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समाज
ऐसा क्यों होता है कि हम दोस्तों की समस्याएं तो सुलझा लेते हैं, अपनी ? जनता जनार्दन डेस्क ,  Nov 01, 2017
ऐसा क्यों होता है कि हम दोस्तों की समस्याएं तो सुलझा लेते हैं, अपनी नहीं शोधकर्ताओं ने इस बात का पता लगाया है कि हम अक्सर दूसरे लोगों की समस्याएं सुलझाने में तो सफल रहते हैं लेकिन अपनी खुद की समस्याओं का हल नहीं कर पाते ....  लेख पढ़ें
अभिमन्यु सीमा सिंहः डिज़ाइनिंग के क्षेत्र का एक मुकम्मल नाम विम्मी करण सूद ,  Oct 29, 2017
महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं चाहे वो ज्ञान हो, विज्ञान हो या फिर कला- आज उसका कोई सानी नहीं है। कहते हैं कुदरत ने स्त्री को स्वंय को मांझने की अद्बुत प्रतिभा दी है तभी आज वह अपने लिए नित नए-नए आयाम खोज रही है। ऐसी ही नैसर्गिक प्रतिभा का एक उदाहरण हैं 'अभिमन्यु सीमा सिंह', जिन्होंने अपनी मेहनत से डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल कर लिया है। ....  लेख पढ़ें
'रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति मानवतावादी रवैया अपनाए भारत' अमूल्य गांगुली ,  Sep 11, 2017
अपने प्रचुर खनिज संसाधनों, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों व सामरिक स्थिति और भारत के साथ साझा समुद्री व भूमि सीमाओं को देखते हुए म्यांमार का भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति में महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन, म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थी केवल म्यांमार, भारत और बांग्लादेश के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता का कारण बन गए हैं। ....  लेख पढ़ें
सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई, हरमंदिर साहिब की लंगर सेवा पर जीएसटी की मार जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 14, 2017
सामुदायिक रसोई घरों के लिए खरीदी जानेवाली ज्यादातर वस्तुएं नए जीएसटी के विभिन्न करों की दरों के अंतर्गत आती हैं। सिख धर्म की लघु-संसद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कई गुरुद्वारों में सामुदायिक रसोईघर चलाती है, जिसमें अमृतसर का हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) भी शामिल है। ....  लेख पढ़ें
सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी, आखिर इरादा क्या है? जनता जनार्दन डेस्क ,  Jul 14, 2017
देश का दुर्भाग्य है कि बिंदी, सिंदूर, सूरमा और यहां तक कि कंडोम को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन सैनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी कर लगाया गया है। महिला संगठनों से लेकर विभिन्न दलों ने सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है कि क्या बिंदी और सिंदूर, सैनेटरी नैपकिन से ज्यादा जरूरी हैं? ....  लेख पढ़ें
बौद्ध बने दलितों का जीवनस्तर, शैक्षणिक स्तर बेहतर मनु मौडगिल ,  Jul 05, 2017
देशभर में बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों की संख्या 84 लाख के करीब है, जिसमें 87 फीसदी लोग धर्म परिवर्तन करा बौद्ध धर्म अपनाने वालों की है। धर्म परिवर्तन करा बौद्ध धर्म अपनाने वालों में भी अधिकांश लोग दलित समुदाय के हैं, जो हिंदू धर्म के जातिगत उत्पीड़न से बचने के लिए बौद्ध बने। ....  लेख पढ़ें
गो-रक्षा के नाम पर 97 फीसदी हमले मोदी राज में डेल्ना अब्राहम और ओजस्वी राव ,  Jul 04, 2017
हिंदुओं में पवित्र माने जाने वाले गोवंशी पशुओं की सुरक्षा के नाम पर पिछले करीब आठ वर्षो (2010 से 2017) के दौरान स्वघोषित गो-रक्षकों द्वारा की गई हिंसा के 51 फीसदी मामलों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया, जबकि इस तरह के 68 वारदातों में मरने वाले 28 भारतीय नागरिकों में 86 फीसदी पीड़ित मुस्लिम समुदाय के रहे। ....  लेख पढ़ें
सत्ता का राजपथ, जहां गांधी से लेकर शंबूक वध वाले देवताओं तक की सोच पर भारी पड़ते हैं अंबेडकर त्रिभुवन ,  Jun 20, 2017
भीमराव अंबेडकर ने जिस क्रांतिकारी सोच के बीज को भारतीय संविधान से लेकर भारतीय राजनीति की आत्मा तक में बो दिया, उसे न चाहते हुए भी, और अपनी मानसिकता पर लाख प्रहार सहने के बाद भी भारतीय राजनीतिक दलों के नेता उतारते को बेबस हैं। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम इसी का जीता-जागता प्रमाण है। ....  लेख पढ़ें
मिथिला में 700 साल पुरानी जोड़ी मिलान प्रथा कायम जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 19, 2017
कहते हैं जोड़ी स्वर्ग से बनकर आती है, लेकिन उत्तर बिहार यानी मिथिला क्षेत्र के मधुबनी जिले के सौराठ गांव में बड़ी संख्या में विवाह योग्य युवक-युवतियों की जोड़ी मिलान कर शादी कराई जाती है। सौराठ में हिंदू पंचांग के मुताबिक, ज्येष्ठ-आषाढ़ महीने के बीच (जून के अंत) में हर साल जोड़ी मिलान महोत्सव (सभा) आयोजित होता है, जहां बड़ी संख्या में ब्राह्मण परिवार के बड़े-बुजुर्ग अपने विवाह योग्य लड़के-लड़कियों के लिए उपयुक्त साथी की तलाश में आते हैं। ....  लेख पढ़ें
विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष: स्वास्थ्य, स्वच्छता के लिए हानिकारक हैं डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन जनता जनार्दन डेस्क ,  Jun 05, 2017
भारत में महिलाओं की मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतिया व अंधविश्वास के साथ इस्तेमाल होने वाले सैनिटरी पैड का सुरक्षित तरीके निपटारा होना बड़ी चुनौती बन चुकी है. भारत सरकार जहां सभी महिलाओं व लड़कियों को, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर रही है, ....  लेख पढ़ें
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