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मिसाल
धरती को बचाना है तो हर कोई लगाए 5 पेड़ः 'वृक्ष बंधु' परशुराम सिंह अमिय पाण्डेय ,  Jul 09, 2018
पिछले दो दशक में एक लाख से ज्यादा पेड़ लगा कर उनकी देखभाल करने वाले परशुराम सिंह का मानना है कि बच्चों को शुरू से ही पर्यावरण के प्रति सचेत रहने कि शिक्षा दी जाये ताकि वे भविष्य में पर्यावरण को संतुलित रख सकें. गांव-गांव जाकर पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के चलते सिंह को 'वृक्ष बंधू' की उपाधि मिल चुकी है और उन्हें मिले अवार्डों से उनका पूरा एक कमरा भरा है. ....  लेख पढ़ें
वंचित बच्चों की जिंदगी का सहारा 'ब्रेड' जनता जनार्दन डेस्क ,  Nov 15, 2016
अमन चार साल पहले अपने मदारी पिता के साथ दिन भर घूम-घूम कर करतब दिखाता था, और परिवार के लिए रोटी जुटाता था। जिसके लिए पूरा दिन उसे खपाना पड़ता था. ऐसा जीवन सिर्फ अमन ही नहीं, देश में न जाने कितने वंचित बच्चों का नसीब बना हुआ है, लेकिन आज अमन (बदला हुआ नाम) गिनतियां गिनता है, नोट गिन सकता है, किताबें पढ़ सकता है. ....  लेख पढ़ें
'न्यू इंडिया इनिशिएटिव' ने जिनके काम को दिए नए शब्द श्रेष्ठ गुप्ता ,  Jan 10, 2015
मदद, सेवा, सहयोग, करुणा और संवेदना, हम सभी के अंदर के वे सकारात्मक गुण हैं, जिनके प्रभाव से हम एक बेहतर समाज के निर्माण की इच्छा रखते हैं, पर इस इच्छा को सचाई में बदल देने तक का सफ़र वाकई मुश्किल होता है. हमें लगता है कि सिर्फ हमारे बदलने से बदलाव नहीं आएगा, लेकिन सच तो यही है कि समाज उसमें शामिल हर एक इनसान के मिलने से ही बनता है... और यहां यह भी समझना बेहद ज़रूरी है कि समाज में किसी भी अच्छे या बुरे बदलाव के ज़िम्मेदार उस समाज को बनाने वाले लोग ही हैं. ....  लेख पढ़ें
'स्वच्छ भारत' ने साल 2014 में कायम की सेवा की मिसाल श्रेष्ठ गुप्ता ,  Jan 07, 2015
'स्वच्छ भारत' देश, समाज और मानवता की तरक्की के लिए समर्पित एक स्वयंसेवी सामाजिक संगठन है,जिसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता लाकर एक बेहतर कल का निर्माण करना है. असल में स्वच्छ भारत का निर्माण तभी संभव है, जब हम तन और मन दोनों की स्वच्छता पर काम करेंगे. इसके लिए हमें न सिर्फ अपने आसपास के वातावरण को साफ़ रखने की ज़रुरत है, बल्कि यह भी समझने की ज़रुरत है कि भारत में फैली मानसिक गंदगी कैसे दूर हो. स्वच्छ भारत का मकसद सिर्फ लोगों को गंदगी हटाने के लिए प्रेरित करना नहीं है, इसका मकसद लोगों में इतनी जागरूकता लाना है कि गंदगी हो ही न. फिर चाहे वह गंदगी कूड़े के रूप में हो या फिर दिमाग में नकारात्मक सोच के रूप में. ....  लेख पढ़ें
सायमा ने हौंसले से पाई जीने की राह जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 03, 2011
सायमा 15 साल की है। पांच साल की उम्र में ही उसने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। समझा जाता है कि ऐसा विटामिन 'ए', आयरन तथा फॉलिक एसिड की कमी के कारण हुआ। दरअसल, बिजली विभाग में मजदूर के तौर पर काम करने वाले उसके पिता मोहम्मद हुसैन अपनी 3300 रुपये प्रतिमाह की पगार में सायमा सहित सात लोगों का गुजारा ही बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं। फिर खानपान में विटामिन आदि का खयाल कौन रखे। ....  लेख पढ़ें
