Sunday, 20 September 2020  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
धर्म-अध्यात्म
  • खबरें
  • लेख
व्यक्ति की सफलता में सबसे बड़ी बाधा होती हैं ये तीन चीजें: चाणक्य नीति जनता जनार्दन संवाददाता ,  Sep 05, 2020
चाणक्य भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में से एक माने जाते हैं. चाणक्य एक शिक्षक होने के साथ साथ कुशन रणनीतिकार, अर्थशास्त्री, समाज शास्त्री भी थे. इसके साथ ही वे स्वयं में एक प्रबुद्ध व्यक्ति थे. चाणक्य की चाणक्य नीति व्यक्ति को सही ढंग से जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है. इसीलिए चाणक्य नीति आज भी प्रासंगिक है. जो व्यक्ति चाणक्य नीति का नित्य अध्ययन करता है और चाणक्य नीति की बातों को अपने जीवन में उतारता है, ऐसे व्यक्ति जीवन में ऊंचाइयां प्राप्त करते हैं. ....  समाचार पढ़ें
ऐसा अद्भुत संयोग आया है 165 साल के बाद, 1 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 29, 2020
हिन्दू पंचांग के मुताबिक इस साल का पितृ पक्ष 01 सितम्बर से शुरू होकर 17 सितम्बर 2020 तक चलेगा. यानी कि इस साल पितृ पक्ष की कुल अवधि 17 दिनों की होगी. हिन्दू पंचांग के मुताबिक यह पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है जिसमें पितृ तर्पण किया जाता है. हिन्दू धर्म के मुताबिक जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष के इन दिनों में अपने पूर्वजों का तर्पण करता है. उस व्यक्ति को उसके पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जिसके फलस्वरूप व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. ....  समाचार पढ़ें
अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान अघोर पीठ बाबा कीनाराम स्थल को मिला प्रधानमंत्री का आभार ज्ञापन पत्र अमिय पाण्डेय ,  Aug 26, 2020
वैश्विक महामारी कोरोनॉ के दौरान रविन्द्रपुरी कालोनी स्थित अघोर शोध एवं सेवा संस्थान ,बाबा कीनाराम स्थल द्वारा आम जनता के लिए किए जा रहे सेवा भाव का वाराणसी के सांसद एवं भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी उन्मुक्त कंठ से  सराहना करते हुए आभार ज्ञापित किया ।  ....  समाचार पढ़ें
राक्षस का वध करने पर राधा जब श्रीकृष्ण से हुईं नाराज जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 25, 2020
राधा अष्टमी का पर्व राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. राधा भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय थीं. दोनों में अटूट प्रेम था. भगवान श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम दुनिया भर में त्याग और सर्मपण का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है. राधा और कृष्ण के प्रेम की कथाएं अनगिनत हैं. इसी ही एक कथा है राधा रानी श्रीकृष्ण से नाराज हो गई थीं. ....  समाचार पढ़ें
अयोध्याः राम मंदिर निर्माण के लिए गिराए जाएंगे जर्जर भवन जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 23, 2020
जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए भूमि के विस्तारीकरण का काम शुरू कर दिया है. मंदिर निर्माण स्थल से सटे जर्जर मंदिरों के भवनों को हटाए जाने का कार्य के लिए भी एलएंडटी को ही जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें सबसे पहले राम जन्म स्थान व सीता रसोई के जर्जर हो चुके भवन को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है. ....  समाचार पढ़ें
देवी लक्ष्मी को रखना चाहते हैं हमेशा प्रसन्न? जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 20, 2020
माता लक्ष्मी वैभव और यश की देवी हैं. वह जिस पर मेहरबान हो जाती हैं उस पर धनवर्षा हो जाती है. मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सभी पूजा अर्चना करते हैं. मान्यता है कि जिस घर में मां लक्ष्मी का वास होता है वहां धन की कभी कमी नहीं होती. हर कोई चाहता है कि मां लक्ष्मी उनके घर में वास करे. लेकिन कई लोगों से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और फिर उनके घरों को भी छोड़कर चली जाती हैं. हम आपको बता रहे हैं कि मां लक्ष्मी ....  समाचार पढ़ें
घर पर ही रह कर मनाएं बाबा कीनाराम जी का जन्मोत्सव पर्व: अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी अमिय पाण्डेय ,  Aug 13, 2020
इस अवसर पर विश्वविख्यात अघोर शोध एवं सेवा संस्थान, क्रीं कुंड,कीनाराम स्थल, शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने समस्त भक्त जनों से अपील की है कि भक्त गण धैर्य धारण करें और अपने घर पर रहकर ही बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव मनाएं। आप सभी से अनुरोध है कि कोविड-19 कोरोनॉ वैश्विक महामारी के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति संकट से जूझ रही है। इस संकट की घड़ी ....  समाचार पढ़ें
