Wednesday, 03 June 2020  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
चर्चित लेखक
श्रद्धांजलि: रोते हुए बच्चों को अब हंसाएगा कौन, निदा फाजली जनता जनार्दन डेस्क ,  Feb 10, 2016
'उसको रुखसत तो किया था, मुझे मालूम न था/सारा घर ले गया, घर छोड़ के जाने वाला।' ये निदा फाज़ली के अल्फाज़ हैं, जो हम सबको रुखसत कर चले गए। ज़िंदगी के हर मोड़ पर मिली तकलीफ को अल्फाज़ में पिरोने वाले और अपनी बातों को बेबाकी से कहने वाले उर्दू और हिंदी के नामचीन शायर मुख्तदा हसन निजा फाज़ली सोमवार (आठ फरवरी) को दुनिया को अलविदा कह गए। ....  लेख पढ़ें
मैं बने-बनाए सांचे में नहीं लिखती: शोभा निहलानी जनता जनार्दन डेस्क ,  Jan 29, 2016
शोभा निहलानी का कहना है कि वह बने-बनाए सांचे में लिखने में यकीन नहीं करतीं हैं. शोभा निहलानी बतौर रहस्य, साजिश और रोमांच लेखिका के रूप में जानी जाती हैं. कानो, एंटवर्प, सिंगापुर, रोचेस्टर, मुंबई, बेंगलुरु और अब हांगकांग-इतनी जगहों पर रहने की वजह से शोभा निहलानी एक तरह से विश्व नागरिक बन चुकी हैं. भले ही किसी बने-बनाए सांचे में न लिखती हों, लेकिन इसके बावजूद वह पांच बेहद कामयाब उपन्यासों की लेखिका बन चुकी हैं और कई और लिखना चाहती हैं. ....  लेख पढ़ें
लेखन मेरा दूसरा जीवन: राजनयिक सरना प्रीता नायर ,  Jan 05, 2016
युनाइटेड किंग्डम के लिए भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त नवतेज सरना का संबंध लेखकों के उस समूह से है जिसे साहित्य का विदेश मंत्रालय स्कूल कहा जाता है। वह इस स्कूल के हैं जरूर लेकिन कहते हैं कि उन्होंने अपने पेशेवर और लेखकीय जीवन को बहुत सारगर्भित रूप से अलग किया हुआ है। ....  लेख पढ़ें
कविता मेरा पहला प्रेम: रामदरश मिश्र जनता जनार्दन डेस्क ,  Dec 21, 2015
हिंदी साहित्य के लिए इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि रामदरश मिश्र का कहना है कि 'कविता मेरा पहला प्रेम है' और साहित्य अकादेमी तो एक' आंगन' की तरह है, जहां सभी भाषाएं एक साथ उठती-बैठती हैं। मिश्र ने हालांकि असहिष्णुता को लेकर देश में छिड़ी बहस को बकवास करार दिया और कहा कि साहित्य अकादमी से इन घटनाओं का कोई लेना-देना नहीं है। ....  लेख पढ़ें
सहिष्णु माहौल बनाने की जिम्मेदारी लेखकों पर भी: अष्टभुजा शुक्ल जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 05, 2015
देश में असहिष्णुता को लेकर छिड़ी बहस के बीच वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि लेखकों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी लेखनी के बल पर समाज में सहिष्णु माहौल बनाए रखने में मदद करें।हाल ही में इफ्को की ओर से 5वें श्रीलाल शुक्ल स्मृति सम्मान के लिए चयनित किए गए शुक्ल ने यह भी कहा कि सरकार यदि वास्तव में साहित्यकारों से बातचीत करने को तैयार है तो उसकी कथनी और करनी में अंतर नहीं दिखना चाहिए। ....  लेख पढ़ें
पुरस्कार वापसी या प्रचार पिपासा! अनंत विजय ,  Sep 10, 2015
कन्नड़ के लेखक प्रोफेसर एम एम कालबुर्गी की हत्या के विरोध में साहित्यक और सांस्कृतिक जगत उद्वेलित है । सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस हत्या के विरोध में प्रदर्शन आदि भी हो रहे हैं । हत्यारों को पकड़ने और उसको सजा देने की मांग लगातार जोड़ पकड़ रही है । कर्नाटक में 30 अगस्त को प्रोफेसर एमएम कालबुर्गी की हत्या के बाद धीरे-धीरे विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। ....  लेख पढ़ें
पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है अनंत विजय ,  Sep 06, 2015
हिंदी के जादुई यथार्थवादी कहानीकार उदय प्रकाश एक बेहतरीन कथाकार हैं । उनकी कहानियों का मैं जबरदस्त प्रशंसक हूं । उनकी कविताओं को भी पाठकों का एक बड़ा वर्ग पसंद करता है । उदय प्रकाश ने जब भी कोई भी कहानी लिखी उसको साहित्य जगत ने हाथों हाथ लिखा । लेकिन शोहरत के साथ साथ उदय प्रकाश का विवादों से भी गहरा नाता रहा है । ....  लेख पढ़ें
रंगमंच की जान है प्रेमचंद की हिंदुस्तानी भाषा जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 31, 2015
मुंशी प्रेमचंद उस जमाने में हुए जब हिन्दी भाषा अपने विकास के प्रारंभिक चरण में ही थी। हिन्दी में बड़े ही सहज रूप से उर्दू के शब्द शामिल हुए। उस भाषा का असर देखिए कि आज मुंबई की 'आइडियल ड्रामा एंड इंटरटेनमेंट एकेडमी' (आइडिया) मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का नाट्य रूपांतरण और प्रदर्शन इसलिए भी करती है, क्योंकि इससे न सिर्फ नए कलाकारों की हिन्दी की समझ बेहतर होती है बल्कि उनके उच्चारण भी सुधर जाते हैं। ....  लेख पढ़ें
शहरी विस्थापन और द्वंद्व का आख्यान अनंत विजय ,  Jul 07, 2015
जानकीदास तेजपाल मैनशन । यह नाम है मशहूर उपन्यासकार अलका सरावगी के नए उपन्यास का । उपन्यास के नाम और कवर को देखकर लगता है कि यह उपन्यास किसी हवेली के इर्द गिर्द घूमता होगा । उपन्यास पढ़ने के बाद भी यही लगता है । यह उपन्यास कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर पहले सीना ताने और कालांतर में विकास की आड़ में खेले जा रहे खेल के आगे सर झुकाए खड़े जानकीदास तेजपाल मैनशन के इर्द गिर्द ही चलती है । ....  लेख पढ़ें
अरुण प्रकाशः जिनके लिए नए, पुराने कथाकार एक से थे अनिल अत्रि ,  Jun 18, 2015
तो तीन साल हो गए उन्हें गए. जीवन की आपाधापी में हरदम मिलना हो या नहीं, पर यादों पर किसका बस. आज ही की तारीख यानी 18 जून, 2012 को वरिष्ठ कथाकार अरुण प्रकाश का नई दिल्ली में निधन हो गया था. वह हमारे और हमारे जैसे युवाओं के लिए क्या थे, इसे वही जानता होगा, जो उनसे कभी मिला हो. ....  लेख पढ़ें
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल