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खास लोग
वाजपेयी की राजनीति को करीब से न देख पाने की बदनसीबी... जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 17, 2018
साल 2002 में दूरदर्शन पर 'सर्व शिक्षा अभियान' के तहत एक विज्ञापन देखा करते थे, जिसकी शुरुआत में अटल बिहारी वाजपेयी नजर आते थे। आज जब वह हमारे बीच नहीं हैं, तो उनका वही सौम्य चेहरा और आत्मविश्वास से लबरेज आवाज दिलो-दिमाग में गूंज रही है। उनका निधन एक सदी का अंत नहीं, बल्कि एक तरह की राजनीति का अंत है। ....  लेख पढ़ें
अटल बिहारी वाजपेयी, जिन्होंने संसद से संयुक्त राष्ट्र तक लहराया था हिंदी का परचम जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 17, 2018
'एक-दो नहीं, कर लो बीसियों समझौते, पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा', संसद में पोखरण परीक्षण के बाद दिए गए तेजस्वी भाषण और सन् 1977 में संयुक्त राष्ट्र के 32वें अधिवेशन में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति विख्यात कवि, लेखक, पत्रकार और दिग्गज राजनेता भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की एम्स में अंतिम सांसें थमने के साथ एक युग का गुरुवार को अंत हो गया। ....  लेख पढ़ें
अटल बिहारी वाजपेयी: नए भारत के सारथी और सूत्रधार जनता जनार्दन डेस्क ,  Aug 17, 2018
भारत रत्न, सरस्वती पुत्र और देश की राजनीति के युगवाहक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और जनसेवा को समर्पित रहा। वे सच्चे अर्थों में नवीन भारत के सारथी और सूत्रधार थे। वे एक ऐसे युग मनीषी थे, जिनके हाथों में काल के कपाल पर लिखने व मिटाने का अमरत्व था। ....  लेख पढ़ें
ऐसे थे कवि अटलः 'रार नहीं मानूंगा' कहने वाले की जब 'मौत से ठन गई' जनता जनार्दन संवाददाता ,  Aug 16, 2018
अटल जी बेहद जिंदादिल इनसान थे. ऊंचाई पर पहुंचकर भी गर्व ने उन्हें नहीं छुआ था. अटल बिहारी वाजपेयी अगर राजनेता और भारत के प्रधानमंत्री न भी होते तो भी एक कवि, पत्रकार और हिंदी सेवी के रूप में देश की अनन्य सेवा करने के लिए जाने-पहचाने जाते. अटल जी एक राजनेता के साथ ही बेहतरीन वक्ता और कवि के तौर पर पूरे देश में चर्चित रहे. ....  लेख पढ़ें
धरती को बचाना है तो हर कोई लगाए 5 पेड़ः 'वृक्ष बंधु' परशुराम सिंह अमिय पाण्डेय ,  Jul 09, 2018
पिछले दो दशक में एक लाख से ज्यादा पेड़ लगा कर उनकी देखभाल करने वाले परशुराम सिंह का मानना है कि बच्चों को शुरू से ही पर्यावरण के प्रति सचेत रहने कि शिक्षा दी जाये ताकि वे भविष्य में पर्यावरण को संतुलित रख सकें. गांव-गांव जाकर पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के चलते सिंह को 'वृक्ष बंधू' की उपाधि मिल चुकी है और उन्हें मिले अवार्डों से उनका पूरा एक कमरा भरा है. ....  लेख पढ़ें
स्वामी सहजानन्द सरस्वती: उनसा दूजा कोई नहीं, शायद इतिहास खुद को दुहरा न पाए! गोपाल जी राय ,  Jun 29, 2018
भारतीय राजनीति में जब भी किसानों की चर्चा होती है तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार संगठित करने वाले दंडी स्वामी स्वामी सहजानन्द सरस्वती की याद बरबस आ जाती है। यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी किसानों के पहले और अंतिम अखिल भारतीय नेता थे तो गलत नहीं होगा। दरअसल, वो पहले ऐसे किसान नेता थे जिन्होंने किसानों के सुलगते हुए सवालों को स्वर तो दिया, लेकिन उसके आधार पर कभी खुद को विधान सभा या संसद में भेजने की सियासी भीख आमलोगों से कभी नहीं मांगी ....  लेख पढ़ें
बीएस येदियुरप्पाः एक क्लर्क, जो 300 की नौकरी से सत्ता के शिखर तक पहुंचा जनता जनार्दन संवाददाता ,  May 17, 2018
बीएस येदियुरप्पा 75 बसंत देख चुके हैं. उनका जन्म 27 फरवरी 1943 को राज्य के मांड्या जिले के बुकानाकेरे में सिद्धलिंगप्पा और पुत्तथयम्मा के घर हुआ था. चार साल की उम्र में ही उनकी मां का निधन हो गया. ....  लेख पढ़ें
बुद्ध जयंतीः परंपरा और धर्म पर ज्ञान और अहिंसा की सर्वोच्चता- सहज है बौद्ध बनना, पर चलना कठिन जनता जनार्दन डेस्क ,  Apr 30, 2018
महात्मा बुद्ध...बुद्ध यानी बोध, बोध मतलब ज्ञान. आज से लगभग ढ़ाई हजार वर्ष पहले वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म उस समय हुआ था, जब भारत में घोर अंधविश्वास, धार्मिक पाखंड, जाति-प्रथा व बलि प्रथा जैसी अनेक अमानवीय कुरीतियां फल-फूल रही थीं. उस दौर में समाज की तार्किक शक्ति क्षीण हो गई थी. ....  लेख पढ़ें
श्रद्धांजलिः स्टीफन हॉकिंग, जिन्होंने कहा मृत्यु के बाद कोई जीवन या स्वर्ग नहीं जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 14, 2018
ब्रह्माण्ड और खगोलीय दुनिया के बारे में जानना जितना रोचक है, इस रहस्यमयी दुनिया को आम लोगों के बीच पहुंचाने वाले महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन उससे भी ज्यादा प्रेरक और रोमांचित करने वाला है. 8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड में जन्में स्टीफन हॉकिंग के पिता रिसर्च बायोलॉजिस्ट थे और मां इकॉनमी की स्टूडेंट थीं. लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के चलते जन्म के बाद ही उन्हें अपनी मां के साथ लंदन जाना पड़ा. ....  लेख पढ़ें
स्टीफन हॉकिंगः मानव दिमाग की महत्ता को स्थापित करने वाले अप्रतिम भौतिक विज्ञानी जनता जनार्दन संवाददाता ,  Mar 14, 2018
स्टीफन हॉकिंग अब नहीं रहे, लेकिन स्‍टीफन ही वह वैज्ञानिक हैं, जिन्‍होंने इस ब्रह्मांड की संरचना की शुरुआत ब्‍लैक होल से होने की बात की थी. लेकिन स्‍टीफन की कहानी में जितना विज्ञान है, उतना ही संघर्ष और प्‍यार भी है. एएलएस बीमारी से जूझते स्‍टीफन ने अपनी थ्‍योरी से फिजिक्‍स की दुनिया में लगभग कमाल ही किया था. साल 2014 में इस महान वैज्ञानिक के जीवन पर एक फिल्‍म बनी, जिसका नाम है 'द थ्‍योरी ऑफ एव्री थिंग'. ....  लेख पढ़ें
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