जानिए कौन हैं भगवान परशुराम जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 10, 2020
उत्तर प्रदेश में इन दिनों 'ब्राह्मण' समाज को लेकर खूब राजनीति हो रही है. बसपा से लेकर सपा तक सभी पार्टियां इस समाज को लुभाने में जुटी हैं. ऐसा इसीलिए है क्योंकि यूपी में करीब 11 फीसदी 'ब्राह्मण वोट' हैं. इन वोटों के लिए विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद से सियासी बिसात बिछाई जा रही है. पार्टियां सियासी हित साधने के लिए अब भगवान परशुराम के नाम का इस्तेमाल करने लगी हैं। फिर चाहे मायावती हो या अखिलेश दोनों ही नेताओं ने परशुराम के बहाने ब्राह्मणों को लुभाने की सियासी चा ....  समाचार पढ़ें
श्री राम जन्मभूमि पूजन के दिन अपने घरों में श्रद्धापूर्वक दीपक जलाएं: चंपत राय जनता जनार्दन विशेष संवाददाता ,  Jul 29, 2020
महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थिति में ऐसा करना असंभव है ,किंतु माननीय प्रधान मन्त्री इस ऐतिहासिक प्रसंग पर अयोध्या आकर श्री राम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रारंभ करा दें , इसलिए भूमि पूजन आवश्यक है । श्री राम जन्मभूमि तीर्थ समिति सभी राम भक्तों से निवेदन करती है कि अयोध्या पहुंचने के लिए व्यग्र न हो , सभी लोग अपने स्थान से दूरदर्शन पर समारोह का सजीव प्रसारण देखें और सायंकाल अपने घर पर दीपक जलाकर दिव्य भव्य अवसर का स्वागत करें ।भविष्य में किसी उचित अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण यज्ञ में सभी राम भक्तों को सम्मिलित होने का अवसर मिले , यह प्रयास अवश्य होगा ।। ....  समाचार पढ़ें
राम मंदिर भूमि पूजन: पीएम मोदी तांबे का एक कलश स्थापित करेंगे जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 19, 2020
अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर का भूमि पूजन तकरीबन 3 घंटे लंबे कार्यक्रम के साथ संपन्न होगा. अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर की भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त को इसलिए चुना गया है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग को सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है. अगर इस दिन कोई भी कार्य किया जाए तो वह सर्वार्थ की सिद्धि को प्राप्त होता है. भगवान श्री राम के नाम 'राम' नाम का जो मुहूर्त है, वह भी 5 अगस्त को फलदायक बताया जा रहा है. यही वजह है कि इस शुभ मुहूर्त में भूमि पूजन किया ....  समाचार पढ़ें
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jun 14, 2020
अपने घर पर ही रहकर मनायें गुरू पूर्णिमा का पर्व: सिद्धार्थ गौतम राम जी वाराणसी: देश भले ही अनलॉक हो गया है। लेकिन इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है । ऐसी स्थिति मे अपने भक्तों को संक्रमण से दूर रखने के लिए विश्व विख्यात अघोरपीठ औघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान क्रीकुण्ड शिवाला के पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी ने कहा कि आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कोरोना वैश्विक महामारी कोविड19 के प्रकोप के कारण सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: जिनके जीवन गाथा में निहित है जगत सन्देश गोपाल जी राय ,  Feb 21, 2019
ह ठीक है कि उनके जीते जी जमींदारी प्रथा का अंत नहीं हो सका। लेकिन यह उनके द्वारा ही प्रज्ज्वलित की गई ज्योति की लौ ही है जो आज भी बुझी नहीं है, और चौराहे पर खड़े किसान आंदोलन को मूक अभिप्रेरित कर रही है। यूं तो आजादी मिलने के साथ हीं जमींदारी प्रथा को कानून बनाकर खत्म कर दिया गया। लेकिन आज यदि स्वामीजी होते तो फिर लट्ठ उठाकर देसी हुक्मरानों के खिलाफ भी संघर्ष का ऐलान कर देते। दुर्भाग्यवश, किसान सभा भी है और उनके नाम पर अनेक संघ और संगठन भी सक्रिय हैं, लेकिन स्वामीजी जैसा निर्भीक नेता दूर-दूर तक नहीं दिखता। किसी सियासी मृगमरीचिका में भी नहीं। ....  लेख पढ़ें
जब करपात्री जी मिले अघोरेश्वर अवधूत भगवान राम से अमिय पाण्डेय ,  Nov 19, 2018
बात करीब 1957 की है, बाबा जशपुर पैलेस मे थे,उन दिनो राजा साहब के गुरू स्वामी करपात्री जी भी महल मे ही प्रवास कर रहे थे, दरअसल राजा विजयभूषण जू देव का प्रथम दर्शन बाबा से अष्टभुजी( विँध्याचल) मे हुआ था,वहाँ पर किसी ने किशोर अवधूत की महिमा के बारे मे राजपरिवार को बताया थाl, फिलहाल इस घटना के पहले बाबा २-३ बार जशपुर पैलेस राजासाहब के अनुनय विनय पर जा चुके थे ....  लेख पढ़ें