कौमी एकता की अनूठी मिसाल हैं मुस्तकीम  जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 22, 2011
हम सभी अपने- अपने धर्म को मानने वाले शायद सिर्फ अपने रीति रिवाजों का पालन करते है लेकिन एक इंसान ऐसे भी है जो र्पांचों वक्त नमाज और नियिमत रूप से रोजे रखने वाले उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर जिले के मोहम्मद मुस्तकीम अहमद हिन्दू समुदाय के कार्यक्रमों में देवी भजन और रामचरित मानस का पाठ कर कौमी एकता की अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं। ....  लेख पढ़ें
धरती को हरा-भरा बनाने में जुटा वाराणसी का एक डॉक्टर जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 05, 2011
अपने उपचार से लोगों की जिंदगी संवारने वाले एक डॉक्टर की चिंता पृथ्वी को भी हरा-भरा बनाने की है। डॉक्टर इलाज के साथ ही मरीजों को एक पौधा देते हैं और उनसे इस मुहिम को आगे बढ़ाने का प्रण लेते हैं। लोगों और पर्यावरण दोनों को खुशहाल बनाने की पहल उत्तर प्रदेश के वाराणसी के प्लास्टिक सर्जन सुबोध कुमार सिंह ने की है। ....  लेख पढ़ें
गुरु दक्षिणा ने बनाया एक स्कूल हरा  जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 25, 2011
मन में कुछ करने कराने की इच्छा हो , तो राहें खुल ही जाती हैं. फिर चाहे वह रगिस्तान के रेतीले इलाकों में हरियाली बिखेर देने की ही बात क्यों ना हो ? राजस्थान के सीकर में छात्र भारतीय परम्परा का निर्वहन करते हुए गुरु दक्षिणा के रूप में पौध रोपण का कार्य कर रहे हैं। राज्य के एक शासकीय स्कूल में एक अनूठी परम्परा शुरू की गई है, जहां छात्र इस स्कूल से जाने से पहले गुरु दक्षिणा के रूप में स्कूल परिसर में पौध रोपण करते हैं। ....  लेख पढ़ें
सेना छोड़ भिक्षु बने संघसेन लेह में अब बांट रहे शिक्षा जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 20, 2011
भिक्षु संघसेन को सैनिक का काम रास न आया तो वह बंदूक छोड़ भिक्षु बन गए लेकिन इससे भी उन्हें शांति न मिली तो उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के गरीब बच्चों को शिक्षित करने का निर्णय लिया। भिक्षु संघसेन चाहते हैं कि ये बच्चे भी बाकी की दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। संघसेन मानते हैं कि शिक्षा एक ऐसा हथियार है जिससे दुनिया को जीता जा सकता है। ....  लेख पढ़ें
मुम्बई का कपड़ा मजदूर यों बना घाना का सर्वश्रेष्ठ किसान जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 17, 2011
मन में कुछ करने का जज्बा हो, कुछ हासिल करने की लगन , तो मुश्किलें आपको परेशान तो कर सकती हैं, पर आपके सफलता की राह नहीं रोक सकतीं. देशवासी न जानें ऐसी -ऐसी मिसालें कहां-कहां लिख रहे हैं. अब हर्चावरी सिंह चीमा को ही लें तो वह कभी मुम्बई में कपड़ा मजदूर थे, पर आज घाना के प्रसिद्ध किसान और भारतीय मूल के सफलतम कारोबारियों में से हैं। घाना में चीमा 40 वर्ष पहले आए थे। ....  लेख पढ़ें
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