूर्व अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्विद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है. उनका कहना है कि हमने अमेरिकी विश्विद्यालयों में हुए हालिया घटनाक्रम के बारे में कई अंतरराष्ट्रीय छात्र सलाहकारों से बात की है. विरोध प्रदर्शन छात्र जीवन का एक प्रमुख अंग है. खासकर अमेरिका में शिक्षा सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं है. विरोध प्रदर्शन एक तरह से व्यवहार में लोकतंत्र की अभिव्यक्ति है. इसलिए हम किसी को विरोध करने से नहीं रोक सकते हैं. लेकिन हम इन प्रदर्शनों से दूर रह सकते हैं. 

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका के विश्विद्यालयों में इस तरह से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इससे पहले भी कई बार अमेरिकी विश्विद्यालयों और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि ये विरोध प्रदर्शन 1960 के दशक की याद दिलाते हैं. दरअसल, 1960 के दशक में वियतनाम युद्ध के विरोध में अमेरिकी लोग अपने ही देश के खिलाफ सड़कों पर उतर गए थे.

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