Saturday, 23 November 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 
राजनीतिक दल
कांग्रेस चल पड़ी 'नरम हिंदुत्व' की राह मोहित दुबे ,  Sep 14, 2016
लगता है कांग्रेस भी नरम हिंदुत्व की राह पर चल पड़ी है। मिशन उत्तर प्रदेश के तहत, राहुल गांधी अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान न केवल सबसे पहले प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर गए, बल्कि वहां 15 मिनट तक पूजा-अर्चना की, भगवान को भोग लगाया और मंदिर के महंत ज्ञानदास से मुलाकात की। ....  लेख पढ़ें
उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में शीला, कांग्रेस की नजर सवर्ण वोटों पर जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 15, 2016
उत्तर प्रदेश में साल 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कभी कन्नौज से सांसद रहीं शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना 14 फीसदी ब्राह्मण सहित सवर्ण मतदाताओं को लुभाने की कवायद है. ....  लेख पढ़ें
उत्तर प्रदेश: इधर, न उधर, न जानें भाजपा किधर बृजनंदन यादव ,  Feb 02, 2016
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रवैया उत्तर प्रदेश विधानमंडल सत्र के उद्घाटन के दौरान किंकर्तव्य विमूढ़ की स्थिति में था। राज्यपाल के अभिभाषण पढ़ने के दौरान भाजपा सदन में उदासीन थी। सदन के अंदर न इधर न उधर, न जानें भाजपा किधर की स्थिति में थी। मुख्य विपक्ष की भूमिका बहुजन समाज पार्टी के विधायक बखूभी निभा रहे थे तो वहीं कांग्रेस भी विपक्ष के साथ खड़ी नजर आ रही थी। सपा सरकार के क्रियाकलापों को लेकर बसपा के सदस्य राज्यपाल का विरोध कर रहे थे तो वहीं कांग्रेस विधायक भी सपा सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। ....  लेख पढ़ें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शरद नीतीश सक्रिय जितेंद्र त्रिपाठी ,  Jan 05, 2016
बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल-युनाइटेड (जदयू) महागठबंधन को मिली सफलता के बाद पार्टी अब उत्तर प्रदेश में धाक जमाने के लिए काफी उत्साहित है। मिशन-2017 पार्टी के राष्ट्रीय एजेंडे में है और अंदरखाने जबरदस्त तैयारी चल रही है।खास बात यह कि उप्र चुनाव की तैयारियों में बतौर पार्टी प्रदेश नेतृत्व नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने काम भी शुरू कर दिया है। जदयू का दावा है कि उप्र के विधानसभा चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि का पार्टी को पूरा लाभ मिलेगा। ....  लेख पढ़ें
भाजपा को एकमात्र विकल्प मान रहे असम वासी: सोनोवाल जनता जनार्दन डेस्क ,  Nov 24, 2015
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की असम इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष सर्बानंद सोनोवाल का मानना है कि असम के लोगों को लगता है कि केवल भाजपा ही राज्य का तेजी से विकास कर सकती है। लोग कांग्रेस सहित सभी पार्टियों को आजमा चुके हैं। सोनोवाल (53) ने डिब्रूगढ़ से विशेष बातचीत में कहा, असम के लोगों का भाजपा में पूर्ण विश्वास है। ....  लेख पढ़ें
भाजपा के नहीं आए अच्छे दिन प्रभुनाथ शुक्ल ,  Nov 12, 2015
राजनीति में यूपी और बिहार अपनी अलग पहचान रखते हैं, क्योंकि राजनीतिक लिहाज से दोनों बड़े राज्य हैं। इन राज्यों में चुनाव परिणामों की दिशा देश की राजनीति का भविष्य तय करती है। बिहार का चुनाव परिणाम बेहद चौंकाने वाले हैं। हालांकि एक्जिट पोल में यह अनुमान लगाए गए थे कि एनडीए पर महागठबंधन भारी दिख रहा है, लेकिन इतनी उम्मीद नहीं थी कि भाजपा की रैंकिंग सिर्फ 53 सीटों और एनडीए 58 सीट पर ठहर जाएगी। ....  लेख पढ़ें
'सोशल नेटवर्किंग' राजनीति बिहार का दुर्भाग्य: तारिक अनवर मनोज पाठक ,  Sep 14, 2015
राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा है कि वो बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज उखाड़ फेंकेगे। इसके लिए उन्हें चाहे जो भी करना पड़े।भले ही एनसीपी कल तक महागठबंधन में थी, पर अब वो महागठबंधन से निकलकर एक और साथी समाजवादी पार्टी के साथ तीसरा मोर्चा बना रही है। ....  लेख पढ़ें
मीडिया को कठघरे में खड़ा कर रही है आरोपियों की सरकार बी. पी. गौतम ,  Jun 15, 2015
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि उनके मंत्रियों को फंसाया जा रहा है, साथ ही कहना है कि सरकार पर दबाव बनाये रखने के लिए विरोधी दलों के नेता आये दिन मंत्रियों के त्याग पत्र मांगते रहते हैं। आरोप यह भी है कि समाजवादी पार्टी पर मीडिया हमलावर रहता है। ....  लेख पढ़ें
यों ही नहीं बनता भाजपा जैसा संगठन हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ,  May 01, 2015
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा पार्टी को 10 करोड सदस्य का लक्ष्य 18 अप्रैल की रात्रि 12 बजे तक पूरा हो गया। भाजपा 10 करोड़ की सदस्य संख्या के साथ अब दुनिया की सबसे बडी सख्या वाला राजनैतिक संगठन बन गया हैं। वस्तुतः भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह का संगठन को सशक्त व समृद्ध बनाने का नूतन प्रयोग है ....  लेख पढ़ें
राजनैतिक चंदा: भ्रष्टाचार का लाइसेंस सत्यव्रत त्रिपाठी ,  Apr 23, 2015
विकासशील प्रजातंत्र में सशक्त राजनीतिक दलों को प्रतियोगितापूर्ण जनतांत्रिक राजनीति का माहौल बनाना जरूरी होता है। पार्टी को इसमें टिके रहने, मुकाबला करने और जनतांत्रिक गतिविधियों से जुड़े रहने और चुनाव प्रचारों के लिए धन की जरूरत होती है। इन दिनों राजनीतिक फंड और पार्टी के लिए दान लेना समस्या बन गई है। पार्टियों को धन उपलब्ध कराने या फिर उसे मदद करने, खर्च और जनता के सामने उसका ब्योरा देने का कोई विधिवत प्रावधान नहीं है। ....  लेख पढ़ें
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल