सोशल मीडिया
इंस्टाग्राम को लेकर यूजर्स की चेतावनी, नए लोकेशन शेयरिंग फ़ीचर से गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ीं जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 10, 2025
क्या आप भी इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं? तो आपके लिए एक ऐसी खबर है, जिसे कभी गुड न्यूज कहा गया था, पर उसके यूजर्स अब उसे खतरनाक बता रहे हैं. ....  लेख पढ़ें
बिग बॉस 19 में होगा AI का धमाकेदार डेब्यू, इंसानों के बीच एंट्री करेगी रोबोट कंटेस्टेंट जनता जनार्दन संवाददाता ,  Jul 03, 2025
बिग बॉस 19 में एक ऐसा ट्विस्ट आने वाला है जिसे देखना सिर्फ दिलचस्प नहीं, बल्कि चौंकाने वाला होगा. इस बार शो में किसी सेलेब्रिटी या कंट्रोवर्शियल फेस की नहीं, बल्कि एक AI रोबोट कंटेस्टेंट की एंट्री की चर्चा हो रही है. इस अनोखी कं ....  लेख पढ़ें
आपके फोन से तस्वीरें चोरी कर रहे हैं ये 29 एप्स जनता जनार्दन संवाददाता ,  Dec 30, 2019
गूगल ने इस साल एक हजार से अधिक एप्स को प्लेस्टोर से डिलीट कर दिया. इनमें से कुछ एडवेयर एप थे, कुछ मालवेयर एप थे और कुछ ऐसे एप थे जो आपकी मंजूरी के बिना आपकी बातचीत, लोकेशन आदि रिकॉर्ड करते थे. अब ऐसे 29 एप्स के बारे में पता चला है जो आपके फोन से बिना आपकी मर्जी के फोटो चोरी करते हैं. ....  लेख पढ़ें
टिप्पणी: आम आदमी को अमित मौर्य ,  Feb 04, 2019
आम आदमी को "आम" की तरह चूस रहे है मोदी जी मुग़ल कालीन जुमला है "कत्ले आम" यानी यहाँ भी आम आदमी का ही क़त्ल होता था ...अंग्रेजों के समय भी आम आदमी ही गुलाम था ...नेहरू से लेकर मोदी तक कभी भी आम आदमी की खैर नहीं रही ...आजादी के बाद से अब तक हर साल बजट लाखों करोड़ों की योजनाओं के बाद भी निम्न वर्ग आज भी वही खड़ा है जहाँ वो पहले खड़ा था किसान आज भी वैसे ही परेशान है जैसे पहले भी परेशान था लेकिन हुक्मरानों के चेहरों पर बेशर्मो की तरह मुस्कान है मध्य वर्ग के लोग लोन पर मकान या कार ख ....  लेख पढ़ें
जब मुंह खोलेंगे झूठ ही बोलेंगे, साहेब का मुंह है या झूठ का छापाखाना अमित मौर्या ,  Feb 01, 2019
साहेब से 'लल्लनटॉप मैजिक' की उम्मीद लगाई जनता सब सुनती रही देखती रही। टाइम बीतता गया तो कुछ जनता बिदकने लगी और कुछ इनके मैजिक पर सवाल खड़ी करने लगी।हद तो तब हो गयी जब जमूरे 'शाह' ने साहेब के एक मैजिक, की सबके जेब (खाते) में पन्द्रह लाख रुपये होंगे को जनता को सम्मोहित करने का 'जुमला मंत्र' बता दिया यहीं से जनता की हिप्नोटाइज हो चुकी आंखे खुलने लगी। ....  लेख पढ़ें
गणतंत्र बनाम गनतंत्र, हर तंत्र पर हावी होता गन अमित मौर्या ,  Jan 26, 2019
गणतंत्र का मतलब जहां का शासक राजा नही होता और देश की संम्पति पर उनका निजी हक नही होता। हमारा देश कहने को गणतांत्रिक व्यवस्था से चलता है, मगर यहां गनतंत्र यानी बंदूक का राज हर जगह है। जैसे बॉर्डर पर सैनिक गन लेकर ही सीमा रेखा की सुरक्षा करता है,देश में पुलिस फोर्स जनता की सुरक्षा में लगी रहती है। किसी विवादित धार्मिक परिसर को भी अर्धसैनिक बल गन लेकर ही सुरक्षा में रहते हैं। रेलेवे स्टेशन से लेकर हवाई अड्डों की सुरक्षा भी गनो की साये में रहती है। ....  लेख पढ़ें
भईया के नईया की खेवइया बनेंगी कार्यकर्ताओं की प्रिय, प्रियंका गांधी अमित मौर्या ,  Jan 23, 2019
हाल ही में तीन प्रदेश में बीजेपी को धूल चटा चुकी कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में पूरी तैयारी और दम के साथ खम ठोकेंगी। इसलिए लंबे समय से पार्टी के बड़े नेताओं की यह मांग की प्रियंका गांधी को यूपी में लगाया जाय,को स्वीकारते हुए आज पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर यूपी का प्रभारी बना दिया। कारण एक तो प्रियंका गांधी की छवि में कोई नरात्मकता नही है दूसरी बात की कार्यकर्ता प्रियंका में इंद्रा गांधी की झलक देखते हैं।बताया जाता है कि कार्यकर्ताओ से जल्दी घुलमिल जाने वाली प्रियंका को यूपी में प्रभारी बना कर इनके राजनीति कौशल को भी पार्टी परखेगी। यूपी ....  लेख पढ़ें
मीडिया आजादी से पहले और बादः पत्रकारिता और पैसे के प्रलोभन का व्यभिचार वेश्यावृत्ति जितना आदिकालीन त्रिभुवन ,  May 31, 2018
पत्रकारिता का तो प्रमुख कर्तव्य हो गया है कि वह नायकत्व को स्वीकार करे और उसकी पूजा करे। उसकी छत्रछाया में समाचार पत्रों का स्थान सनसनी ने और विवेकसम्मत मत का विवेकहीन भावावेश ने ले लिया है। लार्ड सेलिसबरी ने नार्थक्लिप पत्रकारिता के बारे में कहा है कि वह तो कार्यालय-कर्मचारियों का लेखन है। भारतीय पत्रकारिता तो उससे भी दो कदम आगे निकल गई है। ....  लेख पढ़ें
पोस्ट ट्रुथ एरा में वायरल झूठ, मीडिया मिट्ठू और चतुर शिकारियों के सम्मोहक पिंजरों में छटपटाते सच की कहानी त्रिभुवन ,  Apr 07, 2018
यह एक विचित्र बात है कि मीडिया अक्सर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका निभाने की कोशिशें करने लगता है, लेकिन जैसे ही कला, साहित्य और संगीत की बात आएगी तो वह इनसे आश्चर्यजनक दूरी बनाने लगता है। उच्च संस्कृति, स्वतंत्रता, समृद्धि और न्याय पर आधारित सौंदर्यबोध वाले समाज के निर्माण की आशा एक सुंदर फंतासी है। ....  लेख पढ़ें
सत्ता का राजपथ, जहां गांधी से लेकर शंबूक वध वाले देवताओं तक की सोच पर भारी पड़ते हैं अंबेडकर त्रिभुवन ,  Jun 20, 2017
भीमराव अंबेडकर ने जिस क्रांतिकारी सोच के बीज को भारतीय संविधान से लेकर भारतीय राजनीति की आत्मा तक में बो दिया, उसे न चाहते हुए भी, और अपनी मानसिकता पर लाख प्रहार सहने के बाद भी भारतीय राजनीतिक दलों के नेता उतारते को बेबस हैं। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम इसी का जीता-जागता प्रमाण है। ....  लेख पढ़ें
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