Friday, 21 September 2018  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

बिम्सटेक सैन्य अभ्यासः यह ठीक संकेत नहीं, भारत को छोड़ चीन के साथ नेपाल करेगा युद्धाभ्यास

बिम्सटेक सैन्य अभ्यासः यह ठीक संकेत नहीं, भारत को छोड़ चीन के साथ नेपाल करेगा युद्धाभ्यास नई दिल्लीः भारत के लिए यह एक बड़ा झटका है और मोदी सरकार के लिए किसी हादसे से कम नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे से महज एक महीने के भीतर नेपाल चीन की गोद में जाकर बैठ गया. बिम्सटेक देशों के पुणे में चल रहे सैन्य अभ्यास से नेपाल के हटने के निर्णय की अभी आलोचना हो ही रही है कि इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि नेपाल अगले कुछ दिनों में चीन में होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल हो सकता है.

यह सैन्य अभ्यास 12 दिन तक चलेगा. नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल गोकुल भंडारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया कि पहले भी चीन के साथ ऐसा संयुक्त सैन्य अभ्यास हो चुका है. इस तरह का दूसरा सैन्य अभ्यास 'सागरमाथा फ्रेंडशिप-2' चीन के चेंगदू में 17 से 28 सितंबर तक होगा.

भंडारी ने कहा, 'यह सैन्य अभ्यास आतंकवाद विरोधी अभियानों पर केंद्रित होगा.' गौरतलब है कि चीन के साथ नेपाल ने इस तरह का पहला सैन्य अभ्यास इसी साल अप्रैल में किया था. चीन और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग बढ़ता जा रहा है और यह भारत के माथे की शिकन बढ़ाने वाली बात है.

गौरतलब है कि बिम्सटेक देशों का सैन्य अभ्यास 10 से 16 सितंबर तक पुणे में जारी है. पहले नेपाल इस अभ‍ियान में हिस्सा लेने के लिए तैयार था और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते 30 अगस्त को सभी के सामने इसका ऐलान कर चुके थे. लेकिन अचानक नेपाल सरकार पीछे हट गई जिससे भारत को क्षेत्रीय स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी.

नेपाल के इस कदम को चीन की ओर उसके रुझान के तौर पर भी देखा जा रहा है. बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाइलैंड, भूटान और नेपाल सदस्य देशों के तौर पर शामिल हैं. सभी सात सदस्य देशों की थल सेनाएं छह दिवसीय अभ्यास के लिए 30-30 सदस्यों का अपना दस्ता भेजने पर सहमत हुई थीं.  

नेपाल के इस कदम पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. विदेश मंत्रालय ने सोमवार को नेपाल को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया है कि उसने बिम्सटेक की सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावना का उल्लंघन किया है. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सैन्य अभ्यास में नेपाल ने अपने पांच अधिकारियों और 30 जवानों को भेजने के बारे में अवगत कराया था, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री के मौखिक आदेश का हवाला देते हुए शामिल न होने के बारे में जानकारी दी.
अन्य पास-पड़ोस लेख
वोट दें

क्या बलात्कार जैसे घृणित अपराध का धार्मिक, जातीय वर्गीकरण होना चाहिए?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack