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एच-1बी वीजा के बाद दो नए अमेरिकी विधेयकों से भारतीय आईटी कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

एच-1बी वीजा के बाद दो नए अमेरिकी विधेयकों से भारतीय आईटी कंपनियों को हो सकती है दिक्कत वाशिंगटनः अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से भारतीय आईटी कंपनियों में भी हड़कंप मचा है. एच-1बी वीजा के बाद दो नए अमेरिकी विधेयकों से भारतीय आईटी कंपनियों को कामकाज में दिक्कत और गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है.

इससे पहले सात मुस्लिम देशों पर प्रतिबंध के तहत अमेरिकी सरकार ने अब तक एक लाख लोगों का वीजा रोका है. अमेरिकी न्याय विभाग के हवाले से शुक्रवार को मीडिया ने यह जानकारी दी.

इस बीच अमेरिकी प्रशासन के एच1-बी वीजाधारकों का न्यूनतम वेतन दोगुना करने वाले प्रस्तावित कानून को लेकर विभिन्न वर्गो की चिंताओं को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने आज कहा कि भारत सरकार निश्चित तौर पर इन चिंताओं को समझती है और अमेरिका को इससे अवगत कराया जा रहा है.

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री रूडी ने संवाददाताओं से कहा कि इस प्रकार की रोक कुछ देशों में समय समय पर देखने को मिली हैं. अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी :आईटी: के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और अगर कोई रोक लगाई जाती है तब उस देश को भी इन बातों को समझना होगा.

उन्होंने कहा, ‘भारत सरकार इस विषय पर अपेक्षित कार्रवाई करेगी और कर रही है.’ एच1बी वीजा के बारे में आईटी पेशेवरों की चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर रूडी ने कहा कि निश्चित तौर पर हमारी सरकार इन चिंताओं को समझती है और उस देश :अमेरिका: को इन चिंताओं से अवगत कराया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने एच-1बी वीजाधारकों के लिये न्यूनतम वेतन 130,000 डालर करने का प्रस्ताव किया है. इससे भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों के प्रभावित होने की आशंका है.

उधर, कांग्रेस ने अमेरिकी प्रशासन के एच1बी वीजा संबंधी प्रस्तावित कानून को ‘प्रतिगामी’ बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष उठाने को कहा है.

अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में एच1बी वीजा से संबंधित एक नया विधेयक पेश किया गया है. एच1बी वीजा की खबर जैसे ही आई भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए. आज महज एक घंटा कंपनियों पर कहर बनकर टूटा. भारत की शीर्ष 5 आईटी कंपनियों की मार्केट वैल्यू 50 हजार करोड़ तक गिर गई.

इसके तहत न्यूनतम 1,30,000 डॉलर वेतन वाली नौकरियों के लिए ही ऐसा वीजा दिया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस विधेयक के लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों के लिए अमेरिका में भारत सहित विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना मुश्किल हो जाएगा.

यह मौजूदा न्यूनतम वेतन स्तर के दोगुना से भी ज्यादा है और इसके लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों के लिए अमेरिका में भारत सहित विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना मुश्किल हो जाएगा. दरअसल, यह पहल डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी वादों और अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल का हिस्सा है.

बीएसई के आईटी इंडेक्स में 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. आईटी कंपनियों जैसे एचसीएल टेक्‍नोलॉजी, इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, टेक महिंद्रा, माइंडट्री के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखा गया. प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के शेयर 5.6 फीसदी, टेक महिंद्रा 9.7 तो एचसीएल 6.3, इंफोसिस 4.6 और विप्रो के शेयर 4.23 फीसदी टूट गए. 

भारतीय कंपनियां अमेरिकी नागरिकों से ज्यादा एच1बी वीजा के जरिये भारतीयों को नौकरी देती हैं. अब कंपनियों को अमेरिकियों को नौकरी के अवसर प्रदान करने होंगे जिससे उनके मार्जिन और आय पर चोट पहुंचना तय माना जा रहा है.

भारतीय आईटी उद्योग पहले से ही मंदी और तकनीकी क्षेत्र में आए ऑटोमेशन और कृत्रिम बौद्धिकता  जैसे नए परिवर्तनों से जूझ रही हैं. ऐसे में एच1बी वीजा के मुद्दे ने कोढ़ में खाज का काम किया है.   
 
आईडीबीआई कैपिटल एवं सिक्योरिटीज के प्रमुख एके प्रभाकर का कहना है, "यदि वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव एच1बी वीजा के लिए किया जाता है तो भारतीय कंपनियां निश्चित रूप से अपने भारत से अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजना कम कर देगी." उन्होंने कहा कि अब ज्यादा प्रोजेक्ट डिजिटल या क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म पर है, इसलिए एच1बी वीजा में वैसे भी कमी आएगी. 
 
एच-1 बी एक गैर-अप्रवासी वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियों को विशेष परिस्थितियों में विदेशी कर्मचारियों को अस्थाई तौर पर नियुक्त करने की अनुमति देता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक स्तर पर एच1बी वीजा रखने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है.

वाशिंगटन पोस्ट ने वर्जीनिया की संघीय अदालत में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के हवाले से यह संख्या दी है.

ट्रंप प्रशासन ने यमन, ईरान, इराक, सीरिया समेत सात मुस्लिम देशों के नागरिकों की अमेरिकी यात्रा पर 120 देशों का प्रतिबंध लगाया है. अदालत सरकार के इस फैसले के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
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