अमित मौर्य ,  Jul 31, 2018
धर्म सत्ता स्थापित करने का गैर राजनीति उपकरण जब -जब और जहां-जहां बना संस्कृत विकृति हो ही गयी ...संस्कृति छद्म और पाखण्ड से परे एक सात्विक परम्परा होती है ...वैदिक युग के बाद त्रेता में राम के नेतृत्व में धर्म और राजनीति का घाल मेल हुआ परिणाम सामने आया ...जर (आधिपत्य ), जोरू (पत्नी ) और जमीन के विवादों का वहिरुत्पाद "आध्यात्म " कहा जाने लगा ... ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः बाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में मूल अन्तर दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 16, 2017
बाल्मीकिजी राम के समकालीन थे। उन्हें कहीं- कहीं दशरथ के मंत्रियों के समूह में सम्मिलित होना भी बताया गया है। अतः वे सर्वश्रेष्ठ राजा के रूप में राम को सर्व सद्गुण-संपन्नता के साथ अधिष्ठापित करते हैं। किन्तु गोस्वामीजी का मुख्य उद्देश्य राम की ईश्वरता की ओर श्रोता का ध्यान आकृष्ट करना रहा है। बाल्मीकि के राम अनुकरणीयता की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ हैं । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः तुलसीदास के राम ब्यक्ति नहीं ब्रह्म, पूज्य व आराध्य, ऐतिहासिक दृष्टि दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 15, 2017
दक्षिण तो दक्षिण, उत्तर में भी राम निर्विवाद नहीं हैं । यहाँ भी उन्हें एक ओर वर्ण-ब्यवस्था के आधार पर आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। राम शुद्र बिरोधी और ब्राह्मणवादी हैं. कोई आश्चर्य नहीं होगा कि कुछ दिनों के बाद ब्राह्मणों को क्षत्रिय राम से विरत रहने की प्रेरणा दी जाय। श्रीराम को ब्राह्मण द्वेषी सिद्ध किया जाय ,क्योंकि उन्होंने महा विद्वान रावण का बध किया था। तब राम किसके पूज्य व आराध्य रह जायेंगे?यह सब ऐतिहासिक दृष्टि की देन है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः श्री राम और श्री कृष्ण लीला उतनी सत्य जितना यह जगत दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 14, 2017
महाभारत के मुख्य नायक पांडव हैं और प्रतिद्वंद्वी उनके ही बन्धु कौरव हैं। दोनों राज्य के लिए संघर्ष करते हुए, करोड़ों ब्यक्तियों को कट जाने देते हैं। रामचरितमानस में बन्धुत्व के आदर्श राम और भरत हैं, जो एक दूसरे के लिए राज्य का परित्याग करने में संतोष का अनुभव करते हैं। स्वभावतः संघर्ष -प्रिय मानव मन, कौरवों-पांडवों के चरित्र को अपना आदर्श मान लेता है। ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निज अनुभव अब कहौं खगेसा, बिनु हरि भजन न जाहिं कलेसा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 12, 2017
भक्ति में भगवान के दर्शन भी हो सकते हैं--यह भक्ति की विशेषता है, जबकि ज्ञान की परानिष्ठा होने पर भी भगवान के दर्शन नहीं होते। रामायण में भी भक्ति को मणि की तरह बताया है किन्तु ज्ञान को तो दीपक की तरह बताया है। दीपक को तो जलाने में घी, बत्ती आदि की जरूरत होती है और हवा लगने से वह बुझ भी जाता है, पर मणि को न तो घी, बत्ती की जरूरत है और न ही वह हवा से बुझती ही है ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहिं कपट छल छिद्र न भावा दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 11, 2017
एक तो ज्ञान का, पुरुषार्थ का मार्ग है, जिससे हम बुद्धि को निर्मल बनायें। पर तुलसीदासजी तो नन्हें बालक की तरह हैं। वे मानते हैं कि अगर बड़ा बालक हो, तो उसे अपनी गन्दगी तो धोना ही पड़ेगा, क्योंकि ब्यक्ति तो मल का ही बना है- गंदगी दूर करने के लिए पहले कपड़े को साबुन से धोएँ और बाद में स्वच्छ जल से कपड़े में लगे साबुन को धोएँ। इसी तरह से साधना और सत्कर्म से मलिनता को धोने के उपरान्त फिर साधन को भी धो डालिए। और वह भी शुद्ध जल से । ....  लेख पढ़ें
मानस मीमांसाः अस संजोग ईस जब करई, तबहुँ कदाचित सो निरुअरई दिनेश्वर मिश्र ,  Sep 09, 2017
विचार तो मथानी है। मथानी चलाइए, यह तो बिल्कुल ठीक है, लेकिन यह तो देख लीजिए कि आप मथानी चला कहाँ रहे हैं? आप पानी में मथानी चलाते रहिए,दिन रात परिश्रम करते रहिए तो भी उस पानी से मक्खन निकलेगा क्या? इसलिए अंतःकरण में यदि केवल पानी भरा हो, तो फिर विचार मंथन से क्या निकलेगा। और अगर वह पानी गंदा हो तो मंथन से उभर कर गंदगी ही तो ऊपर आयेगी। ....  लेख पढ़ें
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल