Sunday, 21 October 2018  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

हिरोशिमा से दसगुना ताकतवर बम की क्षमता वाला उत्तर कोरिया वाकई अपने परमाणु हथियार छोड़ देगा?

हिरोशिमा से दसगुना ताकतवर बम की क्षमता वाला उत्तर कोरिया वाकई अपने परमाणु हथियार छोड़ देगा? सियोलः उत्तर कोरिया ने जो पिछला परमाणु परीक्षण किया था उसकी मारक क्षमता अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर फेंके गए बम से दसगुना अधिक थी. जाहिर है किम जोंग उन की अगुआई में उनका देश पूरी तरह से परमाणु क्षमता संपन्न हो चुका है, ऐसे में यह सवाल उठना सहज है कि क्या वाकई उत्तर कोरिया भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रमों से विमुख हो जाएगा जैसा कि वह वादा कर रहा है.

आगामी 12 जून 2018 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन की मुलाकात पर दुनियाभर की नजर है. इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं. अब इसी संबंध में दक्षिण कोरिया के एक विशेषज्ञ ने अपनी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि उत्तर कोरिया पूरी तरह से परमाणु हथियारों का आत्मसमर्पण कभी नहीं करेगा.

अगस्त 2016 में ब्रिटेन में उत्तर के उप राजदूत के रूप में अपनी सेवा देने वाले थे- योंग-हो ने कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता एक ईमानदार और पूर्ण निरस्त्रीकरण के निष्कर्ष साथ समाप्त नहीं होगा, लेकिन "उत्तरी कोरिया के परमाणु खतरे को कम जरुर किया जाएगा." अंत में उत्तर कोरिया नॉन-न्युक्लियर स्टेट के रूप में एक न्युक्लियर पावर वाला राज्य बना ही रहेगा. थे ने दक्षिण न्यूसिस न्यूज एजेंसी से ये बातें कहीं.

उनकी ये टिप्पणी ट्रंप-किम की मुलाकात से ठीक एक महीने पहले आई है. उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों ने पिछले महीने शिखर सम्मेलन के दौरान परमाणु निरस्त्रीकरण पर सहमति जताई थी. साथ ही प्योंगयांग ने इस सप्ताहांत घोषणा की थी कि वह अपने परमाणु परीक्षण स्थल को ध्वस्त कर देगा. हालांकि इस बयान को सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा गया था. जबकि वाशिंगटन इस बात की पूरी उम्मीद कर रहा है कि उत्तर कोरिया परमाणु कर्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की पूरी गारंटी दे.

दूसरी तरफ प्योंगयांग ने कहा है कि अगर उसके इलाके की सुरक्षा की गारंटी दी जाती है, तो उसे किसी तरह के परमाणु हथियार की आवश्यकता नहीं है. लेकिन थे ने कहा है कि उत्तर कोरिया इस बात का तर्क देगा कि पूर्ण  परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया उत्तर कोरिया को पतन की राह पर ले जाएगा. आपको बता दें कि पिछले महीने पार्टी मीटिंग में किम ने कहा था कि उत्तर कोरिया की परमाणु शक्ति का विकास पूरा हो चुका है और वादा किया था कि अब और परमाणु हथियारों का परीक्षण नहीं किया जाएगा. थे ने इस पर अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा कभी नहीं हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि लोगों को ये महसूस करना चाहिए कि उत्तर कोरिया किसी भी अन्य मुद्दे से ज्यादा परमाणु कार्यक्रम पर अपना बयान देता है.

कोरियाई प्रायद्वीप पर पिछले साल लगातार परमाणु हथियारों का परीक्षण करने के बाद उत्तर कोरिया पर अमेरिका सहित अन्य कई देशों के द्वारा कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किम पर हमला करने की भी धमकी दी थी. लेकिन तभी विंटर ओलंपिक की शुरुआत हुई औऱ दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के संबंधों में मधुरता देखी गई. इसी बीच वाशिंगटन और प्योंगयांग के बीच सिंगापुर में शिखर सम्मेलन पर भी सहमति बनी.

इसके बाद किम के विदेश नीति में भी काफी बदलाव देखने को मिले. सत्ता में आने के छह सालों तक किसी तरह के विदेश दौरा नहीं करने वाले किम ने दो बार चीन का दौरा करके विश्व को चौंका दिया. वहीं इसके बाद दक्षिण कोरियाई नेता मून-जे-इन के साथ गैर-सैन्यीकरण क्षेत्र में भी मुलाकात की. उत्तर कोरिया के विदेश नीति में आए अचानक से इस बदलाव के पीछे अन्य देशों के द्वारा उस पर लगाया गया प्रतिबंध है.

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कोयले, फिश, टेक्सटाइल के क्षेत्र और विदेशी कर्मियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि उत्तर कोरिया ने कभी इन प्रतिबंधों का सख्ती से विरोध नहीं किया. इन धमकियों और प्रतिबंधों ने करोडों उत्तर कोरियाई नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया था. थे ने चेतावनी देते हुए कहा कि, उत्तर कोरिया की ये कूटनीतिक रणनीति है जिससे स्थिति अत्यधिक टकराव वाली बन सकती है.

अमेरिका और ईरान के परमाणु करार के टूटने से दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन भी परेशान हैं. कई महीनों की कोशिश के बाद वह उत्तर कोरियाई नेतृत्व को शांतिपूर्ण बातचीत की राह पर लाए. लेकिन साझेदार देशों की अनसुनी करते हुए कदम उठाने वाले ट्रंप के फैसलों से दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति भी खिन्न हैं.

अमेरिकी विशेषज्ञ भी अपने राष्ट्रपति के कदमों को आलोचना भरी नजरों से देख रहे हैं. बराक ओबामा के कार्यकाल में उप विदेश मंत्री रह चुके एंटोनी ब्लिंकन ने ट्विटर पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या किम अमेरिकी मध्यस्थकारों पर भरोसा करेंगे, वो भी तब जब ट्रंप "मनमाने ढंग से समझौतों को तोड़ते हैं."

विपिन नारंग, अमेरिका के प्रतिष्ठित कॉलेज मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पॉलिटिकल साइंस के एसोशिएट प्रोफेसर हैं. उनकी राय भी ब्लिंकन से काफी मिलती है. ट्वीट के जरिए नारंग ने कहा, ट्रंप का फैसला "दुनिया भर में इस बात का मजबूत रिमाइंडर है कि समझौते उलटे भी जा सकते हैं और उनकी एक्सपायरी डेट भी हो सकती है."

अप्रैल 2018 में ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने एलान करते हुए कहा कि वह उत्तर कोरिया के निशस्त्रीकरण के लिए "लीबिया के मॉडल से प्रभावित" हैं. सन 2000 के दशक में लीबिया के तत्कालीन शासक मुअम्मर गद्दाफी ने पश्चिमी दबाव के चलते परमाणु कार्यक्रम छोड़ दिया.

लीबिया मॉडल से प्रभावित बॉल्टन यह बताने में नाकाम रहे कि 2011 में लीबिया की सरकार को गिरा दिया गया. और इस दौरान पश्चिम ने हवाई हमले कर गद्दाफी के विरोधियों की मदद की. गद्दाफी को भीड़ ने बर्बर तरीके से मारा. लीबिया के घटनाक्रम की वजह से ही प्योंग्यांग के सख्त मिजाज अधिकारी हर कीमत पर परमाणु हथियार बरकरार रखना चाहते हैं. परमाणु हथियारों को वो जीवन बीमा समझते हैं.

विदेश नीति की नजर से देखें तो प्योंगयांग के साथ होने वाली बातचीत से पहले ही वॉशिंगटन की ईमानदारी पर संदेह पैदा हो गया है. अभी तक उत्तर कोरिया ने यही इशारा दिया है कि परमाणु निशस्त्रीकरण तभी मुमकिन है जब अमेरिका के साथ शांति समझौता हो. लेकिन विदेश मंत्री पोम्पेओ ने लीबिया मॉडल का जिक्र कर जो गलती की है, उससे कई शंकाएं पैदा हो गई हैं. प्योंगयांग जाते हुए विमान में पोम्पेयो ने उत्तर कोरिया के शासक को "चेयरमैन उन" कहा. विदेश मंत्री को इतना भी नहीं पता था कि उत्तर कोरियाई शासक का पारिवारिक नाम किम है.

तानाशाह किमजोंग उत्तर कोरिया अपने पूर्वोत्तर में पुंगेरी से परमाणु विस्फोटों के जरिये पूरी दुनिया को डराता रहा है. पाकिस्तान ही उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रमों में मददगार रहा है. उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के बीच 1990 के दौर में करीबी संबंध बने थे. इसके बाद उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के बीच लिक्विड फ्यूल्ड बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के समझौते हुए.

बता दें कि उत्तर कोरिया भविष्य में पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निकट संपर्क और बातचीत को बढ़ावा देना चाहता है. जिससे कोरियाई प्रायद्वीप पर और पूरे विश्व में शांति और स्थायित्व की रक्षा हो सके. लेकिन अब उत्तर कोरिया शांति की बात कर रहा है. जानकारी के अनुसार  उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षण स्थल को नष्ट करने की घोषणा की है. 
 
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया अब से कुछ महीनों पहले तक गैर जिम्मेदार परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने की जिद की वजह से दुनिया से लगभग अलग सा था. गौरतलब है कि उत्तर कोरिया को परमाणु ताकत हासिल करने में पाकिस्तान ने ही मदद की थी. पाकिस्तान ही उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रमों में मददगार रहा है. पाकिस्तान ने चोरी-छिपे उत्तर कोरिया की मदद की और उसे परमाणु हथियार विकसित करने में सहायता की.
वोट दें

क्या बलात्कार जैसे घृणित अपराध का धार्मिक, जातीय वर्गीकरण होना चाहिए?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack