समाज
कैसे बने 'बच्चों के कल्याण के लिए समग्र वातावरण' पर संगोष्ठी विम्मी करण सूद ,  Dec 05, 2017
भारत की आबादी का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का हैं। बच्चे समाज का भविष्य हैं और उनके समग्र विकास के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेवारी है। पर यह अनुकूल वातावरण कैसे बने और समाज का घटक होने के नाते हमारी क्या ज़िम्मेदारी है- इसके साथ-साथ और भी कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने और समाधान तलाशने के लिए प्रसिद्ध स्वंयसेवी संस्था 'नारीताव फोरम' ने बीपी कोइराला नेपाल इंडिया फाउंडेशन, नेपाल दूतावास, नई दिल्ली के साथ मिलकर 'बच्चों के कल्याण के लिए समग्र वातावरण' नामक एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया. ....  लेख पढ़ें
महिलाओं के लिए एक ही रास्ता-उद्यमिता अपराजिता गुप्ता ,  Nov 20, 2017
महिला उद्यमी बनना कई लोगों की आकांक्षा हो सकती है, लेकिन क्या उद्यमी बनना इतना आसान है? रविवार को महिला उद्यमिता दिवस था। कई लोगों का कहना है कि उद्यमिता डरपोक लोगों के लिए नहीं है। नौकरशाही और लैंगिक बाधाओं से भरे मार्ग के लिए आत्मविश्वास से लबरेज होना जरूरी है। ....  लेख पढ़ें
बदले हालात में शिक्षा के प्रति उत्साहित हुईं मुस्लिम लड़कियां अबु जफर ,  Nov 12, 2017
बिहार के कटिहार जिले की गृहिणी और दो बेटों की मां गजाला तस्नीम के लिए 31 अक्टूबर का दिन खास था क्योंकि इस दिन उसका सपना साकार हुआ था। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद वह बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में 65वें स्थान के साथ उसका चयनित हुई थीं। जज की कुर्सी पर बैठने का उसका ख्वाब पूरा था। ....  लेख पढ़ें
महिलाशक्ति: आदिवासी महिलाओं ने वन-माफिया की लूट से बचाया जंगल मुदिता गिरोत्रा ,  Nov 05, 2017
पानी की बोतलों और डंडों से लैस आदिवासी महिलाओं का यह समूह झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले स्थित मुतुर्खुम गांव का है, जो अपने आसपास की साल के जंगलों में मीलों पैदल चलती हैं। इनका मसकद जंगलों को वन-माफिया की लूट से को बचाना है। अपनी सुरक्षा के लिए केवल एक कुत्ते को साथ लेकर चलने वाली इन महिलाओं का घने वन में लगतार आना-जाना रहा है। इस तरह जंगल के साथ इनका गहरा सहजीवी रिश्ता बन गया है। ....  लेख पढ़ें
ऐसा क्यों होता है कि हम दोस्तों की समस्याएं तो सुलझा लेते हैं, अपनी ? जनता जनार्दन डेस्क ,  Nov 01, 2017
ऐसा क्यों होता है कि हम दोस्तों की समस्याएं तो सुलझा लेते हैं, अपनी नहीं शोधकर्ताओं ने इस बात का पता लगाया है कि हम अक्सर दूसरे लोगों की समस्याएं सुलझाने में तो सफल रहते हैं लेकिन अपनी खुद की समस्याओं का हल नहीं कर पाते ....  लेख पढ़ें
अभिमन्यु सीमा सिंहः डिज़ाइनिंग के क्षेत्र का एक मुकम्मल नाम विम्मी करण सूद ,  Oct 29, 2017
महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं चाहे वो ज्ञान हो, विज्ञान हो या फिर कला- आज उसका कोई सानी नहीं है। कहते हैं कुदरत ने स्त्री को स्वंय को मांझने की अद्बुत प्रतिभा दी है तभी आज वह अपने लिए नित नए-नए आयाम खोज रही है। ऐसी ही नैसर्गिक प्रतिभा का एक उदाहरण हैं 'अभिमन्यु सीमा सिंह', जिन्होंने अपनी मेहनत से डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल कर लिया है। ....  लेख पढ़ें
'रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति मानवतावादी रवैया अपनाए भारत' अमूल्य गांगुली ,  Sep 11, 2017
अपने प्रचुर खनिज संसाधनों, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों व सामरिक स्थिति और भारत के साथ साझा समुद्री व भूमि सीमाओं को देखते हुए म्यांमार का भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति में महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन, म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थी केवल म्यांमार, भारत और बांग्लादेश के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता का कारण बन गए हैं। ....  लेख पढ़ें
सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई, हरमंदिर साहिब की लंगर सेवा पर जीएसटी की मार जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 14, 2017
सामुदायिक रसोई घरों के लिए खरीदी जानेवाली ज्यादातर वस्तुएं नए जीएसटी के विभिन्न करों की दरों के अंतर्गत आती हैं। सिख धर्म की लघु-संसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई गुरुद्वारों में सामुदायिक रसोईघर चलाती है, जिसमें अमृतसर का हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) भी शामिल है। ....  लेख पढ़ें
सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी, आखिर इरादा क्या है? जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 14, 2017
देश का दुर्भाग्य है कि बिंदी, सिंदूर, सूरमा और यहां तक कि कंडोम को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन सैनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी कर लगाया गया है। महिला संगठनों से लेकर विभिन्न दलों ने सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है कि क्या बिंदी और सिंदूर, सैनेटरी नैपकिन से ज्यादा जरूरी हैं? ....  लेख पढ़ें
बौद्ध बने दलितों का जीवनस्तर, शैक्षणिक स्तर बेहतर मनु मौडगिल ,  Jul 05, 2017
देशभर में बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों की संख्या 84 लाख के करीब है, जिसमें 87 फीसदी लोग धर्म परिवर्तन करा बौद्ध धर्म अपनाने वालों की है। धर्म परिवर्तन करा बौद्ध धर्म अपनाने वालों में भी अधिकांश लोग दलित समुदाय के हैं, जो हिंदू धर्म के जातिगत उत्पीड़न से बचने के लिए बौद्ध बने। ....  लेख पढ़ें
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